सोना ₹2500 और चांदी ₹7000 सस्ती, अभी गोल्ड में निवेश करें या फिर इंतजार करना सही; क्या है एक्सपर्ट की राय
Silver Price: ग्लोबल मार्केट में जियो-पॉलिटिकल टेंशन और क्रूड ऑयल की कीमत में उतार-चढ़ाव के बीच पिछले चार दिन से सोने और चांदी के दामों में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है. इससे आगामी त्योहारी सीजन से पहले निवेशकों और खरीदारों के मन में कई सवाल खड़े हो गए हैं.
Gold and Silver Price: अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव और क्रूड की कीमत में चल रही उठा-पटक के बीच सोने-चांदी के दाम में पिछले चार दिन से लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है. मौजूदा हफ्ते की शुरुआत से लेकर गुरुवार शाम तक दोनों कीमती धातुओं के रेट में गिरावट आई. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या यह गिरावट का दौर आने वाले समय में भी जारी रहेगा या फिर दाम में तेजी आएगी? त्योहारी सीजन करवाचौथ, धनतेरस और दिवाली के त्योहार आने वाले हैं और इस दौरान सोने-चांदी की डिमांड भी बढ़ जाती है. पिछले चार दिन के दौरान ही चांदी में करीब 7000 रुपये की और सोने में 2,500 रुपये गिरावट आ चुकी है.
इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) की तरफ से गुरुवार शाम को जारी रेट के अनुसार 24 कैरेट वाला गोल्ड गिरकर 150785 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ. इसके अलावा चांदी की बात करें तो यह एक ही दिन में 4,518 रुपये टूटकर 2.28 लाख रुपये पर पहुंच गई. इसी दिन 22 कैरेट वाला सोना गिरकर 138119 रुपये प्रति 10 ग्राम और 18 कैरेट गोल्ड गिरकर 113089 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया. पिछले हफ्ते के आखिर में 24 कैरेट वाला गोल्ड 153727 रुपये प्रति 10 ग्राम के लेवल पर बंद हुआ था.
200 प्रतिशत से ज्यादा का शानदार रिटर्न
ऑस्ट्रेलियाई हेज फंड मैनेजर राफेल लैम के अनुसार सोने की कीमत में हालिया कमजोरी अस्थायी है. गौरतलब है कि उनका लॉन्ग-शॉर्ट गोल्ड फंड लॉन्च होने के बाद से अब तक निवेशकों को 200 प्रतिशत से ज्यादा का शानदार रिटर्न दे चुका है. लैम का साफतौर पर यह मानना है कि सोने की कीमत को लंबे समय तक ऊंचाई पर बनाए रखने वाले अहम कारक अब भी पूरी तरह मजबूत बने हुए हैं.
लॉन्ग टर्म के लिये किया गया निवेश मजबूती देगा
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, फंड मैनेजर लैम का मानना है कि अहम ग्लोबल इकोनॉमी की राजकोषीय स्थिति संभलने के लायक नहीं बची है. खास तौर पर अमेरिकी सरकार का 40 खरब डॉलर से ज्यादा का भारी-भरकम लोन और दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों की तरफ से सोने की लगातार खरीदारी, लॉन्ग टर्म के लिये किया गया निवेश इसको मजबूती देगा. हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि शॉर्ट टर्म रुझान अमेरिका-ईरान के बीच तनाव, केंद्रीय बैंकों की ब्याज दर और महंगाई के आंकड़ों से तय होंगे.
जनवरी में ऑल टाइम हाई पर पहुंचा था गोल्ड
इस साल की शुरुआत में जनवरी के महीने सोने की कीमत ने अपना ऑल टाइम हाई टच किया था. इसके बाद सोने की कीमत में लगातार गिरावट का दौर जारी है. एनर्जी के बढ़ते दाम और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की तरफ से ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका ने सोने की कीमत पर निगेटिव असर डाला है. फरवरी 2026 के आखिर में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच छिड़ी जंग के बाद सोने के रेट में 16 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की जा चुकी है. हालांकि, जानकारों का यही कहना है कि इस संघर्ष के कारण बाजार में भले ही कुछ समय के लिए प्रतिकूल परिस्थितियां बनी हैं लेकिन यह मंदी पूरी तरह से अस्थायी है. अमेरिका और ईरान के बीच स्थितियां सामान्य होने के बाद आने वाले समय में इसमें तेजी बने रहने के आसार हैं.
इंटरनेशनल मार्केट का हाल
इंटरनेशनल मार्केट में भी सोने-चांदी की कीमत में गिरावट देखी जा रही है. गुरुवार शाम के बाद शुक्रवार सुबह कारोबारी सत्र के दौरान मामूली तेजी देखी गई. एक दिन पहले गुरुवार शाम को सोना गिरकर 4,286 यूएस डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ था. हेज फंड मैनेजर लैम ने यह भी बताया कि जब सोने के रेट 4,000 डॉलर से नीचे गिरे थे तो उनकी टीम ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए लॉन्ग पोजीशन में भारी निवेश किया था.