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IMF Warning: IMF ने चेतावनी दी है कि मिडिल ईस्ट में लंबे समय तक चलने वाला युद्ध और एनर्जी प्रोडक्शन अभी भी बड़ा खतरा बना हुआ है. इस एरिया में शिपिंग मार्गों और महत्वपूर्ण इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स में फिर से आने वाली रुकावटें दुनिया के लिए खतरा हैं. खासकर मिडिल ईस्ट और मध्य एशिया की अर्थव्यवस्थाओं के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं. IMF को उम्मीद है कि 2026 में इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में भारी गिरावट आएगी. इसके बाद 2027 में सुधार देखने को मिल सकता है.
IMF ने चेतावनी दी कि एनर्जी शॉक से निपटने के लिए मौजूद सुरक्षा उपाय (बफर) अब कम होते जा रहे हैं. IMF में मिडिल ईस्ट और मध्य एशिया के निदेशक जिहाद अजौर ने कहा कि ये संघर्ष पूरे क्षेत्र में असमान आर्थिक झटके पैदा कर रहा है. इससे सीधे तौर पर प्रभावित देश भारी दबाव का सामना कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि भविष्य की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि ऊर्जा उत्पादन और व्यापार कितनी जल्दी सामान्य होते हैं और सरकारें व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में कितनी सक्षम रहती हैं.
बैंकॉक में IMF और विश्व बैंक की वार्षिक बैठकों के दौरान जिहाद अजौर ने कहा कि बफर्स ने कुछ समय तो दिया है. लेकिन, ये सीमित हैं. इन्वेंट्री (भंडार) कम हो गई है. अतिरिक्त कैपिसिटी भी बहुत कम बची है और अगर फिर से कोई रुकावट आती है, तो कीमतों में बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है.
फिस्कल सरप्लस, शिपिंग के वैकल्पिक रास्ते, मांग में बदलाव और भारी मात्रा में इन्वेंट्री का इस्तेमाल- इन सबने मिलकर उस 'एनर्जी शॉक' को नियंत्रित करने में मदद की है, जो ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों और ईरान द्वारा 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को बंद करने की वजह से पैदा हुआ था.
लेकिन, इन्वेंट्री कम होने और अतिरिक्त क्षमता बहुत सीमित रह जाने के कारण अगर आगे कोई और रुकावट आती है, तो कीमतों में बहुत तेज उतार-चढ़ाव आ सकता है. इससे अर्थव्यवस्थाएं एनर्जी मार्केट में होने वाली नई अस्थिरता के प्रति और अधिक संवेदनशील हो जाएंगी.
IMF का अनुमान है कि मिडिल ईस्ट, उत्तरी अफ्रीका और पाकिस्तान के क्षेत्र में 2025 में 3.3% की ग्रोथ के बाद 2026 में 1.3% की गिरावट आएगी. उम्मीद है कि 2027 में इस क्षेत्र में फिर से 6.6% की ग्रोथ होगी. लेकिन, अलग-अलग अर्थव्यवस्थाओं में ये रिकवरी काफी अलग-अलग स्तर की हो सकती है.
युद्ध से सीधे प्रभावित तेल-निर्यात करने वाले देशों में 2026 के दौरान भारी गिरावट आने की आशंका है. इसके बाद, 2027 में ऊर्जा उत्पादन के सामान्य होने पर इनमें तेजी से सुधार (रिकवरी) देखने को मिल सकता है. जिहाद अजौर ने कहा कि इस क्षेत्र की तेल-आयात करने वाली अर्थव्यवस्थाओं ने विपरीत परिस्थितियों का डटकर सामना किया है और आगे भी उनके ऐसा ही बने रहने की उम्मीद है.
IMF का अनुमान है कि मध्य एशिया क्षेत्र में विकास दर 2025 के 6.2% से घटकर 2026 में 5.2% और 2027 में 5% रह सकती है. जिहाद अजौर ने कहा कि नीति-निर्माताओं को कीमतों में स्थिरता लाने और भविष्य के झटकों का सामना करने की अपनी क्षमता को बढ़ाने पर प्राथमिकता देनी चाहिए.