क्रूड ऑयल में फिर आया उबाल, जंग के बीच 6 महीने में पहली बार 110 डॉलर पर पहुंचा कच्चा तेल
मिडिल ईस्ट में एक बार फिर से बढ़ रहे तनाव, सऊदी के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों की अफवाह और रूस-यूक्रेन के बीच चल रहे संघर्ष का असर यह हुआ कि क्रूड ऑयल 110 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. यह मई के बाद क्रूड ऑयल का सबसे रिकॉर्ड लेवल है.
Crude Oil Price: मिडिल ईस्ट में चल रही टेंशन के बीच दुनियाभर के एनर्जी मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमत रुख समझ नहीं आ रहा. एक दिन की गिरावट के बाद इसमें फिर से जोरदार उछाल दर्ज किया गया. अमेरिका और ईरान के बीच बने हुए तनाव और रूस से जुड़ी सप्लाई की चिंता ने निवेशकों की नींद उड़ाकर रख दी है. हालात इतने खराब हो गए हैं कि मई के बाद पहली बार क्रूड ऑयल के दाम 110 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गए हैं. तेल के बेकाबू दाम से दुनियाभर के बाजार में फिर से हलचल मच गई है. इंटरनेशनल मार्केट में शुक्रवार रात को क्रूड ऑयल के रेट रिकॉर्ड तोड़ लेवल पर पहुंच गए.
कारोबारी सत्र के अंत में ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 3.94 डॉलर के उछाल के साथ 109.9 डॉलर पर बंद हुआ, यह 19 मई के बाद का सबसे हाई लेवल बताया जा रहा है. दूसरी तरफ WTI क्रूड के दाम भी 3.44 डॉलर की छलांग लगाकर 101.4 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ. पूरे कारोबारी वी के दौरान ब्रेंट क्रूड 4.9% और WTI क्रूड 10.4% ऊपर चढ़ गया है. बाजार से जुड़े जानकारों का यही मानना है कि दाम में यह तेजी मिडिल ईस्ट में लगातार बिगड़ रहे हालात की वजह से आई है.
सप्लाई में रुकावट का खतरा और भी बढ़ा
सऊदी अरब के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर संभावित हमलों की अफवाह और ईरान की तरफ से किसी भी समय प्री-एम्पटिव स्ट्राइक किये जाने की खबरों के बाद निवेशक डरे हुए हैं. हालांकि, इन खबरों को लेकर अभी तक पुष्टि नहीं हो सकी है. कुछ दिन पहले ही सऊदी नीत गठबंधन ने रेड सी के पोर्ट यान्बु की तरफ दागी गई बैलिस्टिक मिसाइल को हवा में नष्ट कर दिया. इसके बाद तेल की सप्लाई में रुकावट का खतरा और भी ज्यादा बढ़ गया.
होर्मुज के आसपास जहाजों पर हमलों में तेजी आई
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने का असर ग्लोबल शिपिंग पर भी देखा जा रहा है. पिछले 10 दिन के दौरान होर्मुज स्ट्रेट के आसपास जहाजों पर हमलों में तेजी आई है. ईरान की तरफ से कहा गया कि उसने अपने पोर्ट की अमेरिकी नाकेबंदी और नए बैन के जवाब में हमले किए हैं. विश्लेष्कों का कहना है कि खाड़ी देशों से होने वाली तेल की सप्लाई काफी कम हो गई है और जब तक कोई बड़ा समझौता नहीं हो जाता, तब तक हालात सुधरना मुश्किल है.
यूक्रेन ने रूस की बड़ी तेल रिफाइनरी पर ड्रोन हमला किया
दूसरी तरफ रूस और यूक्रेन के बीच की संघर्ष भी आग में घी का काम कर रही है. यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की की तरफ से अमेरिका समर्थित सीजफायर एग्रीमेंट से पीछे हटने के बाद यूक्रेन ने रूस की बड़ी तेल रिफाइनरी पर ड्रोन हमला कर दिया. ट्रेडर्स इस बात को लेकर असमंजस में है कि रूस आगे चलकर इंटरनेशनल मार्केट में कितना डीजल सप्लाई कर पाएगा. लगातार बढ़ रहे दाम को कंट्रोल करने के लिए अंतरराष्ट्रीय संगठन और सरकारें एक्टिव हो गई हैं.
तेल को लेकर किसी तरह की किल्लत न हो इसके लिए इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) की तरफ से तेल की सप्लाई बढ़ाने के लिए 2 करोड़ से ज्यादा बैरल फ्यूल रिलीज करने पर सहमति जताई गई है. अमेरिका ने भी स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व से 1.7 करोड़ बैरल क्रूड ऑयल एक्सचेंज करने का प्रपोजल मांगा है.