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मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के बीच बातचीत से समाधान निकालने की खबरों का असर बाजार पर भी देखा जा रहा है. इसके बाद ग्लोबल एनर्जी मार्केट में कच्चे तेल की कीमत को लेकर नया अपडेट सामने आया है और तेल की कीमत में हल्की राहत देखने को मिल रही है. इसी का असर रहा कि मंगलवार सुबह ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 66 सेंट टूटकर 115.15 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI क्रूड) 44 सेंट की गिरावट के साथ 101.32 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है.
क्रूड ऑयल की कीमत में आई इस गिरावट का कारण सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान की तरफ से तेहरान में ईरानी अधिकारियों के साथ हुई अहम बातचीत को माना जा रहा है. इस बातचीत का मकसद पिछले कई महीने से चल रहे सैन्य तनाव को रोकना और शांति का रास्ता तलाशना है. चारों देशों की तरफ से शांति और सुरक्षा के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई गई है. इस सहमति का असर यह हुआ कि बाजार में रिस्क का माहौल थोड़ा कम हुआ है.
कच्चे तेल की कीमत में गिरावट के बावजूद ब्रेंट क्रूड अभी भी छह महीने के रिकॉर्ड लेवल के करीब बना हुआ है. इसकी अहम कारण हूती विद्रोहियों की तरफ से सऊदी अरब पर हमले जारी होना है. इसके अलावा, होर्मुज स्ट्रेट जैसे अहम समुद्री रास्ते पर जहाजों पर हमले बढ़े हैं. इस अहम रास्ते के जरिये दुनिया की करीब 20 फीसदी एनर्जी सप्लाई होती है और इसे तेल की सप्लाई के हिसाब से बेहद संवेदनशील माना गया है.
दूसरी तरफ ग्लोबल मोर्चे पर रूसी रिफाइनरियों ने अक्टूबर में डीजल का प्रोडक्शन बढ़ा दिया है. यह प्रोडक्शन अमेरिका के उस फैसले के बाद दिया गया है जिसमें सरकार ने एक्सपोर्ट कोटे को मंजूरी दी है. पिछले हफ्ते जबरदस्त तेजी के साथ हफ्ते ब्रेंट चढ़कर 117 डॉलर प्रति बैरल के लेवल पर पहुंच गया था. लेकिन हालिया कूटनीतिक प्रयास के बाद फिलहाल तेजी से बढ़ रही कीमत पर कुछ ब्रेक लगा है.
क्रूड के दाम फिर से रिकॉर्ड लेवल पर पहुंचे तो देश की प्राइवेट कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल के रेट में इजाफा कर दिया. हालांकि, सरकारी तेल कंपनियों ने दाम में किसी तरह का बदलाव नहीं किया और मई वाले लेवल पर ही बने रहे. मंगलवार सुबह इंडियन ऑयल की तरफ से जारी किये गए पेट्रोल-डीजल का रेट पुरानी ही दर पर कायम रहा. दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पर ही बना हुआ है.