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इंटरनेशनल ऑयल मार्केट में एक बार फिर बड़ा भूचाल देखने को मिल रहा है. मिड टर्म इलेक्शन में ट्रंप की हार के बाद क्रूड ऑयल के दाम में जबरदस्त गिरावट देखी गई थी और कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे चला गया था. लेकिन अब एक बार फिर से इसके इंटरनेशनल प्राइस में तेजी देखी जा रही है. मिडिल ईस्ट में तेल टैंकरों पर हुए हालिया हमलों और यूएस-ईरान जंग के गहराते संकट के कारण निवेशकों में डर का माहौल है. इसका सीधा असर इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल के दाम पर देखा जा रहा है. शुक्रवार सुबह ब्रेंट क्रूड एक बार फिर उछलकर 99 डॉलर के पार चला गया है. इसके अलावा WTI क्रूड भी 91 डॉलर पर पहुंच गया है.
इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड के दाम में आई तेजी बुधवार के ठीक उलट है. बुधवार को क्रूड के दोनों बेंचमार्क 8% से भी ज्यादा टूटकर 31 अगस्त के बाद के सबसे निचले लेवल पर आ गए थे. जानकारों के अनुसार मार्केट में यह रिकवरी शिपिंग रूट्स की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंता के कारण आई है. ऑयल मार्केट में तेजी का अहम कारण फारस की खाड़ी में तेल के टैंकरों पर लगातार हो रहे हमले हैं. UKMTO के अनुसार संडे से लेकर अब तक कम से कम 5 जहाजों पर हमले की खबर है. अक्टूबर के महीने में 35 जहाजों को निशाना बनाया गया था. यह इस जंग के दौरान का जहाजों पर हमले का सबसे बड़ा आंकड़ा है.
जानकारों का कहना है माइन्स और ड्रोन से टैंकरों को निशाना बनाए जाने के कारण निवेशक डरे हुए हैं. ईरान भी अमेरिका के साथ बातचीत में अपनी शर्तों पर अड़ा है. फरवरी में डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ जो जंग शुरू की थी, उसके बाद तेल की कीमत तेजी से बढ़ी थीं. इस जंग का असर अमेरिका के हालिया मिडटर्म इलेक्शन पर भी देखने को मिला. चुनावी नतीजों में डेमोक्रेट्स ने संसद के दोनों सदन पर नियंत्रण हासिल कर लिया. Citi के रिसर्च नोट के अनुसार चुनाव खत्म होने के बाद व्हाइट हाउस अपनी फॉरेन पॉलिसी की शक्तियों का इस्तेमाल ईरान के साथ जंग को और तेज कर सकता है. इस कारण आने वाले दिनों में सप्लाई का संकट गहरा सकता है.
रिसर्च फर्म Eurasia Group ने अमेरिका की तरफ से ईरान पर दोबारा स्ट्राइक की संभावना को 65% से घटाकर 60% कर दिया है. लेकिन शांति समझौते की उम्मीद को भी 20% से घटाकर 10% कर दिया है. यह भी उम्मीद जताई कि अमेरिका और ईरान के बीच का गतिरोध लंबे समय तक बना रह सकता है. Eurasia Group की तरफ से चेतावनी जारी की गई कि यदि संघर्ष में कोई भी बड़ा मोड़ आया तो ब्रेंट क्रूड के दाम आसानी से $110 से $125 प्रति बैरल के दायरे में पहुंच सकते हैं.
दुनिया के सबसे बड़े ऑयल एक्सपोर्टर देश सऊदी अरब ने लाल सागर एक्सपोर्ट हब पर संभावित खतरे को लेकर चेतावनी जारी की है. दरअसल, यमन के हूती विद्रोहियों की तरफ से लगातार हमले किये जा रहे हैं. दूसरी तरफ यूक्रेन ने रूस की तेल रिफाइनरियों पर ड़ोन हमलों को तेज कर दिया है. मास्को के साउथ-ईस्ट में स्थित रियाजान (Ryazan) तेल रिफाइनरी पर बड़ा हमला हुआ है. इससे रूस की तरफ से डीजल एक्सपोर्ट करने की कैपेसिटी पर भी सवाल खड़ा हो गया है.