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अमेरिकी मिड टर्म इलेक्शन में डोनाल्ड ट्रंप को झटका लगने के बाद कच्चे तेल में बड़ी गिरावट देखी जा रही है. ग्लोबल ऑयल मार्केट में ब्रेंट क्रूड 118 डॉलर प्रति बैरल के करीब ट्रेड कर रहा था, वहीं एक ही झटके में गिरकर 94 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है. डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 8% से ज्यादा टूटकर 88 डॉलर प्रति बैरल के नीचे पहुंच गया. अमेरिकी चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी को हार मिलने के बाद डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने साफ तौर पर मान लिया है कि ईरान जंग और महंगे तेल ने उनका खेल खराब किया है. इसके बाद ऑयल ट्रेडर्स को लगा कि अब व्हाइट हाउस की तरफ से जल्द जंग को खत्म करने की कोशिश की जाएगी और बाजार में बिकवाली शुरू हो गई.
गुरुवार सुबह ब्रेंट क्रूड गिरकर 94 डॉलर प्रति बैरल पर और WTI क्रूड 87.43 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है. ब्रेंट क्रूड का दाम 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे जाने के बाद दुनियाभर के बाजार में तेजी देखी जा रही है. एक तरफ शेयर बाजारों में रिकवरी शुरू हो गई है, दूसरी तरफ सोना और चांदी भी ऊपर चढ़ना शुरू हो गया है. मजेदार बात यह है कि पिछले शुक्रवार को ही ब्रेंट क्रूड 118 डॉलर प्रति बैरल के लेवल पर ट्रेड कर रहा था. डब्ल्यूटीआई क्रूड भी चढ़कर 100 डॉलर के पार पहुंच गया था. लेकिन अब दोनों में नरमी देखी जा रही है.
फॉक्स न्यूज से बात करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने चुनावों में अपनी पार्टी को मिली हार पर खुलकर बोला. उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि इसका कारण गैसोलिन की कीमत है.' उनके अनुसार आम जनता महंगाई और तेल की ऊंची कीमत से परेशान थी, जिसका खामियाजा पार्टी को चुनाव में भुगतना पड़ा. इसके बाद उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी एक्स पर लिखा कि यह जंग ही उनकी पार्टी की हार का कारण बनी. वेंस ने कहा, हम यहां से आगे कहां जाते हैं, इस पर कोई भी चर्चा वहीं से शुरू होनी चाहिए.' यानी आगे की कोई भी स्ट्रैटजी बनाने से पहले इस जंग का समाधान करना होगा. ट्रंप की तरफ से फाइनेंशियल टाइम्स को दिए एक साक्षात्कार में साफ किया गया था कि वाशिंगटन का ईरान पर किसी तत्काल सैन्य हमले का कोई प्लान नहीं है. इन बयानों से बाजार में यह संकेत गया कि अमेरिका अब तनाव को बढ़ाने के मूड में नहीं है. इसके बाद ट्रेडर्स ने भारी बिकवाली शुरू कर दी.
बीओके फाइनेंशियल के डेनिस किसलर के अनुसार मिडिल ईस्ट से बढ़ते निर्यात और ट्रंप के ठंडे बयानों ने क्रूड ऑयल की कीमत पर दबाव बनाया है. उनका मानना है कि कांग्रेस में डेमोक्रेटिक कंट्रोल आने से अमेरिकी सैन्य खर्च पर लगाम लग सकती है. इससे शांति समझौते के आसान भी जल्द बनेंगे. लेकिन एनवेरस के एक्सपर्ट कार्ल लैरी ने इससे अलग बात कही है और चेतावनी दी है कि शांति समझौते से पहले ईरान संघर्ष में एक बार फिर से तनाव बढ़ सकता है. अभी बाजार पूरी तरह स्थिर नहीं है.
दूसरी तरफ, ईरान के शीर्ष नेता मोजतबा खामेनेई ने अपने लिखित बयान में कहा कि अमेरिका में कोई भी पार्टी सत्ता में आए लेकिन अमेरिका से दुश्मनी ऐसी ही रहेगी. वहीं यमन के हूती विद्रोहियों की तरफ से दावा किया गया कि उन्होंने रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट को निशाना बनाया है. हालांकि, सऊदी की तरफ से इस हमले की पुष्टि नहीं की गई.