कच्चा तेल आज धड़ाम पर खतरा बरकरार, अगर नहीं बनी बात, तो 120 डॉलर प्रति बैरल को करेगा पार
Crude Oil Price: कच्चे तेल की कीमतों में आज गिरावट देखने को मिली है, लेकिन क्रूड पर संकट मंडरा रहा है. अगर अमेरिका-ईरान के बीच बात नहीं, तो कच्चे तेल के दाम 120 ड़लर प्रति बैरल पर पहुंच सकते हैं.
Crude Oil price: गल्फ वॉर शुरू होने के बाद से ही कच्चे तेल की कीमत सबसे ज्यादा चर्चा में है. ग्लोबल ऑयल मार्केट में जारी उठा पटक ने कच्चे तेल के बाजार में हलचल मचा दी है. ऑयल प्राइस 117 डॉलर तक पहुंच चुका था, हालांकि आज इसकी कीमत में थोड़ी गिरावट देखने को मिली है. अमेरिका और ईरान के बीच सहमति बनने की उम्मीद जगी है, जिसने तेल की कीमतों को नीचे उतारने में मदद की है.
आज क्या है कच्चे तेल का भाव?
2 नवंबर को ग्लोबल ऑयल मार्केट में तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है. क्रूड ऑयल में 3 से 4 डॉलर का फॉल देखने को मिसा है. ब्रेंट क्रूड 3.21 डॉलर की गिरावट के साथ 110.14 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है. WTI क्रूड 3 डॉलर गिरकर 101 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है.
कच्चे तेल की कीमत में गिरावट की वजह क्या है ?
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के पीछे ईरान और कतर के अधिकारियों के बीच लगातार तीसरे दिन जारी बातचीत है. दरअसल ईरान जंग खत्म करने के लिए बातचीत शुरू से उम्मीद बढ़ गई है. अमेरिका भी इस युद्ध को खत्म करने की कोशिश कर रहा है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान रक्षा और बातचीत, दोनों के लिए तैयार है.ईरान के बयान ने तेल बाजार की चिंता को कम किया है.
तेल पर अब भी मंडरा रहा है खतरा
भले ही क्रूड के दाम में गिरावट आई है, लेकिन खतरा अब तक टला नहीं है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कह चुके हैं कि मिडटर्म इलेक्शन के बाद वो ईरान युद्ध पर सख्त फैसले ले सकते हैं. अगर अमेरिका के मध्यावधि चुनाव के बाद ईरान को लेकर बयानबाजी तेज होती है और अमेरिका सख्त फैसले लेता है, तो ब्रेंट क्रूड की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है. यानी बाजार की नजर फिलहाल अमेरिकी मिडटर्म इलेक्शन और ट्रंप के बयानों पर है.
फिर बढ़ेंगे कच्चे तेल के दाम?
दूसरी तरफ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों पर हमलों ने भी बाजार की चिंता बढ़ा दी है. टैंकर्स पर हो रहे हमले से दुनिया भर में ऊर्जा और जहाजों से सामान भेजने की लागत बढ़ रही है. इसके अलावा तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक प्लस ने दिसंबर के लिए कच्चे तेल के उत्पादन का लक्ष्य पहले जैसा ही रखा है, मतलब साफ है कि सप्लाई सीमित और संकट में है. ऐसे में अगर फिर से अमेरिका ईरान के बीच सहमति नहीं बनी, तो तेल से उबलेगा.