रूस ने बदला बाजार, चीन बना सबसे बड़ा खरीदार, 1700 टन सोने के साथ तोड़ेगा 10 सालों का रिकॉर्ड
Gold Rate: रूस का जो सोना पहले लंदन पहुंच रहा था, अब उसका ठिकाना बदल गया है. हॉन्गकॉन्ग के रास्ते अब ये गोल्ड चीन तक पहुंच रहा है.
China gold: चीन का सोने को लेकर प्रेम खत्म ही नहीं हो रहा है. लागातर 23 महीनों से चीन सोना खरीद रहे हैं. चीन के केंद्रीय बैंक का गोल्ड रिजर्व लगातार 23वें महीने बढ़कर 1,147 करोड़ औंस से ऊपर पहुंच गया है.
1700 टन सोना खरीदने का टारगेट
गोल्ड को लेकर ड्रैगन का लगाव ऐसा है कि साल 2026 में उसने 1700 टन गोल्ड इम्पोर्ट का लक्ष्य रखा है. चीन 10 साल के रिकॉर्ड तोड़ने की तैयारी में है. Kitco की रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने अगस्त में 142 टन सोना आयात किया. साल 2026 के शुरुआती 8 महीनों में चीन का गोल्ड इम्पोर्ट 1141 टन पहुंच गया. साल 2026 में चीन का गोल्ड इम्पोर्ट पिछले साल के मुकाबले दोगुना हो सकता है. साल 2025 के पूरे साल के चीन का गोल्ड आयात 940 टन था, जबकि साल 2026 के शुरुआती 8 महीनों में ही ये आंकड़ा 1141 टन पर पहुंच गया.
सोना महंगा, फिर भी चीन कर रहा है खरीदारी
सोना की कीमत ऊंचे स्तर पर होने के बावजूद चीन में सोने का आयात मजबूत बना हुआ है. चीन में लोग सोने की ज्वैलरी बनवाने के बजाए गोल्ड में निवेश बढ़ा रहे हैं. चीन के केंद्रीय बैंक की ओर से सोने की बेतहाशा खरीदारी हो रही है. अकेले सिर्फ अगस्त में सेंट्रल बैंक ने 20 टन सोने का आयात किया.
गोल्ड का प्रोडक्शन भी बढ़ रहा
खाड़ी युद्ध, बदलते वैश्विक हालात , जियोपॉलिटिकल टेंशन के बीच चीन अपने सोने का भंडार बढ़ा रहा है. सिर्फ सोने के खरीदार ही नहीं बढ़ रहे, बल्कि सोने की सप्लाई भी बढ़ रही है. वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान ऑस्ट्रेलिया में सोने का उत्पादन 303 टन तक पहुंच गया.
रूस ने बदला सोने का बाजार, चीन बन रहा सबसे बड़ा खरीदार
रूस सिर्फ तेल नहीं सोने के लिए भी चीन का बड़ा सप्लायर बना हुआ है. रूस का सोना, जो साल 2019-2021 तक लंदन पहुंच रहा था, अब वो हॉन्गकॉन्ग पहुंच रहा हैं, जहां से ये गोल्ड चीन के बाजार में पहुंच रहा है .यूक्रेन युद्ध के बाद रूस को कई प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा है, जिसका असर रूस के सोने पर भी दिखा.
अब रूस का सोना ब्रिटेन के बजाए हॉन्ग कॉन्ग की ओर जा रहा है. ये दुनिया का सबसे बड़ा सोना खपत करने वाला बाजार है. यूक्रेन युद्ध के बाद हॉन्ग कॉन्ग रूस और चीन के व्यापार का बड़ा केंद्र बन रहा है. अगर आंकड़ों में देखें, तो 2026 के पहले सात महीनों में हॉन्ग कॉन्ग ने रूस से 112.7 टन सोना आयात किया. जबकि 2025 में हॉन्ग कॉन्ग ने रूस से 92.1 टन सोना मंगाया था.
चीन इतना सोना क्यों खरीद रहा है
नीतिगत अनिश्चितता, अमेरिका के बढ़ते कर्ज और भू-राजनीतिक तनाव के बीच चीन अपने सोने का रिजर्व बढ़ रहा है. वहीं जानकार ये भी मानते हैं कि केंद्रीय बैंक धीरे-धीरे डॉलर पर निर्भरता कम कर रहे हैं और सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं. चीन की गोल्ड पॉलिसी खास इस लिए हैं, क्योंकि एक ओर चीन का गोल्ड रिजर्व बढ़ रहा है, तो दूसरी ओर Forex रिजर्व घटा है. चीन का विदेशी मुद्रा भंडार सितंबर में 3.438 ट्रिलियन डॉलर तक गिर गया. डॉलर इंडेक्स में मजबूती के चलते चीन के रिजर्व की डॉलर वैल्यू कम हुई है.चीन लगातार सोना खरीदकर सिर्फ रिजर्व डायवर्सिफिकेशन की रणनीति नहीं अपना रहा, बल्कि अपने विदेशी मुद्रा भंडार में डॉलर जैसी करेंसी पर निर्भरता कम करके सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहा है.