‘दूसरा होर्मुज’ बन रहा काला सागर...सिर्फ गाड़ी से तेल नहीं, थाली से रोटी गायब होने का संकट...खतरे के बीच भारत के लिए बड़ा मौका
Black Sea: होर्मुज से तेल संकट, तो ब्लैक सी से फूड क्राइसिस दस्तक दे सकता है. इस समुद्री रास्ते के बंद होने से गेंहू, सूरजमुखी तेल समेत फूड सप्लाई का संकट बढ़ गया है.
Black Sea Import: खाड़ी युद्ध के चलते होर्मुज का गलियार बंद है, जिसने पूरी दुनिया में तेल और गैस संकट पैदा कर दिया. होर्मुज की वजह से कच्चे तेल , LPG गैस, LNG गैस सप्लाई अटक गई. अब नया संकट ब्लैक सी में बढ़ रहा है.अगर होर्मुज की तरह यहां भी सप्लाई बंद हुआ, तो इस बार गाड़ी से तेल नहीं, बल्कि थाली से रोटी गायब हो जाएगी. यूरोप और एशिया को जोड़ने वाला काला सागर (Black Sea) दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देशों तक अनाज सप्लाई का अहम रास्ता है. जैसे होर्मुज को 'तेल का लाइफलाइन' माना जाता है, ब्लैक सी को 'अनाजों का लाइफलाइन' कहते हैं.
ब्लैक सी में बढ़ते संकट से दुनिया परेशान
ईरान युद्ध से होर्मुज बंद है, यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में जहाजों को निशाना बनाकर शिपिंग कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है. इस बीच रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते ब्लैक सी भी जंग का अखाड़ा बना हुआ है. ब्लैक सी में जहाजों को निशाना बनाया जा रहा है. दोनों देशों ने बीते दो महीनों में 300 से अधिक जहाजों को निशाना बनाया है. हमले के बाद शिपिंग कंपनियां इस रूट से दूरी बना रही है.
ब्लैक सी का रास्ता अटका, तो क्या असर होगा ?
होर्मुज के बाद ब्लैक सी में जंग का असर दिख रहा है. जैसे होर्मुज को तेल का लाइफलाइन कहते हैं, यहां से ग्लोबल ऑयल सप्लाई का 20 फीसदी हिस्सा होकर गुजरता है, उसी तरह से ब्लैक सी को अनाजों की सप्लाई का लाइफलाइन कहते हैं. लगातार हो रहे हमलों की वजह से शिपिंग कंपनियां इस रूट से दूरी बना रही है, जिसके चलते गेहूं, मक्का जैसे अनाज की सप्लाई पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं.
गेंहू की सप्लाई पर संकट
रूस और यूक्रेन दोनों बीते चार सालों से युद्ध की मार झेल रहे हैं. दुनिया के करीब 30% गेहूं निर्यात में रूस और यूक्रेन की भागीदारी है, दोनों ही देश ब्लैक सी के रास्ते गेंहू की सप्लाई करते हैं. रूस के अनाज निर्यात का 80% हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है. यूक्रेन करीब 45 देशों को इस रास्ते से अनाज की सप्लाई करता है. इस रूट के शिपिंग खतरे में है, जिसकी वजह से अनाजों का निर्यात गिर रहा है. सिर्फ अगस्त 2026 के आंकड़े देखें, तो रूस का निर्यात 71 फीसदी तक गिर गया है. रूस से इस दौरान सिर्फ 17 लाख टन अनाजों का एक्सपोर्ट किया. गेहूं का एक्सपोर्ट सिर्फ 13 लाख टन रह गया. ब्लैक सी रूट बाधित होने से रूस से गेंहू खरीदने वाले देशों की संख्या 43 से गिरकर सिर्फ 16 रह गई.
सप्लाई गिरने से कीमत में तेजी
दुनिया का सबसे बड़ा गेंहू निर्यातक रूस के पास अनाज भरे हुए हैं, लेकिन ब्लैक सी पर हो रहे हमले की वजह से उसका निर्यात नहीं हो पा रहा है. जिसकी वजह से वैश्विक बाजार में गेहूं की कीमतें 30% तक बढ़ चुकी हैं. रूस और यूक्रेन सनफ्लावर ऑयल के निर्यात में 10 फीसदी की हिस्सेदारी रखते हैं, जिसकी सप्लाई भी अटक रही है. रूस से सप्लाई अटकने के चलते इन देशों को अमेरिका, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, भारत और दूसरे देशों से विकल्प तलाशना पड़ रहा है. अगर ये संकट जल्दी खत्म नहीं हुआ, तो आटा, ब्रेड और खाद्य तेलों की कीमत और बढ़ेगी. ग्लोबल फूड इंफ्लेशन और फूड सिक्योरिटी खतरे में पड़ सकती है.
ब्लैक सी से क्या इंपोर्ट करता है भारत?
ब्लैक सी के करीब बसे रूस, यूक्रेन, रोमानिया, बुल्गारिया, तुर्किये जैसे देश हैं, जो कमोडिटी बाजार के बड़े प्लेयर हैं. भारत के लिए ये रास्ता अहम है, क्योंकि सिर्फ अनाज या तेल नहीं बल्कि रूस से कच्चा तेल इस रास्ते से होकर गुजरता है. भारत इस रास्ते से...
- कच्चा तेल
- सूरजमुखी का तेल
- फर्टिलाइजर
- मशीनरी, स्टील
- गेंहू
जैसी चीजें इम्पोर्ट करता है. सनफ्लावर ऑयल के एक्सपोर्ट का 76% हिस्सा इसी ब्लैक सी से होकर गुजरता है. एनर्जी सप्लाई के अलावा एग्रीकल्चर प्रोडक्ट, औद्योगिक सामानों के लिए एक बड़ा एक्सपोर्ट हब है. अगर इस रास्ते से संकट खत्म नहीं हुआ, तो शिपिंग कॉस्ट बढ़ेगा. शिपिंग कॉस्ट आयात और सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ाएगा. रिफाइनर ऑयल से लेकर क्रूड ऑयल की कीमत बढ़ेगी. जिसका असर अर्थव्यवस्था पर दिख सकता है.
भारत के पास अच्छा मौका
ब्लैक सी संकट से भारत के लिए ऊर्जा सप्लाई का खतरा बढ़ रहा है, लेकिन एक मौका भी है. रूस-यूक्रेन देशों से गेंहू का निर्यात फंसा हुआ है. ऐसे में भारत के लिए गेंहू व्यापार विस्तार का बड़ा मौका है. भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गेंहू उत्पादक देश है. दुनिया का 12 फीसदी गेंहू उत्पादन यहीं होता है. फसल वर्ष 2025-26 में भारत का गेंहू उत्पादन 12.02 करोड़ टन रहा. निर्यात की बात करें, तो भारत ने 2026 में लगभग 4 साल के प्रतिबंध के बाद फिर से गेहूं का निर्यात शुरू किया है. 25 से 55 लाख टन गेंहू निर्यात की तैयारी है, ऐसे में रूस-यूक्रेन से सप्लाई अटकने के चलते भारत के पास अपना बाजार विस्तार करने का अच्छा मौका भी है.