)
सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से एमएलसी राहुल राज और तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जीते बंशीधर ब्रजवासी के खिलाफ जन सुराज पार्टी ने विधान परिषद के सभापति का चार्ज संभाल रहे रामवचन राय से शिकायत कर दी है. अपनी शिकायतों के समर्थन में राष्ट्रीय जनता दल और जन सुराज पार्टी की ओर से पेन ड्राइव, वीडियो, फोटो, सदस्यता कार्ड संख्या और उनके बयानों, सोशल मीडिया पर लिखे गए स्क्रीनशॉट्स को आधार बनाया गया है. अब यह सभापति के विवेक पर है कि वे इस मामले में कब फैसला लेते हैं. अभी तक राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी ने शपथ भी नहीं ली है और उनकी अयोग्यता की मांग वाली शिकायत सभापति तक पहुंच गई है. तो क्या वे शपथ ले पाएंगे?
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता दीपक जैन का कहना है कि कानूनी तौर पर उन्हें शपथ लेने से कोई रोक नहीं सकता. अयोग्यता की मांग वाली कोई लंबित शिकायत अपने आप में शपथ लेने की प्रक्रिया को नहीं रोकती. उनका कहना है कि 10वीं अनुसूची के तहत, अयोग्यता तभी लागू होती है जब अध्यक्ष (चेयरमैन) पैराग्राफ 6 के तहत शिकायत की सुनवाई करें और कोई आदेश पारित करें.
अधिवक्ता दीपक जैन का कहना है कि व्यावहारिक रूप से अध्यक्ष चाहें तो शपथ ग्रहण की तारीख को टाल सकते हैं, लेकिन बिना किसी ठोस कारण के इसे रोकना अदालत में चुनौती का विषय बन सकता है. भले ही वे शपथ ले लें, फिर भी शिकायत बनी रहेगी, और बाद में सबूतों (सदस्यता फॉर्म, वीडियो, बयान) के आधार पर उन्हें अयोग्य ठहराया जा सकता है.
उनका कहना है कि 10वीं अनुसूची के तहत 'दल-बदल विरोधी कानून' चुनाव परिणाम घोषित होते ही लागू हो जाता है. इसका मतलब यह है कि एक निर्वाचित सदस्य, सदन में औपचारिक शपथ लेने से पहले ही, अपनी पार्टी के निर्देशों का पालन करने के लिए बाध्य होता है.
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक रिकॉर्ड और महत्वपूर्ण कानूनी मामलों में ऐसा कोई उदाहरण नहीं मिलता, जहां किसी सदस्य ने शपथ लेने से ठीक पहले ही अपनी सीट खो दी हो या 10वीं अनुसूची के तहत अयोग्य घोषित कर दिया गया हो. (ऐसा इसलिए है क्योंकि अयोग्यता की कार्यवाही के लिए अध्यक्ष या सभापति के पास एक औपचारिक याचिका दायर करना और उनका फैसला आना जरूरी होता है. यह प्रक्रिया आमतौर पर तब शुरू होती है जब विधानसभा या संसद की बैठक शुरू होती है और सदस्य कार्यवाही में हिस्सा लेना या उससे दूर रहना शुरू करते हैं.)
वरिष्ठ अधिवक्ता दीपक जैन यह भी मानते हैं कि राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी के पास बचने का एक वास्तविक मौका है, लेकिन यह पूरी तरह से सबूतों पर निर्भर करता है.
• जगजीत सिंह (2006) केस में यह माना गया है कि बाहर से समर्थन देना "पार्टी में शामिल होना" नहीं माना जाता. अगर उन्होंने केवल किसी कार्यक्रम में हिस्सा लिया और समर्थन की घोषणा की, तो यह कानूनी रूप से वैध है.
• याचिकाकर्ता को यह साबित करना होगा कि वे पार्टी में शामिल हुए हैं. बिना सदस्यता फॉर्म, औपचारिक नामांकन या पार्टी में किसी पद के, ऐसा साबित करना मुश्किल है.
• अगर भाजपा खुद यह स्पष्ट कर दे या खंडन कर दे कि वे पार्टी के सदस्य नहीं हैं, तो इससे उन्हें काफी मदद मिलेगी.
दीपक जैन कहते हैं कि केवल किसी कार्यक्रम में शामिल होने या कोई बयान देने से उनकी सदस्यता नहीं जाएगी. इस मामले में पूरी सुनवाई होने के बाद ही सभापति फैसला लेंगे. दोनों सदस्य इतनी आसानी से अपनी सदस्यता नहीं खो सकते.
वरिष्ठ अधिवक्ता राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी को लेकर कहते हैं कि दोनों को सभापति की ओर से जब नोटिस भेजा जाए तो उसका बाकायदा जवाब दाखिल करना चाहिए और स्पष्ट करना चाहिए कि वे पार्टी में शामिल नहीं हुए हैं. इसके समर्थन में हलफनामे और पार्टी का बयान पेश करना चाहिए.
उन्हें पार्टी के ऐसे किसी भी कार्यक्रम, झंडे या पोस्ट से दूर रहना चाहिए, जिसे पार्टी में शामिल होने के रूप में देखा जा सकता हो.