App

बुरे फंसे राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी: सभापति का चार्ज संभाल रहे जेडीयू के रामवचन राय के पाले में होगी गेंद

अगर इन दोनों सदस्यों के खिलाफ कोई कार्रवाई होती है तो शपथ ग्रहण से पहले सदस्यता रद्द होने का संभवतया यह पहला केस हो सकता है. अति उत्साह कितना घातक होता है, यह इन दोनों नेताओं के साथ किस्मत के खेल से समझा जा सकता है.

बुरे फंसे राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी: सभापति का चार्ज संभाल रहे जेडीयू के रामवचन राय के पाले में होगी गेंद
Image Credit: बीजेपी कार्यालय में बंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज. तस्वीर शनिवार शाम की है (File Photo)

बिहार विधान परिषद के ​हालिया चुनाव के बाद राज्य की सियासत में भूचाल आ गया है. जनता दल यूनाइटेड के उम्मीदवारों को हराकर जीते दोनों निर्दलीय एमएलसी की सदस्यता को लेकर संकट खड़ा हो गया है. तिरहुत स्नातक सीट से जीते बंशीधर ब्रजवासी और सारण शिक्षक सीट से जीते राहुल राज शनिवार को बीजेपी विधायक दल की बैठक में पहुंच गए और खबर आई कि दोनों ने पार्टी की सदस्यता भी ग्रहण कर ली है, लेकिन इसके साथ ही उनदोनों ने अपनी विधान पार्षदी को लेकर एक बड़ा खतरा भी मोल ले लिया था. 10वीं अनुसूची के पैरा 2(2) के अनुसार निर्दलीय जीता कोई भी प्रत्याशी किसी दल की सदस्यता नहीं ले सकता है और ऐसा करने से उसकी सदस्यता चली जाएगी. जन सुराज के नेताओं ने इस बाबत विधान परिषद के सभापति का चार्ज संभाल रहे उपसभापति रामवचन राय से मुलाकात की है और इस बाबत शिकायत की है. खास बात यह है कि इस समय सभापति का काम रामवचन राय देख रहे हैं, जो जनता दल यूनाइटेड से आते हैं और इन दोनों नेताओं ने जेडीयू प्रत्याशियों को ही हराया है.

जन सुराज के नेताओं ने रामवचन राय से मिलकर निर्दलीय निर्वाचित विधान पार्षद राहुल राज और बंशीधर बृजवासी के खिलाफ शिकायत की की है. जन सुराज ने दोनों पर बीजेपी की सदस्यता लेने को लेकर सवाल खड़ा किए हैं और इससे संबंधित सभी जरूरी दस्तावेज और सदस्यता नंबर उनको सौंपा है. जन सुराज के नेता किशोर मुन्ना ने सभापति से मिलकर शिकायत की है कि इन दोनों नवनिर्वाचित सदस्यों ने दल-बदल कानून का उल्लंघन किया है. उन्होंने कहा कि सभापति के सामने सभी सबूत रख दिए गए हैं. उन्होंने मामले को गंभीरता से सुना और जल्द कार्रवाई का भरोसा दिया है.

सारण शिक्षक निर्वाचन सीट से बीजेपी के बागी राहुल राज ने जेडीयू के आनंद पुष्कर को हराया था तो तिरहुत स्नातक सीट से बंशीधर ब्रजवासी ने जनता दल यूनाइटेड के अभिषेक झा को मात दी थी. दोनों नेताओं ने जनता दल यूनाइटेड के नेताओं ही हराया था. खास बात यह भी है कि नतीजे आने के 72 घंटे के भीतर ये लोग भाजपा विधायक दल की बैठक में शामिल होने प्रदेश मुख्यालय पहुंच गए और पार्टी का पटका भी धा​रण कर लिया और रसीद भी दिखाकर फोटो खिंचवा लिया. पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने इसको लेकर पोस्ट भी कर दिया. हालांकि, बाद में कुछ पोस्ट डिलीट किए गए और कुछ एडिट कराये गए.

अब यही सब सबूत बनकर इन दोनों नवनिर्वाचित सदस्यों की पार्षद के लिए काल बन गए हैं. विधान परिषद सभापति के यहां यही सब दस्तावेज सौंपे गए हैं. संविधान की 10वीं अनुसूची का पैरा 2(2) कहता है कि कोई सदस्य यदि निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव जीतता है और उसके बाद किसी राजनीतिक दल में शामिल हो जाता है तो वह सदन की सदस्यता से अयोग्य हो जाता है. निर्दलीय सदस्य किसी दल को बाहर से समर्थन दे सकते हैं, लेकिन दल का सदस्य नहीं हो सके. खास बात यह है कि दोनों माननीयों ने अभी शपथ ग्रहण भी नहीं किया था.

अंतिम फैसला जेडीयू के रामवचन राय लेंगे

राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी का केस अब जनता दल यूनाइटेड से ताल्लुक रखने वाले और सभापति का चार्ज संभालने वाले रामवचन राय की कोर्ट में होगा. संविधान कहता है कि किसी भी सदस्य को अयोग्य घोषित करने का अंतिम अधिकार सदन के सभापति के पास होता है. खास बात यह है कि इस समय रामवचन राय ही सदन के सभापति के प्रभार में हैं.

राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी ने जनता दल यूनाइटेड के प्रत्याशियों को ही मात दी है. इससे जनता दल यूनाइटेड में इन दोनों को लेकर पहले से नाराजगी है. जेडीयू की ओर से आरोप लगाया जा रहा है कि एनडीए में भारतीय जनता पार्टी की ओर से भितरघात किया गया है.

अगर रामवचन राय इन दोनों नेताओं की सदस्यता रद्द कर देते हैं तो बीजेपी और जेडीयू के रिश्तों में तल्खी बढ़ेगी और यदि कार्रवाई नहीं करते हैं या देरी से फैसला लेते हैं तो विपक्ष की ओर से संविधान की अनदेखी का आरोप लगाया जाएगा. अब देखना यह है कि रामवचन राय क्या करते हैं.

Add Zee News as a Preferred Source

About the Author

Sunil Mishra

Sunil Mishra

इंडस्ट्री में 2 दशकों का अनुभव है तो खबरों की बाजीगरी आती है. डिजिटल मीडिया में आधे दशक हो चुके हैं. लंबे समय तक प्रिंट मीडिया में काम करना डिजिटल की दुनिया में मददगार साबित हुआ. दैनिक जागरण से शुरू हुआ सफर, अमर उजाला, हिन्दुस्तान, News Nation, ABP और India Ahead होते हुए Z Bihar Jharkhand तक पहुंचा है. बिहार और झारखंड की स्थानीय और राजनीतिक खबरों की विशेष समझ.
Read More