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MLC चुनाव में वोटिंग प्रोसेस क्या है? काउंटिंग से नहीं रैंकिंग से निकलते हैं रिजल्ट

23 अक्टूबर को बिहार में 8 सीटों के एमएलसी चुनाव के लिए मतदान होंगे. इन सीटों पर मतदाता प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करेंगे. हालांकि, इस चुनाव में आम मतदाता वोट नहीं दे सकते हैं.

Written By Shailendra
Published: Oct 22, 2026, 08:06 PM IST | Updated: Oct 23, 2026, 02:20 PM IST
Image Credit: एमएलसी चुनाव में क्या है वोटिंग की प्रक्रिया? (Photo-AI)
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बिहार में विधान परिषद की 8 सीटों पर चुनाव के लिए 23 अक्टूबर, शुक्रवार को वोट डाले जाएंगे. मगर, मतदाता के मन में यह सवाल उठ रहा होगा कि क्या हम इस चुनाव की प्रक्रिया में हिस्सा ले सकते हैं, अपना वोट दे सकते हैं, तो यहां इसका जवाब होगा नहीं, क्योंकि आम जनता इसमें सीधे वोट नहीं करती है. हर मतदाता एमएलसी चुनाव के लिए वोट नहीं दे सकता है. अब मन में ख्याल आ रहा होगा कि फिर कौन-कौन वोट दे सकता है? और किस नियम के तहत सबको ये अधिकार नहीं मिलता है.

दरअसल, विधान परिषद का चुनाव एक अप्रत्यक्ष प्रक्रिया के तहत होता है, जिसका जिक्र भारतीय संविधान के अनुच्छेद 171 में साफ-साफ किया गया है. एमएलसी सीटों का बंटवारा 5 अलग-अलग स्तर पर किया गया है. वहीं, बिहार विधान परिषद में कुल 75 सीटें हैं. अब इन 75 सीटों का हिसाब-किताब बड़ा दिलचस्प है. चलिए जानते हैं सबकुछ इस आर्टिकल में.

1. विधानसभा कोटा

बिहार में कुल 75 में से 27 सीटें विधानसभा कोटा में आती हैं. इन्हें सीधे विधायक वोट देकर चुनते हैं. इस कोटे से किसी को चुनाव लड़ना है, तो कम से कम 10 विधायकों का समर्थन होना जरूरी है.

2. स्थानीय निकाय कोटा 

इस कोटे के तहत 24 सदस्यों का चुनाव होता है. इसमें वोट डालने वाले कोई आम लोग नहीं, बल्कि जमीन से जुड़े जनप्रतिनिधि होते हैं- जैसे वार्ड सदस्य, मुखिया, पंचायत समिति सदस्य (BDC), जिला पंचायत सदस्य, और नगर निगम/नगरपालिका के पार्षद, मेयर, डिप्टी मेयर और अध्यक्ष. मजे की बात ये है कि इस कोटे से चुनाव लड़ने के लिए कोई भी आम नागरिक या निकाय प्रतिनिधि मैदान में उतर सकता है.

3. शिक्षक कोटा

यह शिक्षकों के लिए कोटा होता है. इसके तहत चुने जाने वाले सदस्यों को वे शिक्षक वोट देते हैं, जो राज्य के कम से कम माध्यमिक स्कूल या उससे उच्च संस्थानों यानी हाई स्कूल, कॉलेज या यूनिवर्सिटी में पिछले 3 साल से पढ़ा रहे हों. शर्त ये है कि वोटर लिस्ट में नाम होना चाहिए, जिसके लिए फॉर्म-19 भरना जरूरी होता है.

4. स्नातक कोटा

विधान परिषद में 6 सीटें इसके जरिए भरी जाती हैं. इसमें वोटर वे लोग होते हैं, जिन्होंने कम से कम 3 साल पहले अपनी ग्रेजुएशन पूरी कर ली हो और फॉर्म-18 भरकर अपना रजिस्ट्रेशन कराया हो. चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार के लिए भी ग्रेजुएट होना जरूरी होता है.

5. राज्यपाल का कोटा

इन सबके अलावा 12 सदस्यों को राज्यपाल सीधे मनोनीत करते हैं. इसके लिए कोई चुनाव या वोटिंग नहीं होती. ये वे लोग होते हैं जो साहित्य, कला, विज्ञान, सहकारिता आंदोलन या समाज सेवा के क्षेत्र में धुरंधर माने जाते हैं.

विधान परिषद एक परमानेंट हाउस है, यह कभी भंग नहीं होती. नियम ये है कि एक एमएलसी का कार्यकाल 6 साल का होता है. हर 2 साल पर एक-तिहाई (1/3) सदस्य रिटायर हो जाते हैं. उनकी खाली हुई जगहों पर ही नए सिरे से चुनाव कराए जाते हैं.

कैसे होता है बिना पार्टी सिंबल वाला यह चुनाव?

इस चुनाव की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां मतपत्र पर किसी भी राजनीतिक दल का चुनाव चिह्न नहीं होता है. बैलट पेपर पर सिर्फ उम्मीदवारों के नाम छपे होते हैं. प्रत्याशी भले ही किसी पार्टी से जुड़े हों, लेकिन वोट उनके नाम पर ही पड़ता है, किसी चिह्न पर नहीं.

सिंगल ट्रांसफरेबल वोट

मतदान के लिए सिंगल ट्रांसफरेबल वोट का इस्तेमाल किया जाता है. इसका तरीका बेहद दिलचस्प और आम चुनावों से काफी अलग है. वोटर को किसी एक प्रत्याशी के आगे मुहर लगाने के बजाय अपनी पसंद के हिसाब से उम्मीदवारों को रैंकिंग देनी होती है. मतदाता मतपत्र पर उम्मीदवारों के नाम के आगे रोमन अंकों (जैसे I, II, III, IV) में अपनी प्राथमिकता लिखते हैं यानी उनकी पहली पसंद कौन है, दूसरी कौन और तीसरी कौन है.

रैंकिंग से तय होते हैं विजेता

इस व्यवस्था में वोटों की गिनती साधारण तरीके से नहीं होती, बल्कि यह पूरी तरह मतदाता की दी गई प्राथमिकताओं पर तय करती है. वोटों की गिनती के दौरान यह देखा जाता है कि किस उम्मीदवार को सबसे ज्यादा पहली वरीयता के वोट मिले हैं. अगर पहली पसंद के वोटों से सीटें पूरी नहीं भर पाती, तो क्रम के अनुसार दूसरी और तीसरी पसंद के वोटों को ट्रांसफर करके आगे की गिनती की जाती है. इस प्रक्रिया के तहत जिन्हें सबसे अधिक वरीयता और समर्थन मिलता है, वे उम्मीदवार विजयी घोषित किए जाते हैं.

यह भी पढ़ें: बिहार विधान परिषद चुनाव: राजद और जन सुराज बेफिक्र, NDA के पास सीटें दोगुनी करने का मौका, कांग्रेस का 1 पर सिमटने का खतरा

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शैलेंद्र जी न्यूज के रीजनल चैनल, जी बिहार झारखंड की डिजिटल टीम में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम करते हैं. वह बिहार और झारखंड की सियासत और क्राइम समेत कई समसामयिक मुद्दों पर न्यूज लिखते हैं. वह कभी-कभी राष्ट्रीय मुद्दों पर भी लिखते हैं. उनको मीडिया के तीनों प्रारूप प्रिंट, टेलीविजन और डिजिटल में काम करने का अनुभव. जनसंदेश टाइम्स, स्वतंत्र चेतना, टीवी 100, साधना न्यूज, एफएम न्यूज आदि न्यूज चैनलों से होते हुए न्यूज नेशन, इंडिया अहेड, ईटीवी भारत और न्यूज स्ट्रीट मीडिया (NYOOOZ) में अहम जिम्मेदारी निभाई. मीडिया जगत में सफर पिछले 12 सालों से बिना रुके जारी है.
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