बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. मतदानकर्मी बैलेट बॉक्स और अन्य जरूरी सामग्रियों के साथ मतदान केंद्र के लिए कूच कर चुके हैं. शुक्रवार को सुबह 8 बजे से वोट डाले जाएंगे, जो शाम 4 बजे तक जारी रहेंगे. इस चुनाव में 150 उम्मीदवारों का फैसला 5,32,547 मतदाता करेंगे. इस बार के चुनाव में देखा जाए तो सबसे ज्यादा बेफिक्र जन सुराज पार्टी है, क्योंकि उसके पास खोने को कुछ भी नहीं है. फिर भी वह जोर लगा रही है. अगर जन सुराज पार्टी का एक भी सीट जीत गई तो बिहार विधान परिषद में उसका खाता खुल जाएगा. जन सुराज पार्टी के बाद राष्ट्रीय जनता दल भी बेफिक्र दिखती है, क्योंकि उसके प्रत्याशियों के पक्ष में कोई बड़ा जलसा आलाकमान की ओर से नहीं होता दिखा. एनडीए के पास इस चुनाव में सीटों को दोगुनी करने का मौका है तो कांग्रेस पर एक सीट पर सिमटने का खतरा मंडरा रहा है. अभी कांग्रेस के पास विधान परिषद में दो सीटें हैं. अगर इस चुनाव में वह एक सीट हार जाती है तो सदन में केवल एक सदस्य रह जाएगा.
| क्र. | निर्वाचन क्षेत्र | मौजूदा/पूर्व सदस्य | पार्टी/स्थिति |
|---|---|---|---|
| 1 | पटना स्नातक | नीरज कुमार | JDU |
| 2 | पटना शिक्षक | नवल किशोर यादव | BJP |
| 3 | कोसी स्नातक | डॉ. एन.के. यादव | BJP |
| 4 | दरभंगा स्नातक | सर्वेश कुमार | निर्दलीय |
| 5 | तिरहुत स्नातक | देवेश चंद्र ठाकुर/वंशीधर बृजवासी | निर्दलीय (उपचुनाव के बाद) |
| 6 | दरभंगा शिक्षक | डॉ. मदन मोहन झा | कांग्रेस |
| 7 | तिरहुत शिक्षक | संजय कुमार सिंह | CPI |
| 8 | सारण शिक्षक | अफाक अहमद | निर्दलीय |
| दल/श्रेणी | सीटें |
|---|---|
| BJP | 2 |
| JDU | 1 |
| कांग्रेस | 1 |
| CPI (भाकपा) | 1 |
| निर्दलीय | 3 |
| कुल | 8 |
अभी की बात करें तो बिहार विधान परिषद की इन 8 सीटों में से 3 एनडीए के पास थीं. पटना स्नातक सीट से नीरज कुमार पिछली बार विधान पार्षद चुने गए थे. दूसरी ओर, भाजपा के पास पटना शिक्षक और कोसी स्नातक सीट थी. पटना स्नातक सीट से नवल किशोर यादव और कोसी स्नातक सीट से डॉ. एनके यादव चुने गए थे. बाकी 5 सीटों पर या तो विपक्षी प्रत्याशी और निर्दलीयों की जीत हुई थी.
दरभंगा स्नातक सीट से निर्दलीय के रूप में सर्वेश कुमार जीते थे. इसी तरह तिरहुत स्नातक सीट से देवेश चंद्र ठाकुर ने बाजी मारी थी, लेकिन वे 2024 के लोकसभा चुनाव में सीतामढ़ी से सांसद चुन लिए गए और वहां हुए उपचुनाव में वंशीधर बृजवासी ने जेडीयू से यह सीट छीन ली थी. जेडीयू के अभिषेक झा को इस चुनाव में करारी मात मिली थी.
दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की बात करें तो यहां से कांग्रेस के मदन मोहन झा ने जीत दर्ज की थी. तिरहुत शिक्षक सीट से संजय कुमार सिंह जीते थे, जो भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से ताल्लुक रखते हैं. सारण शिक्षक सीट की बात करें तो निर्दलीय के रूप में अफाक अहमद ने जीत दर्ज की थी.
जाहिर है, इनमें से कोई भी सीट राष्ट्रीय जनता दल के पास नहीं थी. ऐसे में अगर वह एक भी सीट जीत जाती है तो उसकी बल्ले-बल्ले हो जाएगी. कांग्रेस अगर एक भी सीट नहीं जीती तो एक पर सिमटकर रह जाएगी और अगर वह एक से अधिक सीटों पर जीत दर्ज करती है तो न केवल विधान परिषद में उसकी संख्या बढ़ जाएगी, बल्कि राहुल गांधी के अभियान को मजबूती मिल सकती है. एनडीए के सामने न केवल अपनी 3 सीटों को बचाने की चुनौती है, बल्कि विपक्षी या निर्दलीयों की सीटों को भी जीतने की चुनौती है. अगर ऐसा होता है तो वह डंके की चोट पर कह सकेगा कि बैलेट पेपर से हुए चुनाव में भी जनता की पसंदीदा वहीं है.