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West Champaran Flood: बिहार के पश्चिम चंपारण में बाढ़ की तबाही का मंजर देखने को मिल रहा है. यहां गांव के गांव जलमग्न हो गए हैं. गंड समेत पहाड़ी नदियां उफान पर हैं, जिससे कई इलाकों में सड़क से संपर्क टूट गया है और लोगों को घरों से निकलना मुश्किल हो गया है. पश्चिम चंपारण के सैकड़ों घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है, जिसके कारण यहां के लोगों के घरों में तीन दिन से चूल्हा नहीं जला है. इतना ही यहां हजारों एकड़ फसलें बर्बाद हो गई हैं और कई परिवार पलायन कर ऊंचे स्थानों पर पहुंच गए हैं. वहीं, जिला प्रशासन की ओर से रेस्क्यू और सामुदायिक किचन के जरिए राहत पहुंचाने का काम जारी है.
चौमुखा गांव जलमग्न
वाल्मीकिनगर गंडक बराज से देर रात 5 लाख 43 हजार क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हुआ है, जिससे गंडक नदी अब निचले इलाकों में कहर बरपा रही है. जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर है. योगापट्टी के चौमुखा पंचायत के आधा दर्जन गांव बाढ़ में डूब गए हैं और गांवों का सड़क संपर्क टूट गया है. चौमुखा पंचायत का नीमिया माई टोला भी पूरी तरह डूब गया है. चौमुखा के मदारपुर गांव में सैकड़ों घरों में दो दिन से खाना नहीं बना है. ग्रामीण एक घर से दूसरे घर जाने के लिए कड़ाह का सहारा ले रहे हैं. इस गांव में नाव ही एकमात्र सहारा है. मदारपुर के ग्रामीण राहत सामग्री और सूखे राशन की मांग कर रहे हैं, जबकि महिलाएं गांव में सामुदायिक किचन चलाने की मांग कर रही हैं.

सामुदायिक किचन से राहत
प्रशासन ने बाढ़ पीड़ितों के बीच सामुदायिक किचन शुरू कर दिया है, जिससे बड़ी राहत मिली है. तीन दिन से भूखे बाढ़ पीड़ितों के लिए चौमुखा पंचायत के वार्ड नंबर सात में देर रात सामुदायिक किचन शुरू किया गया. बेतिया डीएम तरनजोत सिंह ने गांव का निरीक्षण किया था. डीएम को जानकारी मिली कि गांव में तीन दिन से बाढ़ पीड़ितों ने खाना नहीं खाया है, जिसके बाद जिला प्रशासन हरकत में आया और आंगनबाड़ी केंद्र में करीब 400 लोगों के लिए खाना बनाया जा रहा है. तीन दिन बाद खाना मिलने पर बाढ़ पीड़ितों ने डीएम तरनजोत सिंह को धन्यवाद दिया.

मनियारी नदी ने मचाई तबाही
पश्चिम चंपारण के गौनाहा में पहाड़ी मनियारी नदी कहर बरपा रही है, जिससे कई गांवों में पानी घुस गया है और सड़क संपर्क टूट गया है. नदी का जलस्तर बढ़ने से कुकुरा और मझरिया गांव की सड़कों पर पानी फैल गया है. ग्रामीणों को आने-जाने में काफी परेशानी हो रही है. वहीं, कई घरों में पानी घुस गया है. ग्रामीणों का कहना है कि हर साल बाढ़ में वे परेशान होते हैं, लेकिन सरकार न तो गांव की सड़क सही कर रही है और न ही बाढ़ का स्थायी समाधान कर रही है.

हजारों एकड़ फसल बर्बाद
गंडक नदी ने बाढ़ के दौरान 20 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. इस बार सिर्फ लोग ही प्रभावित नहीं हुए हैं, बल्कि किसानों के हजारों एकड़ फसल भी बर्बाद हो गई है. योगापट्टी के निचले इलाकों में धान और गन्ने की हजारों एकड़ फसल पानी में डूब गई है. इस बार की बाढ़ ने घरों के साथ किसानों की फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचाया है. जी मीडिया की टीम ने नाव से सैकड़ों एकड़ खेतों का जायजा लिया, जो अब नदी का रूप ले चुके हैं. जिला प्रशासन ने किसानों को फसल क्षति मुआवजे के लिए 29 सितंबर तक आवेदन की तारीख निर्धारित की है. किसानों का कहना है कि बाढ़ के कारण गांव से निकलना मुश्किल है, ऐसे में तारीख बढ़ाई जानी चाहिए.

30 घरों में घुसा पानी
तो वहीं नरकटियागंज में पहाड़ी पंडई नदी ने रौद्र रूप धारण कर लिया है. करीब 30 घरों में पानी घुस गया, जिसके बाद जिला प्रशासन ने सभी परिवारों का सफल रेस्क्यू किया. हरदीटेडा गांव जलमग्न हो गया है, जबकि दहाड़वा टोला की मुख्य सड़क पर पानी बह रहा है. सीओ शमन प्रकाश और आरओ अशोक कुमार गांव पहुंचे और प्रभावित लोगों का रेस्क्यू किया. सभी लोगों को ऊंचे स्थानों पर पहुंचाया गया और उनके लिए खाना-पानी की व्यवस्था की गई. हालांकि, बाढ़ पीड़ितों का आरोप है कि दो दिन से उनके घर डूबे हैं, लेकिन अभी तक खाना नहीं बना है. गौनाहा के मुरली भैरहवा गांव में बाढ़ के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी. करीब एक किलोमीटर पहले ही एंबुलेंस को रुकना पड़ा. इस दौरान प्रसव पीड़ा से कराह रही एक महिला को खाट पर लिटाकर बाढ़ के पानी के बीच कड़ी मशक्कत करते हुए एंबुलेंस तक पहुंचाया गया.
रिपोर्ट: धनंजय द्विवेदी