वीबी-जी राम जी योजना: महिलाओं की भागीदारी में भारी उछाल, 3 महीने में 1 करोड़ 11 लाख महिलाओं को मिला काम
मनरेगा के बदले जो नई योजना लांच की गई थी, उसको लेकर संसद से लेकर सड़क तक बवाल हुआ था. विपक्षी नेताओं की दलील थी कि योजना में महात्मा गांधी का नाम जुड़ा हुआ है, इसलिए सत्तापक्ष को आपत्ति हो रही है. लेकिन, जब यह योजना महिलाओं की तरक्की का जरिया बन रही है तो इसका स्वागत किया जाना चाहिए.
पटना: संसद में तमाम हो हल्ला के बाद 1 जुलाई, 2026 से मनरेगा के बदले लागू की गई वीबी-जी राम जी योजना बिहार में महिलाओं के रोजगार का बड़ा जरिया साबित हुई है. इस योजना के तहत राज्य में अब तक 1 करोड़ 92 लाख 95 हजार अकुशल मजदूरों को रोजगार मिला है. इनमें भी सबसे अधिक हिस्सेदारी महिलाओं की है. कुल 1 करोड़ 11 लाख 64 हजार यानी 57.86 प्रतिशत महिलाओं को इस योजना से रोजगार मिला है. इस योजना में साल में 125 दिनों के रोजगार की गारंटी सुनिश्चित की गई है.
वीबी-जी राम जी योजना विकसित भारत की 2047 तक हासिल करने के लक्ष्य के साथ बनाई गई है. ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों का कहना है, सिर्फ तीन महीने में सृजित मानव दिवस में ग्रामीण महिलाओं की बढ़-चढ़कर हुई इस भागीदारी से महिला रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी. इस योजना में महिलाओं की भागीदारी अधिक होने से यह महिला सशक्तीकरण की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.
इससे पहले मनरेगा योजना में प्रत्येक ग्रामीण को 100 दिनों की रोजगार गारंटी दी जाती थी, जबकि नई योजना में इसे 125 दिन किया गया है. इससे गांवों के अकुशल श्रमिकों की आय में बढ़ोतरी होगी और उनकी आर्थिक सुरक्षा मजबूत होगी. कार्यक्रम का फोकस मजदूरी आधारित रोजगार तक सीमित न रहकर आजीविका संवर्धन, सुदृढ़ ग्रामीण अवसंरचना निर्माण, उत्पादक परिसंपत्ति निर्माण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर है.
नई योजना में वर्कप्लेस पर बॉयोमेट्रिक एवं चेहरा सत्यापन, डिजिटल उपस्थिति एवं डिजिटल निगरानी की व्यवस्था लागू की गई है. इससे मजदूरी भुगतान की प्रक्रिया अधिक विश्वसनीय हुई है. योजना के तहत जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, हरित विकास और जलवायु लचीलापन को विशेष महत्व दिया गया है. इसके अंतर्गत ऐसे कार्यों को प्राथमिकता दी गई है, जो ग्रामीण क्षेत्रों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति अधिक सक्षम बना सकें.
विकसित भारत-जी राम जी की विशेषता यह भी है कि इसका विभिन्न सरकारी योजनाओं के साथ समन्वय बनाया गया है. इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और ग्राम पंचायतों को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप समग्र विकास योजनाएं तैयार करने में सहायता मिलेगी. कार्यक्रम में मजबूत निगरानी एवं प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र की व्यवस्था की गई है, ताकि पारदर्शिता, जवाबदेही और जनविश्वास में वृद्धि हो सके.
ग्रामीण विकास विभाग मंत्री श्रवण कुमार ने इस बारे में बताया कि यह योजना बिहार में ग्रामीण रोजगार और महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल बन रही है. मात्र तीन महीनों में 1 करोड़ 92 लाख 95 हजार श्रमिकों को रोजगार देना और इसमें भी 57 फीसदी से अधिक महिलाओं की हिस्सेदारी विभाग की प्रतिबद्धता को दर्शाता है. बायोमीट्रिक और डिजिटल हाजिरी से योजना में पूरी पारदर्शिता आई है. यह योजना जल संरक्षण, टिकाऊ ग्रामीण विकास और विकसित बिहार के साथ विकसित भारत @2047 के सपने को साकार करने की ओर एक ऐतिहासिक कदम है.