यूपी चुनाव 2027: 2022 में शून्य पर सिमट गई थी चिराग की पूरी तैयारी, अबकी बार 403 सीटों पर लड़ने की दावेदारी!
यूपी में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर हलचल तेज हो गई है. इस चुनाव में बिहार के भी कई दल अपनी संभावनाएं तलाश रहे हैं. केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की पार्टी लोजपा-आर ने तो यूपी की सभी 403 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है. हालांकि, पिछले चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन काफी शर्मनाक रहा था.
उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. इसके लिए सभी दलों ने अपनी-अपनी तैयारी शुरू कर दी है. इस बार बिहार के दल भी यूपी में अपनी सियासी ताकत आजमाने की कोशिश में जुटे हैं. इनमें लोजपा-रामविलास पार्टी भी शामिल है. लोजपा-आर बिहार में तो बीजेपी के साथ है, लेकिन यूपी में दोस्ती बरकरार रहेगी या नहीं, इसकी गारंटी नहीं. केंद्रीय मंत्री और लोजपा-आर के अध्यक्ष चिराग पासवान ने तो यूपी की सभी 403 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है. उन्होंने कहा कहा कि उत्तर प्रदेश में हम लोग पूरी मजबूती के साथ चुनाव लड़ेंगे. हमारी पार्टी सभी 403 सीटों पर तैयारी कर रही है. चिराग ने साफ कहा कि अगर बीजेपी से गठबंधन होता है तो गठबंधन के तहत, नहीं तो हमारी पार्टी अकेले लड़ने को भी तैयार है. उन्होंने कहा कि इसका फैसला समय आने पर लिया जाएगा.
बिहार में चिराग ने खुद को साबित किया
बिहार में दलितों के बड़े नेता माने जाने वाले रामविलास पासवान के निधन के बाद उनकी पार्टी और परिवार में बड़ी टूट हुई. रामविलास के छोटे भाई पशुपति पारस ने चिराग से रिश्ता तोड़ते हुए पार्टी के भी दो टुकड़े कर दिए. चिराग को छोड़कर बाकी सारे सांसद पशुपति पारस के साथ चले और गए वे मोदी सरकार में मंत्री बन गए. इस झटके के बाद भी चिराग ने हार नहीं मानी और अपनी पार्टी को नए सिरे से खड़ा किया. 2024 के लोकसभा चुनाव तक उन्होंने इतनी सियासी ताकत जुटा ली कि चाचा पशुपति को ही एनडीए में बाहर करवा दिया. 2024 के लोकसभा चुनाव में अपने हिस्से की सभी 5 सीटें जीतकर मोदी सरकार में मंत्री बनें. इतना ही नहीं 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में भी चिराग ने अपनी राजनैतिक सूझबूझ का परिचय देते हुए बीजेपी और जेडीयू जैसे दलों से बॉर्गेनिंग करते हुए 29 सीटें हासिल कर लीं. इस चुनाव में 19 सीटें जीतकर लोजपा-आर किंगमेकर बनकर उभरी. आज बिहार सरकार में उसकी भी हिस्सेदारी है.
यूपी में लोजपा-आर की ताकत कितनी?
ऐसा पहली बार नहीं है जब चिराग की पार्टी यूपी में चुनाव लड़ने जा रही हो. 2022 में भी लोजपा-आर ने उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव लड़ा था. उस वक्त भी पार्टी ने सभी 403 सीटों पर चुनाव लड़ने की बातें कही थीं, लेकिन अंत में सिर्फ 21 सीटों पर ही अपने उम्मीदवार उतारे थे. इस चुनाव में पार्टी के उम्मीदवारों का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा. उस चुनाव में चिराग की पार्टी को सिर्फ 0.01% वोट हासिल हुए थे.
| क्रम संख्या | विधानसभा क्षेत्र | प्रत्याशी का नाम | श्रेणी (Category) | प्राप्त वोट |
|---|---|---|---|---|
| 1 | मुरादाबाद ग्रामीण | विवेक कुमार भटनागर | सामान्य | 159 |
| 2 | मेरठ | सुशील वर्मा | सामान्य | 88 |
| 3 | तिलहर | साकिर | सामान्य | 228 |
| 4 | पुवायां | अमित कुमार | अनुसूचित जाति | 1,359 |
| 5 | शाहजहांपुर | राहुल मोहन | सामान्य | 122 |
| 6 | ददरौल | जितेंद्र पाल सिंह | सामान्य | 668 |
| 7 | पूर्वा | वेद प्रकाश | सामान्य | 278 |
| 8 | बाबागंज | विजय पाल सरोज | अनुसूचित जाति | 2,018 |
| 9 | चैल | राजीव कुमार | अनुसूचित जाति | 649 |
| 10 | फाफामउ | जितेंद्र कुमार भारतीय | अनुसूचित जाति | 448 |
| 11 | मेजा | हैडर अब्बास | सामान्य | 539 |
| 12 | भिंगा | मनोज कुमार पाठक | सामान्य | 523 |
| 13 | गोंडा | कलप्रम | सामान्य | 190 |
| 14 | सहजनवा | प्रशांत राम त्रिपाठी | सामान्य | 568 |
| 15 | रामकोला | नगीना पासवान एडवोकेट | अनुसूचित जाति | 1,802 |
| 16 | लालगंज | कर्मराज | अनुसूचित जाति | 328 |
| 17 | बेलथरा रोड | अखिलेश कुमार | अनुसूचित जाति | 526 |
| 18 | बलियानगर | सागर सिंह | सामान्य | 346 |
| 19 | बंशडीह | संग्राम सिंह | सामान्य | 489 |
| 20 | वाराणसी साउथ | अरुण पाठक | सामान्य | 103 |
| 21 | मंझावां | अर्चना मिश्रा | सामान्य | 816 |
यूपी पर क्यों इतना फोकस कर रहे चिराग?
चिराग की नजर अब यूपी के करीब 21% दलित वोटबैंक पर है. बता दें कि प्रदेश की कुल 403 सीटों में से 84 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं. इसके अलावा करीब 140 सीटों पर दलित मतदाता किंगमेकर की भूमिका अदा करते हैं. यूपी के दलितों में भी सबसे ज्यादा करीब 10-11 फीसदी की आबादी जाटव समाज की है. मायावती और चंद्रशेखर आजाद दोनों इसी समाज से ताल्लुक रखते हैं. इस समाज के वोटरों पर मायावती की मजबूत पकड़ मानी जाती है. इसी वोटबैंक की दम पर वह चार बार मुख्यमंत्री रह चुकी हैं. लेकिन अब उनका वोटबैंक दरक रहा है. अब चंद्रशेखर आजाद एक मजबूत विकल्प के तौर पर उभर रहे हैं. वहीं, गैर-जाटव समाज जैसे- कोरी, पासी, धानुक, वाल्मीकि आदि उपजातियों का समर्थन हासिल करके बीजेपी लगातार दो बार से सत्ता हासिल कर रही है. सूत्रों के मुताबिक, चिराग पासवान की नजर अब इसी गैर-जाटव वोटबैंक पर है.
बिहार से बाहर पार्टी की स्थिति कैसी?
बिहार की राजनीति में अपना लोहा मनवाने के बाद अब चिराग का फोकस अपनी पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने पर है. इसके लिए वे बिहार के बाहर पार्टी का जनाधार जुटाने की कोशिश में जुटे हैं. इसी साल अगस्त महीने में ही पार्टी ने नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन किया था. इसमें चिराग पासवान को सर्वसम्मति से राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया था. इसके अलावा 16 से अधिक राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में नए प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति की गई. राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में ही चिराग ने पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने का ऐलान कर दिया था. धीरे-धीरे पार्टी अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रही है. आज पूर्वोत्तर राज्य नागालैंड में भी पार्टी के विधायक हैं. इतना ही नहीं नागालैंड में लोजपा-आर को स्टेट पार्टी का दर्जा हासिल है. झारखंड में भी पार्टी का एक विधायक है.