Bettiah News: आज हम आपको एक ऐसे दुर्गा मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसको देखना तो दूर बहुत लोग इसके बारे में सुने भी नहीं होंगे. यह मंदिर कहीं और नहीं जबकि बिहार के बेतिया जिले में स्थित है. बेतिया का दुर्गाबाग मंदिर अपनी अनोखी विशेषता और विशिष्ट धार्मिक मान्यताओं के लिए जाना जाता है. इस मंदिर में मां दुर्गा शेर के बजाय मृगाल यानी सियार पर सवार हैं. आमतौर पर भक्त मां दुर्गा को सिंह पर सवार देखते हैं, लेकिन इस मंदिर में माता का स्वरूप बिल्कुल अलग है. तांत्रिक विधि से बना यह मंदिर का मुख दक्षिण की ओर है, जो इसे अन्य दुर्गा मंदिरों से अलग पहचान देता है.
ऐसी मान्यता है कि इस जगह की स्थापना देवताओं के अंशदान से हुई थी. 16वीं शताब्दी में बेतिया के राजा-महाराजाओं ने यहां तांत्रिक विधि से मंदिर का निर्माण कराया था. मान्यता के अनुसार, पहले मंदिर में मां दुर्गा की सिंह पर सवार प्रतिमा स्थापित की गई थी. हालांकि, ज्योतिषियों ने अनिष्ट की आशंका जताई और राजा को भी अपशकुन का सामना करना पड़ा. इसके बाद तांत्रिकों की सलाह और तंत्र विद्या के माध्यम से मां दुर्गा की सियार पर सवार प्रतिमा स्थापित की गई. तभी से यह मंदिर अपने विशिष्ट स्वरूप और पौराणिक मान्यताओं के कारण श्रद्धालुओं के बीच प्रसिद्ध है.
मां दुर्गा का ऐसे तो अनेक रूप हैं, लेकिन बेतिया के दुर्गाबाग मंदिर में स्थापित माता का रूप भक्तों के लिए विशेष आस्था का केंद्र है. नवरात्रि के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं. मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई मुरादें माता पूरी करती हैं. खासकर संतान प्राप्ति की कामना लेकर आने वाले श्रद्धालुओं की यहां विशेष आस्था है. इस मंदिर में बिहार के अलावा उत्तर प्रदेश और नेपाल से भी बड़ी संख्या में भक्त दर्शन करने पहुंचते हैं.
स्थानीय लोग बताते हैं कि निशा रात्रि में मंदिर के आसपास बड़ी संख्या में सियार दिखाई देते हैं. बताया जाता है कि ये सियार मंदिर की परिक्रमा करने के बाद गायब हो जाते हैं. मंदिर के राज पुजारी बबलू पंडित के अनुसार, दुर्गाबाग मंदिर भारत का इकलौता ऐसा मंदिर है, जहां मां दुर्गा मृगाल यानी सियार पर सवार हैं. यही अनोखी विशेषता इस मंदिर को देशभर में अलग पहचान दिलाती है और इसे श्रद्धालुओं के लिए आस्था का एक विशिष्ट केंद्र बनाती है.
रिपोर्ट: धनंजय द्विवेदी