2 सोती और हर पल मौत का खतरा, राघोपुर में 13 बच्चों की मौत के बाद भी नहीं जागा सिस्टम! रामपुर श्यामचंद में रस्सी के सहारे जिंदगी
राघोपुर में 13 बच्चों की मौत के बाद भी नहीं सिस्टम जागा है! यहां के रामपुर श्यामचंद गांव में रस्सी के सहारे लोगों की जिंदगी हो गई, क्योंकि यहां पर दो सोती से पानी को पार लोग करते हैं, जिससे हर पल मौत का खतरा बना रहता है.
वैशाली जिला के राघोपुर में नाव हादसे को अभी तीन दिन ही बीते हैं कि राघोपुर से एक ऐसी तस्वीर निकल कर सामने आई है, जिसने सिस्टम की लापरवाही और प्रशासन के दावों की पोल खोल दी है. दरअसल, जो तस्वीर हम दिखाने जा रहे हैं, उसे देखकर आप जरूर कहेंगे कि नेता, प्रशासन और सरकार एक हादसे का इंतजार कर रही है. हादसा रोकने की बात तो दूर, यहां तो हादसे को ही दावत दी जा रही है और तंत्र उस दावत पर अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने के इंतजार में है.
ध्यान दीजिएगा कि तीन दिन पहले जिस रामपुर श्यामचंद गांव में नाव ने 13 मासूम बच्चों की जान ले ली, यह तस्वीर उसी गांव की है. फर्क सिर्फ कुछ सौ मीटर का ही है. 13 बच्चों की जान वार्ड नंबर 8 में गई और यह तस्वीर वार्ड नंबर एक की है, जहां के लोग वर्षों से एक ही परेशानी और पीड़ा झेलते-झेलते थक चुके हैं और इसे ही अपनी नियति मान बैठे हैं.
खतरे के साए में रहने को मजबूर स्थानीय निवासी
स्थानीय निवासी अभय कुमार यादव ने कहा कि हम लोगों की यहां खेती है, हर समय यहां खतरा रहता है. बाढ़ में यहां पानी फैला था, लेकिन सरकार की तरफ से कोई व्यवस्था नहीं की कई थी. एक और स्थानीय निवासी अमरनाथ राय ने कहा कि कोई व्यवस्था नहीं है, चाहे, मरे या जिए सरकार को कोई मतलब नहीं है.
जय हो जय हो, बाबा ने चिराग पासवान और तेजस्वी यादव को घेरा
स्थानीय लोग बताते हैं कि कुछ साल पहले यहां दो पुलिया पास हुईं, लेकिन वे भी सरकारी फाइलों में ही दब कर रह गईं. राम जानकी मठ के महंत जय हो जय हो, बाबा ने कहा कि मंदिर आने-जाने में ऐसे एक नहीं बल्कि दो सोती जान पर खेल कर पार करने पड़ते हैं. उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव याद कर लेना. यहां 6 लोगों के डूबने की घटना के बारे में आपको पत्र लिखा था. मैं, यहां सरकार से मकान नहीं मांग रहा, बाल बच्चा को नौकरी नहीं मांग रहा. मैं यहां पर पुल मांग रहा रहूं.
जय हो जय हो, बाबा ने आगे कहा कि अगर यहां पर पुल जल्दी नहीं दिया गया, तो हम लोग तेजस्वी यादव और चिराग पासवान को छोड़ने वाले नहीं हैं. हम लोग इन दोनों के जानते हैं, उनका घेराव करेंगे. ये लोग खुद महल में रहते हैं और जनता, यहां परेशानी में हैं.
हादसे के मुहाने पर खड़ा रामपुर श्यामचंद गांव
अब जरा सोचिए, जिस इलाके ने बिहार के दो बड़े राजनीतिक परिवारों की तीन-तीन पीढ़ियों को वोट दिया, सांसद बनाया, विधायक बनाया, उनके रहते यह इलाका आज भी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है. ऐसे में हादसे के बाद भी जारी सिस्टम की लापरवाही लोगों पर भारी पड़ रही है और रामपुर श्यामचंद गांव एक और हादसे के मुहाने पर खड़ा है.
बता दें कि इस तरह के दो सोती हैं, जहां से कई गांवों के हजारों लोगों का आना-जाना होता है, जो सालों भर इसी तरह से जान जोखिम में डालकर रस्सी के सहारे अपनी जिंदगी की गाड़ी खींच रहे हैं और शासन-प्रशासन एक और हादसे का इंतजार कर रहा है.
रिपोर्ट: राजकुमार सिंह