SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

शिक्षक दिवस स्पेशल: जेपी और लोहिया की पाठशाला के छात्र हैं लालू यादव-नीतीश कुमार, हिला दी थी इंदिरा की सरकार

भारत की आजादी के बाद का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक आंदोलन अगर किसी ने देश को नई दिशा दी, तो वह लोकनायक जय प्रकाश नारायण का आंदोलन था. इस आंदोलन से ही लालू प्रसाद यादव, नीतीश कुमार, रामविलास पासवान और सुशील कुमार मोदी जैसे दिग्गज नेता निकले थे.

Written By K. Raj Mishra
Published: Sep 05, 2026, 08:51 AM IST | Updated: Sep 05, 2026, 09:13 AM IST
Image Credit: जेपी और लोहिया की पाठशाला के छात्र हैं लालू यादव-नीतीश कुमार (File Photo)
Join

देश के दूसरे राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन के मौके पर मनाया जाता है. इस दिन लोग अपने गुरु, शिक्षकों और जीवन में मार्गदर्शन देने वाले व्यक्तियों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हैं. इस खास दिन हम आपको बिहार के दो दिग्गज नेता लालू यादव और नीतीश कुमार के राजनीतिक गुरु के बारे में बताने जा रहे हैं. बिहार की सियासत को नया आधार देने वाले लालू प्रसाद यादव, नीतीश कुमार, रामविलास पासवान और सुशील कुमार मोदी जैसे दिग्गज नेता कई बार लोकनायक जयप्रकाश नारायण (जेपी), समाजवादी चिंतक कर्पूरी ठाकुर और डॉ. राम मनोहर लोहिया को अपना राजनीतिक गुरु बता चुके हैं. जेपी की पाठशाला से सियासत का ककहरा सीखने के बाद ही ये सभी नेता खासतौर पर लालू, नीतीश और रामविलास पासवान, बिहार की सियासत में शीर्ष तक पहुंचे.

जेपी आंदोलन से साथ आए लालू-नीतीश

1970 के दशक में देश में इंदिरा गांधी की सरकार हुआ करती थी. महंगाई और बेरोजगारी अपने चरम पर थी और युवाओं में इंदिरा सरकार के प्रति काफी गुस्सा था. छात्रों का गुस्सा सड़कों पर उतरने लगा था. बिहार में इस आंदोलन का नेतृत्व जयप्रकाश नारायण ने किया था, इस कारण से इसे जेपी आंदोलन के नाम से भी जानते हैं. इस छात्र आंदोलन ने बिहार में राजनेताओं की एक नई पीढ़ी को जन्म दिया. लालू प्रसाद, नीतीश कुमार, रामविलास पासवान और सुशील कुमार मोदी इसी आंदोलन से निकले थे. 

दोनों दोस्त आज हैं कट्टर दुश्मन!

उस वक्त लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार काफी अच्छे दोस्त हुआ करते थे. दोनों ने एक साथ राजनीति की शुरुआत की, लेकिन समय के साथ उनके रिश्तों में उतार-चढ़ाव आते रहे. हालांकि, सत्ता की चकाचौंध ने उनकी दोस्ती को कट्टर दुश्मनी में बदल दिया. कभी एक-दूसरे के लिए लाठियां खाने वाले ये सिपाही आज एक-दूसरे के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी हैं. वहीं, इस आंदोलन को दबाने के लिए इंदिरा गांधी ने देश में 'आपातकाल' लगा दिया था. इसके बाद हुए चुनाव में उनकी सरकार ही चली गई थी.

कर्पूरी ठाकुर की छत्रछाया में आगे बढ़े

जननायक कहे जाने वाले पूर्व सीएम कर्पूरी ठाकुर को लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार जैसे नेताओं का राजनीतिक गुरु और मार्गदर्शक माना जाता है. दोनों भी इस बात को स्वीकार करते हैं. कहते हैं कि 1970 के दशक में कर्पूरी ठाकुर ही लालू यादव को छात्र राजनीति से निकालकर चुनावी राजनीति में लेकर आए थे. उनके समर्थन और प्रयासों से ही लालू प्रसाद यादव पहली बार लोकसभा सांसद चुने गए थे. हालांकि, मुख्यमंत्री बनने के बाद लालू यादव पूरी तरह से बदल गए थे और उन्होंने बीमार कर्पूरी ठाकुर को अपनी कार में बिठाने से भी साफ इनकार कर दिया था. वहीं दूसरी ओर नीतीश कुमार आज भी कर्पूरी ठाकुर को अपना आदर्श मानते हैं. जननायक ने जो सपने देखे थे, उनको पूरा करने के लिए उन्होंने काफी काम किया है. नीतीश कुमार के प्रयासों से ही मोदी सरकार में कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न मिला है.

लोहिया के विचारों को लेकर आगे बढ़े

लालू यादव और नीतीश कुमार दोनों ही समाजवादी विचारक डॉ. राम मनोहर लोहिया को अपना प्रेरणास्त्रोत मानते हैं. दोनों ही नेताओं ने लोहिया के सामाजिक न्याय और पिछड़ों-शोषितों को अधिकार दिलाने के सिद्धांतों को अपनी राजनीति का आधार बनाया. लालू यादव ने जहां वंचित जातियों को राजनीतिक ताकत और आवाज दी, वहीं नीतीश कुमार ने सुशासन, कानून के राज और विकास के मॉडल पर अपनी पैठ बनाई. हालांकि, खुद को समाजवादी और लोहियावादी बताने वाले लालू और नीतीश पर उनके विचारों की तिलांजलि देने के आरोप भी लगते हैं. लोहिया ने हमेशा परिवारवाद के खिलाफ रहे, लेकिन लालू यादव और रामविलास पासवान ने इस सिद्धांत को बहुत पहले तिलांजलि दे दी थी. एक नीतीश कुमार अभी तक तक खुद को परिवारवाद से दूर रखे हुए थे, लेकिन अब उन्होंने भी अपने बेटे को अपनी सियासी विरासत सौंपने की तरफ कदम बढ़ा दिया है.

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

कर्मराज मिश्रा ज़ी न्यूज (डिजिटल) टीम में बतौर चीफ सब एडिटर कार्यरत हैं. वे यहां देश-विदेश की राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लिखते हैं. कानपुर यूनीवर्सिटी से पत्रकारिता में मास्टर की डिग्री हासिल करके IBN-7 न्यूज चैनल से इंटर्नशिप की. इसके बाद खबर फास्ट, नेशन लाइव और साधना न्यूज न्यूज चैनलों में काम करने के बाद डिजिटल का रुख किया और 2017 से 2020 तक हिंदुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में बतौर सीनियर सब एडिटर काम किया. इसके बाद News Nation, India Ahead के बाद वर्तमान में Z Media का हिस्सा हैं. मीडिया में 10 साल के कार्यकाल के दौरान यूपी, बिहार, छत्तीसगढ़ और दिल्ली विधानसभा चुनावों के अलावा 2019 और 2024 का लोकसभा चुनाव कवर किया है.
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES