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बिहार में सुपरहिट और उत्तर प्रदेश में सुपर फ्लॉप: पड़ोसी राज्य में नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू का इतना खराब परफॉरमेंस क्यों?

दबाव की राजनीति कोई नई चीज नहीं है. सभी दल चाहते हैं कि उसे विस्तार का मौका मिले और जेडीयू भी ऐसा करना चाहती है तो इसमें कोई वैसी बात नहीं है. जेडीयू की कोशिश कुछ सीटों पर चुनाव लड़ने और कम से कम खाता खोलने की है और इसके लिए वह भाजपा से गठबंधन के तहत मैदान में उतरना चाहती है.

Written By Sunil Mishra
Published: Sep 29, 2026, 11:50 AM IST | Updated: Sep 29, 2026, 12:04 PM IST
Image Credit: नीतीश कुमार अपने बेटे निशांत कुमार के साथ (File Photo)
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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं. सभी दल अपनी तैयारियों में जुटे हुए हैं. नीतियां और रणनीतियां बन रही हैं. सामने वाली पार्टी को घायल करने के लिए बयानों के तीर छोड़े जा रहे हैं. दावे और प्रतिदावे का सिलसिला सा चल पड़ा है. इस बीच बिहार से खबर आ रही है कि उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में जनता दल यूनाइटेड भी 60 सीटों पर दावा ठोक सकती है. पार्टी नेता और बिहार के स्वास्थ्य मंत्री का अक्टूबर महीने में वाराणसी में एक बड़ा जलसा करने का कार्यक्रम बन रहा है. 2022 के विधानसभा चुनाव में भी पार्टी मैदान में कूदी थी, लेकिन कोई खास करिश्मा नहीं कर पाई थी. 27 विधानसभा सीटों पर पार्टी ने उम्मीदवार दिए थे, लेकिन एक सीट को छोड़कर किसी भी सीट पर जमानत तक नहीं बच पाई थी. खास बात यह है कि बिहार में जिस पार्टी का पिछले 20 साल से सिक्का चल रहा है, उसका उत्तर प्रदेश में इतना खराब परफॉरमेंस चौंकाता है.

यूपी विधानसभा चुनाव 2022: 27 सीटों पर जेडीयू का परफॉरमेंस:

क्र.विधानसभा क्षेत्रनामवर्गवोट
1बिलासपुरजगदीश शरण पटेलसामान्य522
2बिसवांरामकिशोर वर्मासामान्य302
3लखनऊ कैंटआशीष सक्सेनासामान्य118
4सलोन (सैलों)अमित कुमारअनुसूचित जाति528
5जगदीशपुरदिनेश कुमारअनुसूचित जाति346
6फर्रुखाबादवरुण अशोक सक्सेनासामान्य168
7महरौनी (मेहरोनी)कैलाशअनुसूचित जाति997
8रामपुर खासलालजीसामान्य301
9रानीगंजसंजय कुमार उर्फ संजय राज पटेलसामान्य526
10जलालपुररमेश कुमार मिश्रासामान्य246
11शोहरतगढ़ (सोहरतगढ़)ओमप्रकाशसामान्य1,684
12डुमरियागंजपवन कुमारसामान्य542
13तमकुही राजश्रीकांत सिंहसामान्य597
14कुशीनगरश्रीनारायणसामान्य354
15पथरदेवा (पत्थरदेवा)संदीप कुमार मालसामान्य690
16भाटपार रानी (भटपर रानी)रामाश्रय राजभरसामान्य488
17घोसीविक्रम चौहानसामान्य605
18फेफनाअवलेशसामान्य621
19मल्हनी (मल्हानी)धनंजय सिंहसामान्य79,830
20मड़ियाहू (मडिआहू)सुशील कुमार पटेलसामान्य780
21जहूराबादअरविंद वर्मासामान्य1,322
22रोहनियासुशील कश्यपसामान्य1,375
23भदोहीदीयम सिंह गहरवारसामान्य881
24मझवां (मझावां)डॉ. अखिलेश कुमार द्विवेदीसामान्य899
25चुनारसंजय सिंह पटेलसामान्य808
26मड़िहानडॉ. अरविंद पटेलसामान्य1,649
27घोरावलअनिताअनुसूचित जाति559

मुख्य आधार कुर्मी और कुशवाहा वोट बैंक

दरअसल, बिहार में नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू का मूल आधार कुर्मी और कुशवाहा वोटर हैं. इसके अलावा, बिहार में पार्टी को कुछ मुस्लिम वोट भी मिल जाते हैं. साथ ही, भारतीय जनता पार्टी के साथ होने से सवर्ण वोट बैंक भी नीतीश कुमार की पार्टी के उम्मीदवारों के खातों में जाता है. अगर वह राजद के साथ होते हैं तो यादव और मुसलमान का एकमुश्त वोट मिल जाता है.

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यूपी बीजेपी के पास कई कुर्मी नेता

दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश में कुर्मियों की राजनीति करने के लिए अनुप्रिया पटेल पहले से मौजूद हैं. इसके अलावा, बीजेपी ने भी पिछले कुछ समय में कई कुर्मी नेताओं को आगे किया है. अभी तो उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी खुद कुर्मी समाज से आते हैं. इसके साथ ही, बरेली से सांसद छत्रपाल गंगवार हैं, जो संतोष गंगवार के सियासी उत्तराधिकारी माने जाते हैं. पार्टी में स्वतंत्रदेव सिंह, जगदीश पटेल और प्रवीण पटेल भी कुर्मी समुदाय से ताल्लुक रखते हैं. इसलिए उत्तर प्रदेश में भाजपा को नीतीश कुमार की पार्टी की जरूरत नहीं पड़ती.

मुसलमान जेडीयू को वोट देने से रहा

मुसलमानों की बात करें तो एक बड़ा तबका अखिलेश यादव के नेतृत्व वाले समाजवादी पार्टी के साथ है तो कांग्रेस और बसपा को भी मुसलमानों का वोट मिलता रहा है. ऐसे में जनता दल यूनाइटेड के लिए उत्तर प्रदेश में अपनी पैठ बनाना आसान नहीं दिख रहा है. अब तो नीतीश कुमार उतने सक्रिय भी नहीं रहे, जो भोजपुरी बेल्ट में सुशासन बाबू के नाम से जाने जाते रहे हैं.

निशांत कुमार का लिटमस टेस्ट

जनता दल यूनाइटेड की धुरी अब संजय कुमार झा, ललन सिंह और निशांत कुमार के इर्द-गिर्द घूम रही है. संजय कुमार झा परदे के पीछे के खिलाड़ी माने जाते हैं तो निशांत कुमार के लिए खुद को साबित करना अभी बाकी है. उत्तर प्रदेश एक तरह से उनके लिए सियासी लिटमस टेस्ट साबित हो सकता है, क्योंकि उनके राजनीति में आने के बाद यह जेडीयू के लिए पहला बड़ा चुनाव होगा.

भाजपा से प्रेशर पॉलिटिक्स

हालांकि, जेडीयू की ओर से 2027 के विधानसभा चुनावों में 60 सीटों पर लड़ने का दावा करना प्रेशर पॉलिटिक्स माना जा रहा है. राजनीति​क विश्लेषकों का मानना है कि जेडीयू ऐसा दावा करके उत्तर प्रदेश चुनाव में भाजपा से कुछ सीटें हासिल करना चाहती है. जेडीयू आलाकमान को पता है कि उत्तर प्रदेश में अगर अकेले चुनावी मैदान में गए तो 2022 वाला हाल हो जाएगा. इसलिए पार्टी की कोशिश है कि भाजपा पर दबाव बनाकर एनडीए के बैनर तले कुछ सीटों में चुनाव लड़ा जाए, ताकि कम से कम पड़ोसी राज्य में खाता खुल सके.

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इंडस्ट्री में 2 दशकों का अनुभव है तो खबरों की बाजीगरी आती है. डिजिटल मीडिया में आधे दशक हो चुके हैं. लंबे समय तक प्रिंट मीडिया में काम करना डिजिटल की दुनिया में मददगार साबित हुआ. दैनिक जागरण से शुरू हुआ सफर, अमर उजाला, हिन्दुस्तान, News Nation, ABP और India Ahead होते हुए Z Bihar Jharkhand तक पहुंचा है. बिहार और झारखंड की स्थानीय और राजनीतिक खबरों की विशेष समझ.
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