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वोट चोरी और फॉर्म 6 में बदलाव के आरोपों के साथ विपक्षी दलों के नेता कांग्रेस के नेतृत्व में दिल्ली में पिछले तीन दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. इसी विरोध प्रदर्शन के समानांतर राज्यों की राजधानियों में भी विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया जा रहा है. हालांकि, बिहार की राजधानी पटना में विरोध प्रदर्शन का जो आयोजन किया गया, उसमें राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस नेताओं के बीच सामंजस्य का अभाव दिखा. राष्ट्रीय जनता दल ने कांग्रेस नेताओं को छकाते हुए उनके शहीद स्मारक पहुंचने से पहले लोकभवन कूच कर दिया था. इसे यूं कहें कि दिल्ली में कांग्रेस लीड रोल में है और पटना में उसे साइड हीरो का किरदार भी नसीब नहीं हो पा रहा है. हालांकि कांग्रेस नेता शकील अहमद खान मार्च में तेजस्वी यादव के साथ दिखने वाले अकेले कांंग्रेसी नेता रहे.
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम के नेतृत्व में जब कांग्रेसी शहीद स्मारक पहुंचे, तब तक तेजस्वी यादव के नेतृत्व में विपक्ष ज्ञानेश हटाओ लोकतंत्र बचाओ मार्च निकाल चुका था. सबसे बड़ी बात यह कि राज्यपाल को विपक्षी नेताओं ने जो ज्ञापन सौंपा, उसमें प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम का साइन ही रह गया. इस तरह दिल्ली में प्रदर्शन की अगुवाई कर रही कांग्रेस पटना में अलग थलग पड़ गई.
बताया जाता है कि इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने गुरुवार सुबह 11 बजे मार्च निकालने का फैसला लिया था और तेजस्वी यादव ने संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में मीडिया को इस बात की जानकारी दी थी. प्रेस कांफ्रेंस में मौजूद कांग्रेस अनुशासन समिति के अध्यक्ष कपिलदेव प्रसाद यादव ने बताया कि चूंकि मार्च 11 बजे निकालने का फैसला हुआ था, इसलिए प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में तमाम कांग्रेसी नेता 10:50 बजे शहीद स्मारक पहुंच गए थे.
उन्होंने बताया कि जब हमलोग वहां पहुंचे तो पता चला कि मार्च निकाला जा चुका है. इसके बाद राजेश राम के नेतृत्व में वहां से 11 बजे मार्च निकाला गया, क्योंकि पता चल गया था कि राजद के नेतृत्व में एक शिष्टमंडल लोकभवन पहुंच गया है. राजेश राम के नेतृत्व में जब कांग्रेस नेता लोकभवन पहुंचे तो तेजस्वी यादव के नेतृत्व में विपक्षी नेता वहां से वापसी कर रहे थे. इसके बाद राजेश राम वापस शहीद स्मारक लौट गए और हथकड़ी लगाकर प्रदर्शन करने लगे.
वहां सचिवालय थाने की पुलिस पहुंच गई और इन नेताओं को हिरासत में लेकर सचिवालय थाने ले गई. बाकी कांग्रेसियों को एयरपोर्ट थाने ले जाया गया और 2 घंटे बाद छोड़ दिया गया.
राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस के बीच कितना तालमेल है, इस बात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि 11 बजे से मार्च निकालने का फैसला हुआ था, लेकिन इसे संशोधित कर 10 बजे का समय निर्धारित कर दिया गया. इसके बाद 9:30 बजे से ही राजद के नेता और कार्यकर्ता वहां पहुंचने लगे थे. 10:15 बजे तेजस्वी यादव वहां पहुंचे और उनके नेतृत्व में करीब साढ़े 10 बजे मार्च निकाल दिया गया.
अब कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि उन्हें प्रदर्शन और मार्च के समय में बदलाव के बारे में नहीं बताया गया. हालांकि, राजद के प्रधान महासचिव रणविजय साहू ने कहा कि समय में बदलाव के बारे में कांग्रेस को बता दिया गया था. लोकभवन गए प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस के कुछ नेता भी शामिल थे.
अब सवाल यह है कि जब कांग्रेस को जानकारी नहीं दी गई तो शकील अहमद खान बदले हुए समय पर शहीद स्मारक पर कैसे पहुंच गए थे? क्या उन्हें अलग से इस बारे में जानकारी दी गई थी? उनका कहना था कि मुझे बदले हुए समय के बारे में जानकारी मिल गई थी और मैं वहां समय पर पहुंच गया था. हो सकता है कि कांग्रेस के बाकी नेताओं को बदले हुए समय के बारे में जानकारी न मिली हो.