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आरक्षण के मुद्दे पर देश में एक बार फिर से बहस शुरू हो गई है. बिहार में इस मुद्दे पर काफी सियासत देखने को मिल रही है. सियासी बयानबाजी के बीच नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने एक बार फिर 75 प्रतिशत आरक्षण का मुद्दा उठा दिया है. तेजस्वी यादव ने केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी पर निशाना साधते हुए कहा कि आरक्षण का लाभ लेने वाले ही अब इसकी समीक्षा और बदलाव की बात कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि इनमें हिम्मत है तो बिहार में जातिगत जनगणना के आधार पर आरक्षण की सीमा बढ़ाकर 75 प्रतिशत करवाएं. बता दें कि 2023 में बिहार में SC-ST, EBC और OBC के लिए आरक्षण की सीमा बढ़ाकर 65 प्रतिशत की गई थी. EWS के 10 प्रतिशत आरक्षण को जोड़ने पर कुल हिस्सा 75 प्रतिशत हो जाता था. हालांकि, जून 2024 में पटना हाईकोर्ट ने 65 प्रतिशत आरक्षण वाले कानून को संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 के खिलाफ बताते हुए रद्द कर दिया था.
कुशवाहा ने बढ़ाई बीजेपी की मुश्किल
तेजस्वी के बाद एनडीए के सहयोगी उपेंद्र कुशवाहा ने भी 65 प्रतिशत आरक्षण का समर्थन किया है. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी 65 प्रतिशत आरक्षण के मुद्दे को आगे लेकर जाएगी. एनडीए के भीतर से आरक्षण की सीमा को बढ़ाए जाने का मुद्दा उठाया जाना भाजपा के लिए चुनौती का सबब हो सकता है. वहीं, भाजपा ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ढाल की तरह इस्तेमाल कर रखा है. बिहार भाजपा के प्रवक्ता कुंतल कृष्णा ने साफ कहा कि आरक्षण की सीमा को बढ़ाने पर सर्वोच्च न्यायालय का मंतव्य आ चुका है.
नजीर रहा है बिहार का आरक्षण मॉडल
बता दें कि बिहार में सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण व्यवस्था केवल प्रशासनिक नियम नहीं, बल्कि राज्य के सामाजिक न्याय और राजनीतिक विमर्श की सबसे मजबूत धुरी रही है. 1978 में जननायक कर्पूरी ठाकुर द्वारा पेश किए गए ऐतिहासिक फॉर्मूले से लेकर वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था तक, बिहार का आरक्षण मॉडल हमेशा से देश के लिए एक नजीर रहा है. वर्तमान समय में प्रदेश में कुल 60% आरक्षण प्रभावी है, जिसमें 50% सामाजिक आरक्षण और 10% आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) का कोटा शामिल है. इसके अलावा महिलाओं के लिए सरकारी नौकरियों में 35% आरक्षण लागू है.
बिहार में किसे-कितना आरक्षण मिलता है?
किस जाति को मिल रहा सबसे ज्यादा लाभ?
OBC आरक्षण की वास्तविकता जानने के लिए सरकार ने जस्टिस जी. रोहिणी के नेतृत्व में एक आयोग का गठन किया था. इस आयोग की रिपोर्ट को अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक 97 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का लाभ सिर्फ 25 फीसदी जातियां उठा रही हैं. 983 ओबीसी जातियों की हिस्सेदारी शून्य है. प्रशांत किशोर की संस्था 'बात बिहार की' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार में पिछड़ा वर्ग (OBC) की कुल सरकारी नौकरियों में से 46.58% पदों पर यादवों का कब्जा है. इसके बाद 18.58% पदों पर कुर्मी जाति का कब्जा है. इसके अलावा करीब 18% पदों पर कुशवाहा जाति के लोग काबिज हैं. मतलब साफ है कि पिछड़ा वर्ग (OBC) की कुल सरकारी पदों पर सिर्फ तीन जातियों का 83.51% कब्जा है.
बिहार में जातियों का वर्गीकरण