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बिहार में हर साल बाढ़ लाखों लोगों के लिए मुसीबत बनकर आती है. खासकर गंगा किनारे बसे जिलों में बाढ़ के साथ-साथ भीषण कटाव भी होता है, जिससे हजारों एकड़ जमीन गंगा में समा जाती है और बड़ी आबादी को विस्थापन का खतरा झेलना पड़ता है. विशेषज्ञों के मुताबिक, गंगा में लगातार जमा हो रही गाद भी बाढ़ और जलस्तर बढ़ने की एक प्रमुख वजह है. ऐसे में अब बिहार में गंगा से गाद हटाने को लेकर दो स्तरों पर पहल होती दिख रही है.
एक तरफ जनता दल यूनाइटेड पिछले कई दिनों से गंगा किनारे बसे 12 जिलों में संवाद कार्यक्रम आयोजित कर रही है. इस संवाद के जरिए फरक्का जल संधि के नवीनीकरण को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं. जदयू की मांग है कि इस संधि का नवीनीकरण नहीं होना चाहिए, ताकि गंगा में गाद जमा होने की समस्या का समाधान तलाशा जा सके.
वहीं, दूसरी तरफ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार ने गाद के इस्तेमाल को लेकर नई नीति पर पहल की है. 3 नवंबर को बिहार सरकार और सड़क एवं परिवहन मंत्रालय के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए हैं. इसके तहत गंगा से निकाली जाने वाली गाद का इस्तेमाल सड़क और राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण में किया जाएगा. यानी अब गंगा की गाद को सिर्फ समस्या नहीं, बल्कि निर्माण कार्यों में उपयोग होने वाले संसाधन के रूप में भी देखा जा रहा है.
सरकार की इस पहल का मकसद गंगा से गाद निकालकर उसका उपयोग विकास कार्यों में करना है. इसके साथ ही गंगा में ड्रेजिंग यानी नदी की तलहटी से गाद हटाने को लेकर भी दिशा-निर्देश दिए गए हैं. इससे एक तरफ नदी की जलधारण क्षमता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है, तो दूसरी तरफ बड़े और मालवाहक जहाजों के परिचालन के लिए गंगा में नौवहन मार्ग भी विकसित किया जा सकेगा.
दरअसल, गंगा में गाद जमा होने और फरक्का जल संधि का मुद्दा एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है. जदयू का तर्क है कि पिछले तीन दशकों से गंगा में गाद जमा होने की समस्या गंभीर हुई है. ऐसे में संधि के नवीनीकरण को लेकर नए सिरे से विचार करने की जरूरत है. हालांकि, गाद हटाने और बाढ़ के प्रभाव को कम करने के लिए विशेषज्ञों के मुताबिक वैज्ञानिक और पर्यावरणीय पहलुओं को ध्यान में रखना भी जरूरी होगा.
अब बात भागलपुर की करें तो यहां गंगा किनारे बसे दर्जनों पंचायत हर साल बाढ़ और कटाव की मार झेलते हैं. हजारों परिवारों की जिंदगी गंगा के जलस्तर और कटाव पर निर्भर करती है. कई इलाकों में खेती की जमीन नदी में समा जाती है, तो कई गांवों पर विस्थापन का खतरा मंडराता रहता है. ऐसे में अगर गंगा से गाद निकालने की योजना प्रभावी तरीके से लागू होती है और फरक्का जल संधि को लेकर भी कोई नया फैसला होता है, तो इसका असर भागलपुर समेत गंगा किनारे बसे बिहार के कई जिलों पर पड़ सकता है.
पिछले दिनों भागलपुर में फरक्का जल संधि को लेकर आयोजित जदयू के संवाद कार्यक्रम के दौरान पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने ड्रेजिंग पॉलिसी को लेकर मीडिया से बातचीत की थी. वहीं, बिहार सरकार के पथ परिवहन मंत्री इंजीनियर शैलेंद्र ने सम्राट सरकार की गाद नीति को उपयोगी बताते हुए इसके फायदे गिनाए हैं.
रिपोर्ट: अश्वनी कुमार, भागलपुर