रेलवे का फोरलेन मास्टर प्लान का सेंटर प्वाइंट बनेगा बिहार, जानिए राज्य को क्या होंगे बड़े फायदे
सड़कों के फोरलेन के बारे में तो सुना था, लेकिन रेलवे ट्रैक का फोरलेन वाकई ब्रॉड आइडिया है. पिछले कुछ साल में भारतीय रेलवे ने जिस तरह से तरक्की की नई बुलंदियों को छुआ है, उम्मीद है कि यह फोरलेन का कॉन्सेप्ट भी विकास की नई बहार लेकर आएगा.
कुछ दिनों पहले रेल मंत्री आश्विनी वैष्णव ने एक वीडियो संदेश के जरिए यह जानकारी दी थी कि भारतीय रेलवे देश के सबसे व्यस्ततम 7 रूटों को फोरलेन या फोर ट्रैक में तब्दील करने जा रहा है. उन्होंने इस प्लान का रोडमैप भी बताया था. उन्होंने बताया था कि करीब 11,000 किलोमीटर में फैले ये 7 रेल मार्ग देश के कुल रेलवे नेटवर्क का 16 प्रतिशत हैं, लेकिन 41 प्रतिशत से अधिक रेल ट्रैफिक इन्हीं रूटों से आता है. 7 सबसे व्यस्ततम रेल रूटों में से 2 रूट सीधे बिहार से होकर गुजरते हैं: पहला, दिल्ली हावड़ा मेन लाइन वाया दीनदयाल उपाध्याय नगर गया पटना भागलपुर और दूसरा, दिल्ली गुवाहाटी कॉरिडोर वाया नरकटियागंज, रक्सौल, सीतामढ़ी झंझारपुर, सरायगढ़, राघोपुर, फारबिसगंज, अररिया, पूर्णिया, कटिहार, न्यू जलपाईगुड़ी होते हुए गुवाहाटी. इन रूटों पर पुरानी लाइनों के दोहरीकरण के अलावा तीसरे और चौथे लाइन के निर्माण के लिए डीपीआर पर काम चल रहा है.
क्या है भारतीय रेलवे की 4-ट्रैक व्यवस्था?
अभी की जो स्थिति है, वो यह है कि एक ही ट्रैक पर वंदे भारत, राजधानी, मेल एक्सप्रेस, पैसेंजर ट्रेनें और मालगाड़ियां चलाई जाती हैं, जिससे ट्रैफिक का भारी कंजेशन हो जाता है. कई ट्रेनें आउटर पर खड़ी कर दी जाती हैं और उससे वीआईपी ट्रेनों को ग्रीन सिग्नल दे दिया जाता है. साथ ही मालगाड़ियों को निकालने के लिए भी ट्रेनों को रोक दिया जाता है.
लेकिन, रेलवे की जो नई योजना है, उसके अनुसार फोर ट्रैक में से 2 ट्रैक पूरी तरह यात्रियों के लिए आरक्षित होंगे और बाकी के 2 ट्रैक मालगाड़ियों के लिए. पूरे नेटवर्क पर कवच 4.0 ऑटोमैटिक सुरक्षा और आधुनिक ब्लॉक सिग्नलिंग की व्यवस्था की जाएगी, ताकि ट्रेनों की स्पीड 130 किलोमीटर प्रति घंटे से लेकर 160 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलाई जा सके.
बिहार को ये हो सकते हैं 5 बड़े फायदे
यात्री और मालगाड़ियों का ट्रैक अलग अलग होने से ट्रेनों को आउटर पर खड़ा नहीं होना होगा. दिल्ली से सीमांचल और गुवाहाटी के सफर में 4 से 6 घंटे की बचत हो सकेगी. चंपारण, सीतामढ़ी और कटिहार से दिल्ली का सफर सुपरफास्ट की कैटेगरी में आ जाएगा.
नेपाल से सटे बिहार के सीमावर्ती इलाके जैसे रक्सौल, सीतामढ़ी, अररिया, फारबिसगंज का इलाका सिंगल या दोहरी लाइन पर निर्भर था, लेकिन फोर ट्रैक बन जाने से यह क्षेत्र सीधे राष्ट्रीय मुख्यधारा के हाई स्पीड नेटवर्क से जुड़ जाएगा. इससे नेपाल सीमा से सटे बिहार के व्यापारिक केंद्रों जैसे रक्सौल और जोगबनी जैसे शहरों को काफी फायदा हो सकता है.
मालगाड़ियों की लेटलतीफी के चलते बिहार के फल, अनाज या फिर स्पेशल प्रोडक्ट जैसे मुजफ्फरपुर की लीची, चंपारण का मक्का, मिथिला का मखाना और भागलपुर की कतरनी चावल आदि खराब हो जाते थे. दो डेडिकेटेड फ्रेट ट्रैक बन जाने से बिहार के किसान और व्यापारी महज 24 से 36 घंटे में अपना माल दिल्ली, मुंबई, लुधियाना और पूर्वोत्तर के बाजारों तक पहुंचा सकेंगे.
अभी बिहार के पटना, गया, कटिहार और मुजफ्फरपुर आदि रूटों पर रेलवे ट्रैक की क्षमता का 120 प्रतिशत से अधिक इस्तेमाल हो रहा है और ऐसे में नई ट्रेनें चलाना असंभव सा हो गया था. फोर ट्रैक बन जाने से रेलवे के पास दोगुनी क्षमता वाली लाइन की मौजूदगी हो जाएगी और इससे बिहार के जिलों को आपस में जोड़ने के लिए दर्जनों नई इंटरसिटी, मेमू और वंदे भारत ट्रेनें चलाई जा सकेंगी.
बिहार एक तरह से लैंडलॉक्ड राज्य है और यहां का पिछड़ापन दूर करने के लिए सबसे बढ़िया और तेज साधन रेलवे लॉजिस्टिक्स ही है. बिहार में बन रहे नए औद्योगिक पार्कों, एथेनॉल प्लांट्स और टेक्सटाइल क्लस्टर्स के लिए कच्चा माल मंगाना और तैयार माल हल्दिया पोर्ट तक भेजना सस्ता और तीव्र गति से संभव हो सकेगा.
बिहार का हो जाएगा आर्थिक कायाकल्प
रेल मंत्री आश्विनी वैष्णव ने फोर ट्रैक के बारे में जो जानकारी दी है, उससे न केवल बिहार के विकास को पंख लग जाएंगे, बल्कि लोगों की आवाजाही, व्यापार, निर्यात आदि में भारी इजाफा हो सकेगा. इससे जहां दक्षिण बिहार के खान और औद्योगिक बेल्ट को गति मिल सकेगी, वहीं उत्तर बिहार के बाढ़ प्रभावित और कृषि प्रधान सीमांचल को पूर्वोत्तर और दिल्ली तक आसान पहुंच बनाने में भारी मदद मिलेगी.