'जीते जी नामकरण की इतनी जल्दबाजी क्यों?', बख्तियारपुर का नाम नीतीशपुर करने की मांग पर कांग्रेस का तंज
बख्तियारपुर का नाम नीतीशपुर करने की मांग पर कांग्रेस ने तंज कसा है. प्रवक्ता डॉ. स्नेहाशीष वर्धन ने कहा कि आखिर जीते-जी नीतीश कुमार जी के नाम पर नामकरण की इतनी जल्दबाजी क्यों की जा रही है?
बख्तियारपुर का नाम बदलकर नीतीशपुर करने की मांग की जा रही है. इसे लेकर एक बार फिर राजनीति अपने चरम पर है. पूर्व मंत्री और जदयू के वरिष्ठ विधायक श्याम रजक ने टिप्पणी की है. उन्होंने कहा कि क्या किसी जगह का नाम नीतीश कुमार के नाम पर रखा जाना चाहिए? नीतीश कुमार बेशक हमारे राष्ट्रीय नेता हैं, लेकिन हमारी पार्टी ऐसी चीजों में विश्वास नहीं करती. वहीं, भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष हरिभूषण ठाकुर बचौल ने कहा कि निश्चित रूप से मैं इस मांग का समर्थन करता हूं. बख्तियार खिलजी एक लुटेरा और विध्वंसक था, जिसने नालंदा विश्वविद्यालय जैसी महान धरोहर को नष्ट किया.
'किसी स्थान का नामकरण होना गौरव की बात'
उन्होंने कहा कि बिहार के विकास और नालंदा के गौरव को पुनर्स्थापित करने का काम नीतीश कुमार ने किया है. इसलिए अगर इतिहास और बिहार के सम्मान की बात हो रही है, तो बख्तियारपुर का नाम बदलकर ‘नीतीशपुर’ किए जाने की मांग पर गंभीरता से विचार होना चाहिए. जिस व्यक्ति ने बिहार को विकास की नई दिशा दी, उसके नाम पर किसी स्थान का नामकरण होना गौरव की बात होगी.
'नामकरण की इतनी जल्दबाजी क्यों?'
वहीं, बिहार कांग्रेस प्रवक्ता डॉ. स्नेहाशीष वर्धन ने कहा कि बख्तियारपुर का नाम बदल कर नीतीश कुमार जी के नाम पर रखने की मांग अपने आप में बताती है कि संतोष कुमार सुमन जी राजनीति में बने रहने के लिए ऐसा कर रहे हैं. जनहित से जुड़े मुद्दों पर उनका कोई ठोस काम दिखाई नहीं देता, इसलिए नेताओं को खुश करने वाले बयान देकर अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखने की कोशिश हो रही है. उन्होंने कहा कि सवाल यह है कि आखिर जीते-जी नीतीश कुमार जी के नाम पर नामकरण की इतनी जल्दबाजी क्यों? क्या यह जनता दल यूनाइटेड और नीतीश कुमार की लगातार घटती राजनीतिक प्रासंगिकता को जिंदा रखने की कोशिश नहीं है?