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पटना के इस मंदिर में 1914 से जल रही अखंड ज्योति, किशनगंज में मंदिर की आरती और मस्जिद के अजान के बीच कोई 'दीवार' नहीं

पटना के एक दुर्गा मंदिर में साल 1914 से लगातार अखंड ज्योत जल रही है. वहीं, किशनगंज के बिशनपुरगांव में माता के मंदिर और मस्जिद के बीच कोई दीवार नहीं है. आरती की गूंज मस्जिद में सुनाई देती है, तो वहीं मस्जिद में अजान की गूंज मंदिर तक.

Edited By Ranjana Kumari
Published: Oct 19, 2026, 11:04 AM IST | Updated: Oct 19, 2026, 11:23 AM IST
Image Credit: किशनगंज बिशनपुरगांव का मंदिर और मस्जिद (जी मीडिया)
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राजधानी पटना में मां दुर्गा के कई मंदिर हैं, लेकिन जिस मंदिर की हम बात कर रहे हैं, वह बेहद खास है. इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां मां की दो अखंड ज्योत सन 1914 से लगातार प्रज्वलित हो रही हैं. यहां के मुख्य पुजारी बंसी नाथ तिवारी के पिताजी ने इन अखंड ज्योतों को प्रज्वलित किया था, जो आज तक अनवरत जल रही हैं. इनमें से एक ज्योत शुद्ध घी से और दूसरी तिल के तेल से जलती है. 

साल भर इस मंदिर में भक्तों का आना-जाना लगा रहता है और यहां आने वाले भक्तों की मनोकामनाएं अवश्य पूरी होती हैं. नवरात्र के नौ दिनों में इस मंदिर में भक्तों की अपार भीड़ उमड़ती है. मां के दर्शन के लिए भक्त घंटों कतार में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं, क्योंकि लोगों का अटूट विश्वास है कि मां उनकी हर मुराद पूरी करती हैं.

किशनगंज का ये गांव पेश करता है अनोखी मिसाल

वहीं, किशनगंज जिले का बिशनपुरगांव, मंदिर और मस्जिद के सह-अस्तित्व और आपसी भाईचारे की एक अनोखी मिसाल पेश करता है. यहां माता के मंदिर और मस्जिद के बीच कोई दीवार नहीं है, बल्कि केवल आपसी सद्भाव है. भारत की असली पहचान सिर्फ मंदिर या मस्जिद में नहीं, बल्कि दोनों के बीच के उस भाईचारे में बसती है. बता दें कि बिहार के मुस्लिम बहुल जिले किशनगंज के इस सद्भाव वाले अनूठे गांव में, जहां एक तरफ प्राचीन दुर्गा मंदिर है, तो ठीक बगल में मस्जिद. यहां आरती की गूंज मस्जिद तक पहुंचती है और कुरान की ध्वनि मंदिर में सुनाई देती है.

भौगोलिक स्थिति और इतिहास

यह गांव किशनगंज जिला मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर कोचाधामन प्रखंड के अंतर्गत स्थित है. यह पूरी दुनिया में 'गंगा-जमुनी तहजीब' का एक बेमिसाल उदाहरण पेश करता है. गांव में एक तरफ माता का दरबार है, तो ठीक दूसरी तरफ अल्लाह का घर यानी मस्जिद. बिशनपुर गांव का यह ऐतिहासिक दुर्गा मंदिर सिर्फ पूजा का स्थान नहीं, बल्कि करीब 57 साल पुरानी आस्था और सहयोग की कहानी है. साल 1969 में सीमित संसाधनों के बीच फूस के एक छोटे से घर से मां दुर्गा की पूजा की शुरुआत हुई थी. स्थानीय लोगों की कड़ी मेहनत और समर्पण से आज यहां एक भव्य मंदिर खड़ा है. श्रद्धालु बताते हैं कि यहाँ सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है.

त्योहारों में दिखती है सामाजिक एकता

दुर्गा पूजा के दौरान बिशनपुर की यह विशेषता और भी अधिक चमक उठती है. हिन्दू समुदाय श्रद्धा के साथ इस मंदिर में दुर्गा पूजा का आयोजन करता है, तो दूसरे समुदाय के लोग भी इस उत्सव का पूरा सम्मान करते हैं. सुख-दुख में एक-साथ रहना और त्योहारों मिलजुलकर मनाना ही बिशनपुर की असली पहचान है. बिशनपुर गांव की यह परंपरा केवल अतीत की कोई कहानी नहीं, बल्कि वर्तमान पीढ़ी के लिए भी एक व्यावहारिक संदेश है. मंदिर और मस्जिद की निकटता तथा धार्मिक आयोजनों में आपसी सम्मान बच्चों और युवाओं को सह-अस्तित्व का महत्व सिखाता है.

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दोनों समुदाय कर रहे एक-दूसरे की आस्था का सम्मान

स्थानीय लोगों के अनुसार, सार्वजनिक दुर्गा पूजा में हिन्दू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोगों की सक्रिय भागीदारी रहती है. पीढ़ियों से चली आ रही यह साझा संस्कृति जिले में भाईचारे और सामाजिक एकता की भावना को बेहद मजबूत करती है. मंदिर और मस्जिद की यह नजदीकी किशनगंज की सामाजिक पहचान बन चुकी है. एक ओर जहां श्रद्धालु मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं, वहीं दूसरी ओर मस्जिद में नमाज अदा की जाती है. दोनों समुदाय अपनी-अपनी धार्मिक परंपराओं का पूरी निष्ठा से पालन करते हुए एक-दूसरे की आस्था का सम्मान करते हैं. जिले की यह परंपरा साबित करती है कि धार्मिक आस्था और सामाजिक सौहार्द एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं, बल्कि आपसी सम्मान और सहयोग के साथ अलग-अलग परंपराएं एक ही समाज में साथ-साथ आगे बढ़ सकती हैं.

पटना से रूपेंद्र श्रीवास्तव और अमित कुमार सिंह की रिपोर्ट

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About the Author

रंजना कुमारी Zee Bihar Jharkhand की डिजिटल टीम में बतौर Sub-Editor अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं. बिहार के सिवान जिले के जीरादेई से ताल्लुक रखने वाली रंजना स्थानीय और जमीनी मुद्दों पर गहरी पकड़ रखती हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में वे मुख्य रूप से राजनीति, क्राइम, यूटिलिटी और देश-दुनिया की अहम रूटीन खबरों को प्रमुखता से कवर करती हैं. Zee Media का हिस्सा बनने से पहले रंजना ने न्यूज इंडिया 24x7 में भी डेढ़ साल तक अपनी सेवाएं दी थीं. एकेडमिक की बात करें तो रंजना GJU से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर रही हैं.
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