सैनिटरी पैड मशीनें सप्लाई न करना पड़ेगा महंगा: अब 12% ब्याज के साथ लौटाने होंगे पैसे, जिला उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला
पटना जिला उपभोक्ता आयोग ने सैनिटरी पैड मशीनों की पूरी आपूर्ति नहीं करने पर विक्रेता को 1.30 लाख रुपये लौटाने का आदेश दिया है. आयोग 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ राशि लौटानी का निर्देश दिया है. साथ ही मानसिक पीड़ा और आजीविका के नुकसान पर 75 हजार रुपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया.
बिहार में सैनिटरी पैड को लेकर एक बड़ी और अहम खबर सामने आई है. सैनिटरी पैड महिलाओं के लिए जीवन रक्षक माना जाता है. वहीं, इसको लेकर कोर्ट तक जाना हो, तो मामला बेहद की मानसिक पीड़ा वाला होता है. दरअसल, हुआ कुछ यूं कि पटना जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक सैनिटरी पैड निर्माण को लेकर उपभोक्ता हित में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. चलिए पूरा मामला जानते हैं कि आखिर क्या है?
पटना जिला उपभोक्ता आयोग ने 13 अक्टूबर, 2026 दिन मंगलवार को सैनिटरी पैड निर्माण मशीनों की पूरी आपूर्ति नहीं करने के मामले में केस की सुनाई की. इसके बाद मामले पर फैसला दिया. जिला उपभोक्ता आयोग ने उपभोक्ता हित में फैसला सुनाते हुए विक्रेता को शिकायतकर्ता के 1.30 लाख रुपए 12 फीसदी सालाना ब्याज के साथ लौटाने का आदेश दिया है.
जिला उपभोक्ता आयोग ने शिकायर्ता को केस के दौरान हुई मानसिक पीड़ा और आजीविका के अवसरों के हानि होने के लिए 75,000 रुपए मुआवजा भी देने का निर्देश दिया है. साथ ही मुकदमा खर्च के रूप में 10 हजार रुपए देने का भी निर्देश दिया है.
क्या है पूरा मामला, जो उपभोक्ता आयोग तक पहुंचा, जानिए
जिला उपभोक्ता आयोग में चले मुकदमा के अनुसार, शिकायतकर्ता बिहार उद्यमी योजना की लाभार्थी हैं. जिन्होंने उन्होंने इंडिया मार्ट के जरिए से सैनिटरी पैड बनाने के लिए मशीनों की खरीद के लिए विक्रेता को तीन लाख रुपए पहले दिए थे. इसके बाद विक्रेता को सैनिटरी पैड निर्माण के लिए उपभोक्ता को देना था. हालांकि, विक्रेता ने कुछ मशीनों को दिया, फिर बाकी जरूरी मशीनों को नहीं दिया.
शिकायतकर्ता के अनुसार, मेरी तरफ से बार-बार विक्रेता से संपर्क करने और आश्वासन मिलने के बावजूद समस्या का कोई हल नहीं निकला. मुझे सैनिटरी पैड निर्माण की मशीनों को नहीं दिया गया. इसके बाद परेशान होकर कानूनी नोटिस भी भेजा गया. फिर भी विक्रेता की तरफ से मशीनों की पूरी आपूर्ति नहीं की गई.
जिला उपभोक्ता आयोग ने मामले में सभी सबूतों के आधार पर गौर करते हुए विक्रेता की सेवा में कमी को मानते हुए शिकायत को आंशिक रूप से एकपक्षीय मंजूरी प्रदान कर दी. उपभोक्ता आयोग ने आदेश की कॉपी मिलने के 60 दिनों के अंदर आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. बता दें कि यह आदेश जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, पटना के अध्यक्ष प्रेम रंजन मिश्र और सदस्य रजनीश कुमार ने पारित किया.