पहले सेंट्रल यूनिवर्सिटी और अब NSD का कैंपस: मोतिहारी पर इतना फोकस क्यों कर रही सम्राट सरकार?
बिहार में NSD के नए कैंपस की स्थापना को मंजूरी मिल गई है. बिहार सरकार की ओर से जमीन उपलब्ध कराने के साथ-साथ भवन निर्माण की लागत का 50 प्रतिशत खर्च भी उठाया जाएगा.
Published: Sep 02, 2026, 09:22 AM IST
| Updated: Sep 02, 2026, 02:15 PM IST
बिहार के कला और संस्कृति के क्षेत्र में जल्द ही एक बड़ी पहल होने जा रही है. केंद्र सरकार ने बिहार में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD) के नए कैंपस की स्थापना को मंजूरी दे दी है. इस फैसले से राज्य के युवा कलाकारों को नाट्य प्रशिक्षण के लिए दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना पड़ेगा. नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) कैंपस की स्थापना के लिए बिहार सरकार जमीन उपलब्ध कराने के साथ-साथ भवन निर्माण की लागत का 50 प्रतिशत हिस्सा भी वहन करेगी. हालांकि, अभी इसके लिए अभी जगह का चयन नहीं हुआ है. मोतिहारी को इससे पहले एक सेंट्रल यूनिवर्सिटी भी मिल चुकी है.
अब तक मोतिहारी को क्या-क्या मिला?
- इससे पहले सरकार ने यहां महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना की थी.
- मोतिहारी को मेडिकल कॉलेज की सौगात मिल चुकी है.
- पिपरा कोठी में कृषि, डेयरी और बागवानी के लिए हाई लेवल ट्रेनिंग और अनुसंधान केंद्र की स्थापना
- राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज और महिला आईटीआई संस्थानों का विस्तार
- पिपराकोठी में आईसीएआर की शाखा
- कोटवा के पास आधुनिक मिल्क प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना
- बापूधाम मोतिहारी रेलवे स्टेशन और सुगौली जंक्शन को विश्वस्तरीय बनाने की शुरुआत
- भारत-नेपाल इंटरनेशनल रेल व रोड कॉरिडोर
- रक्सौल एयरपोर्ट का पुनरुद्धार प्रस्ताव
- मोतिहारी-अमलेखगंज (नेपाल) क्रॉस-बॉर्डर पेट्रोलियम पाइपलाइन
मोतिहारी पर इतना फोकस क्यों है?
- सत्याग्रह का जन्मस्थान- मोतिहारी अपने महान स्वतंत्रता संग्राम, प्राचीन संस्कृति और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए विशेष महत्व रखता है. इस धरती को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की कर्मभूमि माना जाता है. उन्होंने यहां 1917 में नील की खेती (तीनकठिया प्रथा) के खिलाफ पहला सफल 'सत्याग्रह' आंदोलन शुरू किया था. अप्रैल 1917 में राजकुमार शुक्ल के बुलावे पर गांधीजी पहली बार मोतिहारी आए थे. वे तीनकठिया प्रथा के खिलाफ अंग्रेजों द्वारा किसानों व मजदूरों पर किये जा रहे अत्याचार को देखने समझने के लिए आये थे, लेकिन तत्कालीन डीएम ने उन्हें तुरंत जिला छोड़ने का आदेश दिया. गांधी जी ने सरकारी आदेश की अवहेलना की, जिससे उनके पहले सत्याग्रह की नींव पड़ी थी.
- पटना पर दबाव कम करने की कोशिश- ज्यादातर विकास प्रोजेक्ट को मोतिहारी और उसके आसपास के जिलों में स्थानंतरित करने का सबसे बड़ा कारण राजधानी पटना से दबाव कम करना है. पटना जिला गजेटियर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, राजधानी की आबादी हर साल औसत एक लाख बढ़ रही है. वर्ष 1970 में पटना जिले की आबादी करीब 19.71 लाख थी. वहीं वर्तमान समय में पूरे पटना जिले की जनसंख्या 58 लाख से ऊपर पहुंच चुकी है. ऐसे में राजधानी पर दबाव बढ़ता जा रहा है. यही वजह है कि अब डेवलपमेंट प्रोजेक्ट को राजधानी से बाहर अन्य जिलों में ट्रांसफर किया जा रहा है, जिससे जनसंख्यिकी दबाव कम किया जा सके.
- एनडीए को मिलता है अपार जनसमर्थन- चंपारण रीजन में एनडीए को अपार जनसमर्थन मिलता रहा है. बिहार विधानसभा चुनाव में पूर्वी चंपारण जिले की 12 में से 11 सीटों पर एनडीए को जीत हासिल हुई थी, सिर्फ ढाका सीट पर महागठबंधन को सफलता मिली थी. यहां राजद प्रत्याशी फैसल रहमान ने बेहद कांटे की टक्कर में विजय हासिल की. पूर्वी चंपारण की राजनीति में केवल भाजपा ही नहीं, बल्कि इसके सहयोगी दलों ने भी शानदार प्रदर्शन किया था. सुगौली सीट पर लोजपा के राजेश कुमार उर्फ बबलू गुप्ता और गोविंदगंज में लोजपा के राजू तिवारी को जीत हासिल हुई थी. वहीं, नरकटिया और केसरिया सीट पर जेडीयू को कामयाबी मिली थी. 2024 में लोकसभा चुनाव के दौरान पश्चिम चंपारण और पूर्वी चंपारण सीट पर बीजेपी को जीत हासिल हुई थी.