इंडोनेशिया में चमका मिथिला का लाल: MMA फाइट में मयंक झा ने जीता खिताब, दरभंगा में हुआ भव्य स्वागत
मिथिला के लाल मयंक झा ने इंडोनेशिया में भारत का परचम लहराया. उन्होंने सीएफ कांग्गू फाइट नाइट-40 खिताब पर कब्जा किया. वहीं, उनके बिहार लौटने पर दरभंगा एयरपोर्ट से ऐतिहासिक दरबार हॉल तक जोरदार स्वागत हुआ.
दरभंगा के लाल मयंक झा ने इंडोनेशिया में कमाल कर दिखाया है. बाली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय फाइट नाइट 'सीएफ कांग्गू फाइट नाइट-40' की मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (MMA) में शानदार जीत दर्ज कर मयंक ने न सिर्फ दरभंगा और मिथिला, बल्कि पूरे भारत का नाम अंतरराष्ट्रीय मंच पर रोशन किया है.
मयंक की इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद दरभंगा एयरपोर्ट से लेकर कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक दरबार हॉल तक उनका जोरदार स्वागत और अभिनंदन किया गया. एयरपोर्ट पर पहुंचते ही माता-पिता समेत शहरवासियों ने मयंक का गर्मजोशी से स्वागत किया. इसके बाद शहर के विभिन्न स्थानों पर भी लोगों ने फूल-मालाओं और जयकारों के साथ उनका अभिनंदन किया.
रामबाग निवासी मयंक झा, अमरकांत झा और वंदना झा के पुत्र हैं. उनकी इस सफलता में राज दरभंगा परिवार की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. राज परिवार की ओर से मिली आर्थिक सहायता ने मयंक को अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में हिस्सा लेने और अपने हुनर को साबित करने का अवसर दिया. मयंक की सफलता इस बात की मिसाल है कि प्रतिभा को सही सहयोग और प्रोत्साहन मिले, तो मिथिला के युवा वैश्विक मंच पर भी अपना परचम लहरा सकते हैं.
इसी गौरवशाली उपलब्धि के सम्मान में राज दरभंगा की ओर से कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक दरबार हॉल में नागरिक अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया. यहां मयंक को सम्मानित कर उनकी उपलब्धि की सराहना की गई.
दरभंगा और खेल का रिश्ता भी कोई नया नहीं है. राज दरभंगा के समय से ही शहर में खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने की समृद्ध परंपरा रही है. फुटबॉल से लेकर पोलो तक, दरभंगा राज ने खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
अब इसी खेल परंपरा को आगे बढ़ाते हुए मयंक झा जैसे युवा फाइटर का अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुंचना और जीत हासिल करना मिथिला के लिए गर्व की बात है. दरबार हॉल में हुए इस नागरिक अभिनंदन के जरिए मयंक को सम्मान देने के साथ-साथ मिथिला के दूसरे युवाओं को भी खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने का संदेश दिया गया. मिथिला के लाल मयंक झा ने साबित कर दिया है कि हौसला, मेहनत और सही सहयोग मिले तो दरभंगा की प्रतिभा इंडोनेशिया तक भारत का परचम लहरा सकती है.
रिपोर्ट : मुकेश कुमार