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अब विधान परिषद में केवल एक कांग्रेसी: पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा को छोड़ कोई भी नहीं रहा टक्कर में

मदन मोहन झा मिथिलांचल में कांग्रेस की आवाज रहे हैं. उनका हारना निश्चित रूप से पार्टी के लिए बड़ा झटका है. राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस का अलग-अलग चुनाव लड़ना सही फैसला नहीं रहा. राष्ट्रीय जनता दल को एक सीट तो मिल गई, लेकिन कांग्रेस 8 में 0 पर सिमट गई.

Written By Sunil Mishra
Published: Oct 28, 2026, 01:05 PM IST | Updated: Oct 28, 2026, 01:22 PM IST
Image Credit: मदन मोहन झा, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, बिहार कांग्रेस (File Photo)
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बिहार कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और दरभंगा शिक्षक निर्वाचन सीट से प्रत्याशी मदन मोहन झा अपनी सीट गंवा बैठे हैं. जन सुराज पार्टी के सुरेश प्रसाद राय ने उन्हें 324 वोटों से हराया. इस तरह जन सुराज पार्टी का विधान परिषद में डेब्यू हो गया है. इससे पहले बांकीपुर सीट पर हुए उपचुनाव में प्रशांत किशोर ने भाजपा प्रत्याशी को हराकर विधानसभा में पार्टी का खाता खोला था. अब दोनों सदनों में जन सुराज पार्टी के एक-एक सदस्य हो गए हैं. मदन मोहन झा कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे हैं. वे दरभंगा शिक्षक सीट से विधान परिषद सदस्य थे. बेगूसराय स्थानीय प्राधिकार सीट से चुनाव जीतने वाले राजीव कुमार भी कांग्रेसी पार्षद हैं, लेकिन मदन मोहन झा के चुनाव हार जाने से अब राजीव कुमार सदन में अकेले कांग्रेसी रह गए हैं. राजीव कुमार का कार्यकाल अप्रैल 2028 में खत्म होगा.

मदन मोहन झा की हार से बिहार के मिथिलांचल में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है. वे बिहार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं. उनका जन्म 1 अगस्त, 1956 को हुआ था. 2018 से 2022 के बीच वे बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष रहे थे. 2015-17 के बीच वे बिहार के भूमि सुधार मंत्री रहे थे. 1985 से 1995 तक मनीगाछी से वे विधायक रहे थे. उनकी शिक्षा की बात करें तो एमएससी और पीएचडी की डिग्री किए हुए हैं.

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बिहार विधान परिषद के हालिया चुनाव से पहले सदन में कांग्रेस के दो सदस्य थे, लेकिन मदन मोहन झा चुनाव हार चुके हैं. अब केवल राजीव कुमार बचे हुए हैं. इससे सदन में कांग्रेस की आवाज कमजोर हुई है. वह अपनी सीट नहीं बचा सकी और न ही दूसरी सीटों पर मजबूती से मुकाबला कर सकी. इसके अलावा, राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस के अलग-अलग प्रत्याशी उतारने से भी महागठबंधन को भारी नुकसान हुआ है.

अगर राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस मिल-जुलकर प्रत्याशी उतारते तो विधान परिषद चुनाव परिणाम की तस्वीर अलग हो सकती थी, लेकिन दोनों दलों ने अपने अपने प्रत्याशी उतारे. राष्ट्रीय जनता दल ने 8 में से 7 सीटों पर तो कांग्रेस ने 5 सीटों पर उम्मीदवार खड़े कर दिए. राष्ट्रीय जनता दल के 7 में से एक प्रत्याशी को विजयश्री का आशीर्वाद मिला, लेकिन कांग्रेस इस चुनाव में शून्य पर सिमट गई. मदन मोहन झा को छोड़ दें तो बाकी चारों प्रत्याशी टक्कर में भी नहीं रहे.

निश्चित रूप से मदन मोहन झा का चुनाव हारना कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका है. वे न केवल पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं, बल्कि मिथिलांचल में पार्टी की आवाज रहे हैं. उनके हारने से विधान परिषद के अलावा जमीन पर और प्रबुद्ध वर्ग में कांग्रेस और कमजोर हो सकती है. यह बात पार्टी को समझ में आ जाना चाहिए.

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इंडस्ट्री में 2 दशकों का अनुभव है तो खबरों की बाजीगरी आती है. डिजिटल मीडिया में आधे दशक हो चुके हैं. लंबे समय तक प्रिंट मीडिया में काम करना डिजिटल की दुनिया में मददगार साबित हुआ. दैनिक जागरण से शुरू हुआ सफर, अमर उजाला, हिन्दुस्तान, News Nation, ABP और India Ahead होते हुए Z Bihar Jharkhand तक पहुंचा है. बिहार और झारखंड की स्थानीय और राजनीतिक खबरों की विशेष समझ.
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