नीरज सिंह ही नहीं, अनंत सिंह की भी दांव पर साख! क्यों दिलचस्प हुई पटना स्नातक चुनाव की लड़ाई?
जदयू एमएलए अनंत सिंह के प्रचार से पटना स्नातक क्षेत्र का चुनाव दिलचस्प हो गया है. इस सीट पर एक ही पार्टी के दो बड़े नेताओं की साख दांव पर लग गई है. माना जाता है कि नीरज कुमार और अनंत सिंह दोनों नीतीश कुमार के बेहद करीबी नेता हैं. हालांकि, बिहार एमएलसी चुनाव में जदयू ने नीरज कुमार को समर्थन दिया है. वहीं, विधायक अनंत सिंह खुलकर इनका विरोध कर रहे हैं.
बिहार विधान परिषद के पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव अब दिलचस्प होता दिख रहा है. जन सुराज के प्रत्याशी अनुज सिंह के पक्ष में मोकामा के जदयू विधायक अनंत सिंह के लगातार चुनाव प्रचार में उतरने से मुकाबला चर्चा में आ गया है. अनंत सिंह कई इलाकों में रोड शो और जनसंपर्क के जरिए अनुज सिंह के पक्ष में माहौल बनाने में जुटे हैं. उनके प्रचार में उतरने को अनुज सिंह के लिए राजनीतिक बढ़त के रूप में देखा जा रहा है.
शिक्षा और युवाओं के भविष्य चुनाव का प्रमुख मुद्दा
अनंत सिंह मोकामा की राजनीति में मजबूत पकड़ रखने वाले नेता माने जाते हैं और अपने विधानसभा क्षेत्र में कभी हार का सामना नहीं किया है. ऐसे में उनके समर्थन और प्रचार से अनुज सिंह को फायदा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है. हालांकि, चुनाव में इसका कितना असर पड़ेगा, यह मतदाताओं के रुख से ही स्पष्ट होगा. अनुज सिंह अपनी पहचान शिक्षाविद और समाजसेवा से जुड़े व्यक्ति के रूप में रखते हैं. वह शिक्षा और युवाओं के भविष्य को चुनाव का प्रमुख मुद्दा बना रहे हैं.
गरीबों के बीच 10 हजार कंबल बांटने की योजना
उनके मुताबिक, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराना जरूरी है. वह हर साल 500 गरीब बच्चों को नि:शुल्क पढ़ाने का दावा करते हैं. इसके अलावा, गरीबों के बीच 10 हजार कंबल बांटने की योजना भी उनके सामाजिक एजेंडे का हिस्सा है. अनुज सिंह ने पटना, नवादा और नालंदा में स्नातक छात्रों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले कोचिंग सेंटर खोलने का वादा किया है. उनका जोर युवाओं को शिक्षा के साथ रोजगार के अवसरों से जोड़ने पर है. क्षेत्र में बढ़ती बेरोजगारी और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए संसाधनों की कमी को वह अहम सवाल के रूप में उठा रहे हैं.
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में मुकाबला दिलचस्प
दूसरी ओर, मौजूदा विधान परिषद सदस्य नीरज कुमार के खिलाफ कथित सत्ता-विरोधी रुझान भी चुनावी चर्चा का हिस्सा बन रहा है. उनके विरोधियों का आरोप है कि करीब 25 वर्षों के राजनीतिक कार्यकाल में उन्होंने स्नातक छात्रों की समस्याओं को प्रमुखता से नहीं उठाया. छात्र हितों और बेरोजगारी के मुद्दे पर उनकी सक्रियता को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं. ऐसे में पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सेवा और राजनीतिक प्रभाव के बीच मुकाबला दिलचस्प होता जा रहा है.
बिहार विधान परिषद की 8 सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान
अनुज सिंह के पक्ष में अनंत सिंह की सक्रियता ने चुनावी सरगर्मी बढ़ा दी है. अब देखना होगा कि युवाओं और स्नातक मतदाताओं के बीच उठाए गए मुद्दे और प्रचार अभियान का चुनावी नतीजों पर कितना असर पड़ता है. बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान होना है. मतदान भले ही महज आठ सीटों पर हो रहा हो, लेकिन इसने राज्य के प्रमुख राजनीतिक दलों की बेचैनी बढ़ा दी है. एनडीए में जहां अनंत सिंह परेशानी बने हुए हैं, वहीं महागठबंधन में कांग्रेस और राजद के बीच खींचतान चर्चा में है.
इनपुट: आईएएनएस
यह भी पढ़ें: 'जदयू-बीजेपी के बीच सबकुछ ठीक नहीं', प्रशांत किशोर के दावे से मची सियासी सनसनी