लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के तेवर बदल रहे हैं. पिछले कुछ समय से वे लगातार एनडीए की तय लाइन से हटकर बयान दे रहे हैं. पीएम मोदी कैबिनेट का सदस्य होने के बाद भी बिहार और अन्य राष्ट्रीय मुद्दों पर वे ऐसा बयान दे रहे हैं, जो विरोधी खेमे को रास आ रहा है. हालांकि, अभी उनके तेवर एनडीए से दूर जाने या गठबंधन तोड़ने के स्तर तक नहीं पहुंचा है, लेकिन उनके बयान इशारा कर रहे हैं कि वे बीजेपी और जेडीयू की हर बात को मानने के मूड में नहीं है और एक स्ट्रैटेजिक रेखा खींच रहे हैं. उनके पिता रामविलास पासवान को राजनीतिक हलकों में मौसम वैज्ञानिक कहा जाता था. कही ऐसा तो नहीं कि चिराग पासवान भी मौसम का मिजाज भांपकर चेक एंड बैलेंस की रणनीति अपना रहे हैं. अभी बिहार में विधान परिषद की 8 सीटों के चुनाव होने जा रहे हैं. बीजेपी और जेडीयू ने 8 सीटों को आपस में बांट लिया है. संभव है कि चिराग पासवान को यह नागवार गुजरी हो और प्रेशर बनाने के लिए वे ऐसा बयान दे रहे हैं.
जी बिहार के स्थानीय संपादक स्वप्निल सोनल कहते हैं कि 2024 के लोकसभा चुनाव में 5 में से 5 सीटें जीतने के बाद चिराग पासवान ने खुद को साबित किया है और अब वे सहयोगी दलों को यह संदेश देना चाहते हैं कि उन्हें हल्के में नहीं लिया जा सकता. एनडीए में रहकर जब वे विपक्ष के मुद्दों को अपनी आवाज देते हैं तो वे एनडीए के सहयोगी दल के रूप में नहीं, बल्कि भविष्य में एक स्वतंत्र विकल्प के रूप में देखे जाने की मंशा रखते हैं. पिछले दिनों लोजपा रामविलास के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजू तिवारी ने एक सभा के दौरान चिराग पासवान को भविष्य का मुख्यमंत्री करार दिया था और उस सभा में लोजपा रामविलास प्रमुख भी शामिल थे.
चुनाव आयोग विवाद में बीजेपी से अलग राय
कुछ दिन पहले चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त और बाकी दोनों चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद की खबरें आम हुई थीं. दोनों चुनाव आयुक्तों ने अलग अलग मुद्दों पर मुख्य चुनाव आयुक्त को पिछले 10 महीनों में 14 डिसेंट नोट्स भेजे थे.
इस बात का खुलासा होने के बाद भाजपा और जेडीयू ने चुनाव आयोग का बचाव किया तो चिराग पासवान ने इन दोनों दलों से अलग राय रखी थी. चिराग पासवान ने कहा था, 'सरकार का हिस्सा होने के नाते किसी संवैधानिक संस्था का बचाव नहीं करेंगे. चुनाव आयोग को जनता के मन में उपजी शंकाओं को दूर करना चाहिए.'
मुझे शर्म आती है... बिहार की कानून व्यवस्था पर चिराग
बिहार के जमुई और समस्तीपुर में लड़कियों के साथ हुई बदसलूकी और उनका वीडियो वायरल होने के बाद भाजपा और जेडीयू सरकार का बचाव कर रही थीं. वहीं चिराग पासवान ने फिर से अलग राग अलापा और एनडीए सरकार को ही कटघरे में खड़ा कर दिया था.
चिराग पासवान ने एक बयान में कहा था, जब बिहार में ऐसी घटनाएं होती हैं तो एनडीए का हिस्सा होने के नाते मुझे खुद शर्मिंदगी होती है. केवल अपराधियों के पैर में गोली मार देना या कुछ लोगों को पकड़ लेना समस्या का समाधान नहीं है.
उन्होंने कहा कि कानून का ऐसा खौफ हो कि हमारी बहन और बेटियों की तरफ कोई आंख उठाकर भी न देखे. पुलिस पर सवाल उठ रहे हैं तो सरकार को आत्ममंथन करना ही होगा. हालांकि, यह वीडियो फैक्ट चेक में पिछले साल विधानसभा चुनाव से पहले का निकला है.
लेटरल एंट्री का विरोध
सरकार की कई सामाजिक और नीतिगत मुद्दों पर चिराग पासवान ने शायद ना कहने की आदत डाल ली है. केंद्र सरकार ने जब यूपीएससी के जरिए बिना आरक्षण लेटरल एंट्री की भर्ती निकाली थी, तब चिराग पासवान ने सबसे पहले इस बात को लेकर विरोध दर्ज कराया था. उसके बाद मोदी सरकार को यह फैसला वापस लेना पड़ा था.
आरक्षण: सब क्लासिफिकेशन और क्रीमीलेयर
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद एनडीए सरकार के भीतर एक तरह की हिचकिचाहट थी. इस मुद्दे पर चिराग पासवान ने साफ तौर पर कह दिया था कि अनुसूचित जाति और जनजाति आरक्षण में क्रीमीलेयर का प्रावधान कतई स्वीकार नहीं होगा और इसके लिए सड़क से संसद तक लड़ाई लड़ेंगे.
वक्फ संशोधन बिल
चिराग पासवान की पार्टी ने इस बिल को संयुक्त संसदीय समिति में भेजे जाने की बात का समर्थन किया था. चिराग पासवान की कोशिश अल्पसंख्यक समाज के संशयों को दूर करना था.