बिहार: POCSO एक्ट में राज्य में कितने केस और देश भर में कितने नंबर पर
जमुई में नाबालिग से बदसलूकी और छेड़खानी के मामले में पुलिस ने पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया है. पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज मुकदमों में देश में बिहार का चौथा स्थान है और करीब 16 हजार से ज्यादा मामले लंबित पड़े हैं. ऐसे में सरकार को इस ओर भी ध्यान देने की जरूरत है.
जमुई में नाबालिग लड़की के साथ छेड़खानी मामले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है. पुलिस ने इस कांड के मुख्य आरोपी नंदन यादव को हाफ एनकाउंटर के बाद गिरफ्तार कर लिया है. नंदन के साथ उसका साथी हरेराम यादव को भी गिरफ्तार कर लिया गया है. अब तक इस केस में करीब 6 से 8 अपराधियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. लड़की नाबालिग है, इसलिए आरोपियों पर पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) के तहत कार्रवाई की जाएगी. अब सवाल यह है कि बिहार में पॉक्सो एक्ट के कितने मामले हैं और देश में बिहार का कितना नंबर है?
क्या है पॉक्सो एक्ट और कितना सख्त है कानून?
नाबालिग बच्चों को सेक्शुअल अब्यूज से बचाने के लिए साल 2012 में केंद्र सरकार ने पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) कानून बनाया था. यह कानून 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को यौन उत्पीड़न, यौन शोषण और पोर्नोग्राफी जैसे गंभीर अपराधों से सुरक्षित रखता है. इस कानून में लैंगिक भेदभाव नहीं है, यानी नाबालिग लड़की और लड़के दोनों को यह कानून संरक्षण देता है. साल 2019 में इस कानून को और ज्यादा सख्त कर दिया गया. अब 16 साल से कम उम्र के बच्चों से रेप के मामले में 10 साल की न्यूनतम सजा को बढ़ाकर 20 साल का प्रावधान है. वहीं, 12 साल से कम उम्र के बच्चों से यौन शोषण पर उम्रकैद से लेकर फांसी तक की सजा का प्रावधान है. पॉक्सो एक्ट लगने पर तुरंत गिरफ्तारी का प्रावधान है.
बिहार में POCSO Act के कितने केस?
| राज्य | पॉक्सो एक्ट के तहत मामले (दर्ज / लंबित) |
|---|---|
| उत्तर प्रदेश | 19,039 (सबसे अधिक दर्ज) |
| महाराष्ट्र | दूसरा स्थान |
| पश्चिम बंगाल | तीसरा स्थान |
| बिहार | लगभग 16,000 |
| कुल देश भर में (लंबित) | 2,43,615 |
| कुल देश भर में 2025 में दर्ज | 80,320 |
लड़ाई अभी बहुत लंबी है!
हालांकि, पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) के तहत अपराधों की सुनवाई बेहद धीमी है. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) और केंद्रीय कानून मंत्रालय की ओर से 2025 में जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, देश में POCSO एक्ट के तहत 2,43,615 मामले लंबित हैं. ये आंकड़े बच्चों को जल्द न्याय दिलाने के लिए न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने की तत्काल जरूरत को उजागर करते हैं. केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के मुताबिक, साल 2025 में पाक्सो अधिनियम के तहत 80,320 मामले दर्ज किए गए. पॉक्सो एक्ट के तहत उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा मुकदमे लंबित या दर्ज हैं. यूपी में सबसे अधिक 19,039 मामले दर्ज किए गए. इस मामले में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के बाद बिहार का नंबर आता है. प्रदेश में पॉक्सो एक्ट के लगभग 16 हजार मामले लंबित या दर्ज हैं.