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भागलपुर में गंगा के बढ़ते खतरे के कारण राघोपुर के लोगों को अपने घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा है. लाखों की कीमत वाले घर पीछे छोड़कर लोग ट्रैक्टरों पर अपना सामान लादकर जा रहे हैं. आंखों में आंसू हैं और बस अपना सामान बचाने की कोशिश जारी है. कभी इन घरों से सुबह की शुरुआत चूल्हे के धुएं और बच्चों की आवाजों से होती थी, लेकिन आज वही घर वीरान पड़े हैं. गंगा का कटाव लोगों के लिए ऐसा खौफ बन गया है कि लोग अपना आशियाना छोड़कर सुरक्षित ठिकाने की तलाश में निकल पड़े हैं. किसी के हाथ में सामान है, किसी का सामान ट्रैक्टर पर लदा है और हर किसी की आंखों में एक ही सवाल है क्या लौटकर अपना घर फिर देख पाएंगे?
बेहद दर्दनाक है पलायन की तस्वीरें
तटबंध ध्वस्त होने के बाद गंगा की धार लगातार कटाव कर रही है. मार्जिनल बांध के कटने और मुख्य बांध पर स्थित दुर्गा मंदिर और हनुमान मंदिर के गंगा में समाने के बाद शंकरपुर और छोटी अलालपुर के लोगों का डर और बढ़ गया है. लोग घर खाली कर रहे हैं और सामान लेकर ऊंचे स्थानों की ओर जा रहे हैं. पलायन की तस्वीरें बेहद दर्दनाक है. जिस घर को बनाने में लोगों ने अपनी जिंदगी की जमा पूंजी लगा दी, आज उसी घर से सामान निकालने की जल्दबाजी है. किसी को बर्तन बचाने हैं, किसी को अनाज, तो कोई जरूरी कागजात और बच्चों का सामान समेट रहा है. घरों में चूल्हे नहीं जल रहे, परिवार के लोग खाना तक भूलकर अपना सामान सुरक्षित जगह पहुंचाने में जुटे हैं.
मुख्य बांध भी टूट गया, तो...
लोगों की आंखों में आंसू हैं और जुबान पर सिर्फ डर. उन्हें आशंका है कि अगर मुख्य बांध भी टूट गया, तो गंगा उनके घरों को भी अपने साथ बहा ले जाएगी. लोगों का कहना है कि बहुत मेहनत से लाखों रुपये लगाकर घर बनाया था, लेकिन आज उसे छोड़कर जाने की नौबत आ गई है. सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर गंगा ने घर छीन लिया, तो इन परिवारों का ठिकाना क्या होगा? पीछे छूटता घर, ट्रैक्टर पर लदा सामान और आगे अनजान रास्ता, राघोपुर में पलायन की ये तस्वीरें बता रही हैं कि बाढ़ सिर्फ जमीन नहीं डुबोती, कई परिवारों के सपने भी अपने साथ बहा ले जाती है.
रिपोर्ट: अश्विनी कुमार