गंडक की धार में फंसा पश्चिम चंपारण: वाल्मीकिनगर बैराज से छोड़ा गया 3.14 लाख क्यूसेक पानी, कई गांव जलमग्न
नेपाल में भारी बारिश से बिहार में हाहाकार मचा हुआ है! इंडो-नेपाल बॉर्डर पर स्थित वाल्मीकिनगर गंडक बैराज से 3 लाख 14 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया. गंडक नदी के उफान पर होने की वजह से पश्चिम चंपारण में सैलाब का सितम आ गया है. रोहुआ से चकदहवा तक पानी ही पानी नजर आ रहा है.
नेपाल के तराई क्षेत्र में हो रही भारी वर्षा के बाद गंडक नदी उफान पर है. यही वजह है कि नेपाल के देवघाट से करीब साढ़े चार लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया है. इसके बाद इंडो-नेपाल बॉर्डर पर स्थित वाल्मीकिनगर गंडक बैराज से 3 लाख 14 हजार क्यूसेक पानी का प्रवाह किया जा रहा है, जो इस मानसून सत्र में सर्वाधिक पानी है. लिहाजा, नदी तट के इलाकों समेत निचले इलाकों में बाढ़ की विभीषिका से लोग दो-चार हो रहे हैं.
हालांकि, सूचना के बाद जिला प्रशासन की टीम एडीएम राजीव कुमार सिन्हा के नेतृत्व में बाढ़-ग्रस्त इलाकों में पहुंची है, जहां बगहा एसडीएम चांदनी कुमारी, सीओ वसीम अकरम के साथ मेडिकल और एसडीआरएफ की टीम को तैनात किया गया है. मोटरबोट के जरिए बाढ़ में फंसे लोगों को बाहर निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है.
वहीं, लक्ष्मीपुर रामपुरवा स्थित भेड़िहारी में कम्युनिटी किचन की व्यवस्था की गई है, जहां बाढ़ पीड़ितों को उनके माल-मवेशियों के साथ रहने-सहने, खाने-पीने की व्यवस्था आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से की गई है. खुद SDRF के साथ SSB की टीम रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी है, जबकि कुछ बाढ़ पीड़ित अभी भी पानी के बीच फंसे हुए हैं. ऐसे में प्रशासन की कोशिश है कि सभी बाढ़ पीड़ितों तक भोजन, पानी और दवाइयों की समुचित व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए.
बताया जा रहा है कि नेपाल में हो रही भारी बारिश के बाद सैलाब का सितम पश्चिम चंपारण जिले के करीब आधा दर्जन गांवों में जारी है. एक तरफ जहां बाढ़ पीड़ितों के बीच प्रशासन राहत-बचाव कार्य में जुटा है, वहीं अब बाढ़ पीड़ितों को अपने कच्चे मकान गिरने की चिंता सता रही है, क्योंकि फसल और राशन सब कुछ बाढ़ के पानी में तबाह हो गया है. नारायणी नदी का पानी रिहायशी इलाकों में प्रवेश कर गया है, जिसके बाद हाहाकार मचा हुआ है.
आलम यह है कि चकदहवा, रोहुआ टोला, झंडू टोला, बिन टोली और कान्हा टोली में दर्जनों परिवार बाढ़ की परेशानी झेल रहे हैं. हालांकि, जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से हर संभव सहायता देने का भरोसा दिलाया गया है.
बात करें मौसम की, तो IMD ने अगले कुछ दिनों तक भारी वर्षा और तेज हवाएं चलने का पूर्वानुमान जताते हुए अलर्ट जारी किया है. बाढ़ की विभीषिका के मद्देनजर जिला प्रशासन से लेकर सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में है.
अब देखने वाली बात होगी कि मौसम का आगे क्या मिजाज रहता है और नेपाल के तराई क्षेत्रों में कितनी वर्षा होती है, जिसके बाद कितना और पानी वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बैराज से डिस्चार्ज किया जाता है.
रिपोर्ट: इमरान अज़ीज़