बिहार में बाढ़ का कहर: सारण में 2 लाख से अधिक आबादी प्रभावित, मनेर में भी हालात बेकाबू तो बेतिया में मुख्य सड़क पानी में डूबा
बिहार में बाढ़ का कहर देखने को मिल रहा है. सारण में 2 लाख से अधिक आबादी प्रभावित हुई है. मनेर में भी हालात बेकाबू हो गए हैं. वहीं, बेतिया के नौतन में मंगलपुर गुड़रिया वार्ड नंबर 6 पिछले सात दिनों से बाढ़ की चपेट में है.
बिहार के कई जिले इस समय बाढ़ की मार झेल रहे हैं. सारण जिले में बाढ़ का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है. जिले में दो लाख से अधिक की आबादी बाढ़ से प्रभावित है. सैकड़ों गांवों में बाढ़ का पानी फैलने से लोगों के सामने भोजन और सुरक्षित ठिकाने की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है. बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें लगातार रेस्क्यू अभियान चला रही हैं. वहीं, प्रशासन की ओर से जगह-जगह सामुदायिक रसोई संचालित करने के साथ सूखा राशन और फूड पैकेट का वितरण कराया जा रहा है.
30 सामुदायिक रसोई संचालित
हालांकि, बाढ़ प्रभावित आबादी और गांवों की संख्या को देखते हुए राहत सामग्री की उपलब्धता नाकाफी साबित हो रही है. प्रशासन की ओर से अब तक करीब दस हजार सूखे फूड पैकेट वितरित किए जाने की बात कही जा रही है. वहीं, जिलाधिकारी के अनुसार जिले में लगभग 30 सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं. दूसरी ओर, राहत कार्य में जुटे प्रशासनिक अधिकारी और कर्मी दिन-रात फूड पैकेट तैयार कराने में लगे हैं.
समाहरणालय परिसर में चौबीसों घंटे सूखा राशन पैक करने का काम जारी है. इस कार्य में पुलिसकर्मियों के साथ आंगनबाड़ी सेविकाएं और जीविका दीदियां भी लगातार जुटी हुई हैं. प्रशासन का प्रयास है कि बाढ़ में फंसे लोगों तक जल्द से जल्द भोजन सामग्री पहुंचाई जा सके. जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने बताया कि जिले में राहत सामग्री की उपलब्धता बढ़ाने के लिए अन्य जिलों से भी खाद्य सामग्री मंगाई गई है. पटना, भोजपुर और शिवहर से राहत सामग्री भेजी गई है, जिसे सीधे बाढ़ प्रभावित इलाकों में वितरित कराया जाएगा.
मनेर में नाव बनीं लोगों का एकमात्र सहारा
वहीं, पटना के मनेर में फिर से गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण मनेर दियारा के निचले हिस्सा में बाढ़ का पानी घुस गया है, जिससे मनेर के दो पंचायत प्रभावित है. मंदिर में पानी घुस गया है, गांव चारों तरफ पानी से घिर चुका है. पशुओं का चारा भी डूब चुका है. प्रभावित गांवों में मनेर के हल्दी छपरा, छिहतर (गांव का नाम है) महावीर टोला, इस्लामगंज शामिल है. सबसे ज्यादा प्रभावित मनेर दियारा के इस्लामगंज है, जिसका शहर मुख्यालय से बिल्कुल संपर्क टूट चुका है. रोजमर्रा की जरूरतों के लिए, लोगों के पास आने-जाने का एकमात्र जरिया नाव ही है.
दूसरी तस्वीर मनेर के हल्दी छपरा की है, जहां सूर्य मंदिर के पास बनी यज्ञशाला बाढ़ के पानी में डूब गई है. मंदिर के निचले हिस्से में पानी भर गया है और सरकारी इमारतें भी जलमग्न हो गई हैं. गंगा के जलस्तर में फिर से बढ़ोतरी होने से बाढ़ पीड़ित डरे हुए हैं. प्रशासन ने न तो उनके लिए नावों का इंतजाम किया है और न ही उनकी देखभाल करने वाला कोई है. दर्जनों घर पानी में डूबे हुए हैं और बाढ़ पीड़ित राहत सामग्री का इंतजार कर रहे हैं.
बेतिया मुख्य सड़क दो फीट पानी में डूबा
बेतिया के नौतन में मंगलपुर गुड़रिया वार्ड नंबर 6 पिछले सात दिनों से बाढ़ की चपेट में है. बाढ़ के पानी ने दर्जनों घरों को अपनी चपेट में ले लिया है और मुख्य सड़क का दो किलोमीटर का हिस्सा दो फीट पानी में डूबा हुआ है. बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि इस एक हफ्ते की मुश्किल घड़ी में कोई भी उनका हाल-चाल जानने नहीं आया. उन्होंने दूसरों के घरों में शरण ली है और उन्हें कोई राहत सामग्री भी नहीं मिल रही है. कई लोग अपने मवेशियों के साथ ऊंचे इलाकों में चले गए हैं. पीड़ितों को इस बात पर हैरानी है कि इस आपदा के दौरान न तो स्थानीय विधायक और न ही मुखिया ने इलाके का दौरा किया है.
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वहीं, नौतन के भारती तेलुआ टोला का सड़क संपर्क टूट गया है, जिससे दर्जनों गांवों में आवागमन ठप हो गया है. इलाके की पक्की सड़क बाढ़ के पानी से क्षतिग्रस्त हो गई है. लगभग सात फीट चौड़ा हिस्सा ढह गया है और पानी तेज बहाव के साथ बह रहा है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि कल उन्होंने ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (BDO) को वीडियो कॉल के जरिए क्षतिग्रस्त सड़क दिखाई थी और उन्हें आश्वासन दिया गया था कि अधिकारी एक घंटे के भीतर पहुंच जाएंगे, लेकिन कोई नहीं आया. दर्जनों गांवों के लिए इस महत्वपूर्ण जीवन-रेखा के नष्ट होने के बावजूद, अधिकारियों की उदासीनता के कारण सड़क की मरम्मत नहीं हो पाई है.
छपरा से राकेश कुमार सिंह, दानापुर से इश्तेयाक खान और बेतिया धनंजय द्विवेदी की रिपोर्ट