अमेरिका से लेकर ऑस्ट्रेलिया तक फैली भागलपुर की मंजूषा कला की ख्याति, राष्ट्रपति ने भी इस वर्ष बढ़ाया इसका मान
Bhagalpur News: भागलपुर की मंजूषा कला अब देश ही नहीं विदेश में भी अपनी ख्याती दिखा रहा है. इस छठ पूजा को लेकर अमेरिका से 200 सूपों के ऑर्डर आया हैं, तो वहीं ऑस्ट्रेलिया में भी इसकी मांग हो रही है.
Bhagalpur News: बिहार के भागलपुर की मंजूषा कला अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छाप छोड़ रही है. अंगप्रदेश की इस पारंपरिक लोककला से सजे छठ के सूपों की मांग अमेरिका तक पहुंच गई है. अमेरिका से 200 सूपों के ऑर्डर मिले हैं, जबकि ऑस्ट्रेलिया में भी मांग को लेकर बातचीत जारी है. खास बात यह है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के मंजूषा कला से सजी साड़ी पहने के बाद इस लोककला को नई पहचान मिली. अब छठ महापर्व इसे विदेशों तक पहुंचाने का नया जरिया बन रहा है. मंजूषा गुरु मनोज पंडित और उनकी टीम इन दिनों सूपों पर अपनी कूची से लोककला के रंग तराशने में जुटी है. भगवान सूर्य की आकृति, कमल के फूल और छठ की परंपराओं को दर्शाती कलाकृतियां इन सूपों को खास बना रही हैं.
जितना सुंदर दिखता है, उतनी ही मेहनत है
छठ महापर्व के नजदीक आने के बाद तैयारियों को लेकर भागलपुर में मंजूषा कला के कलाकारों की व्यस्तता बढ़ गई है. कोई सूप पर भगवान सूर्य की आकृति बना रहा है, तो कोई कमल और दूसरे फूलों की खूबसूरत डिजाइन तैयार कर रहा है. साधारण सूप पर कूची चलाकर उसे आकर्षक कलाकृति में बदलने का यह काम जितना सुंदर दिखता है, उतनी ही मेहनत है. हर रेखा और हर रंग को बनाने में कलाकारों को घंटों लगते हैं. इन कलाकृतियों में छठ की आस्था के साथ अंगप्रदेश की सांस्कृतिक विरासत की झलक भी दिखाई देती है. मंजूषा कला की अपनी अलग शैली और पहचान है. इसमें मुख्य रूप से गुलाबी, हरे और पीले रंगों का इस्तेमाल किया जाता है. इन्हीं रंगों के सहारे कलाकार सूपों पर पारंपरिक आकृतियों को बना रहे हैं.
अमेरिका से 200 सूपों का ऑर्डर
छठ महापर्व में सूर्य उपासना का विशेष महत्व है. इसी ध्यान में रखकर सूपों पर भगवान सूर्य की आकृतियां बनाई जा रही हैं. इस बार मंजूषा कला से सजे सूपों की मांग स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं है. अमेरिका से 200 सूपों के ऑर्डर मिलना इस लोककला के बढ़ते दायरे को दर्शाता है. ऑस्ट्रेलिया से भी ऑर्डर को लेकर बातचीत चल रही है. इसके अलावा देश के अलग-अलग राज्यों से भी इसकी मांग आ रही है. मंजूषा गुरु मनोज पंडित और उनकी टीम इन ऑर्डरों को पूरा करने में लगी है. कलाकारों के लिए यह अपनी कला को नए लोगों तक पहुंचाने का अवसर है. साथ ही, उनके सामने चुनौती यह भी है कि समय पर सभी सूप तैयार करते हुए उनकी पारंपरिक खूबसूरती और कलात्मक बारीकियों को बरकरार रखा जाए.
राष्ट्रपति को मंजूषा कला से सजी साड़ी भेंट की
मंजूषा कला को नई पहचान मिलने की कहानी में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से हुई मुलाकात भी अहम रही. करीब पांच महीने पहले मंजूषा गुरु मनोज पंडित ने राष्ट्रपति को मंजूषा कला से सजी साड़ी भेंट की थी, जिसे राष्ट्रपति ने धारण किया था. इसके बाद इस पारंपरिक कला को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ी और इसकी चर्चा भी तेज हुई. अब छठ के सूपों के जरिए कलाकार इस पहचान को और आगे ले जाने की कोशिश कर रहे हैं.
रिपोर्ट: अश्वनी कुमार