बाढ़ से उबरा पूर्वी चंपारण: DM सुमन सौरभ यादव ने ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों को दिया सफलता का श्रेय
पूर्वी चंपारण में बाढ़ का असर अब कब होने लगा है. इस सफलता का श्रेय DM सुमन सौरभ यादव ने ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों को दिया है. उन्होंने कहा कि यह आपदा बेहद चुनौतीपूर्ण थी, लेकिन हमारे अधिकारियों की त्वरित कार्रवाई, पूर्वी चम्पारण की जनता के धैर्य और सहयोग के कारण हम कम से कम नुकसान के साथ इस संकट से बाहर आने में सफल रहे.
भीषण बाढ़ की आपदा से पूर्वी चम्पारण जिला अब लगभग उबर चुका है. गंडक नदी का जलस्तर करीब चार फीट नीचे चला गया है. मोतिहारी में आई इस प्राकृतिक आपदा पर विजय पाने में स्थानीय जनता, वर्तमान और पूर्व जनप्रतिनिधियों, जिला प्रशासन की मुस्तैदी और सभी ग्रामीणों के अभूतपूर्व सहयोग ने एक मिसाल कायम की है. जी न्यूज ने जब मोतिहारी के जिलाधिकारी सुमन सौरभ यादव से सवाल किया कि बाढ़ की इस त्रासदी में जान-माल की कोई क्षति न होने का श्रेय आप किसको देना चाहेंगे?, तो जिलाधिकारी ने कहा- 'इसका श्रेय सबसे पहले ग्रामीणों को जाता है, फिर पूर्व और वर्तमान जनप्रतिनिधियों को और अंत में प्रशासन को, जिन्होंने चंपारण तटबंध को टूटने से बचाया और जहाँ कहीं भी दरारें आईं, वहां खुद मजदूर बनकर प्रशासन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग किया.'
'ग्रामीणों ने खुद आगे बढ़कर राहत दलों का मार्गदर्शन किया'
जिलाधिकारी ने आगे कहा कि सभी के बीच के इस मजबूत तालमेल ने न केवल मोतिहारी की हजारों जिंदगियों को सुरक्षित बचाया, बल्कि राहत और पुनर्वास कार्यों को भी रिकॉर्ड समय में धरातल पर उतारा है. बाढ़ की दस्तक होते ही जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में स्थानीय प्रशासन चौबीसों घंटे सुरक्षा और निगरानी जैसे कार्यों में जुट गया. NDRF और SDRF की मदद से प्रभावित इलाकों से लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया. प्रशासन के इस अभियान को गति तब मिली जब स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों ने खुद आगे बढ़कर राहत दलों का मार्गदर्शन किया और ऊंचे स्थानों पर बने राहत शिविरों के संचालन में पूरी मदद की. प्रशासन द्वारा युद्ध स्तर पर अतिशीघ्र सामुदायिक रसोई (कम्युनिटी किचन) का प्रारंभ कराया गया. इस कार्य में स्थानीय जन-प्रतिनिधियों और आम जनता ने स्वेच्छा से श्रमदान किया, जिससे विश्वास का एक बड़ा सेतु कायम हुआ.
जिलाधिकारी ने ने कहा कि बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन प्रोटोकॉल के अंतर्गत बाढ़ प्रभावित परिवारों को एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और सरकारी व निजी नावों के द्वारा चिह्नित शरणस्थलियों पर पहुंचाया गया. कहीं से भी जान-माल की क्षति की कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई. बाढ़ प्रभावित परिवारों के बीच पॉलीथिन शीट्स का वितरण कराया गया और यह सारे कार्य अत्यंत तीव्र गति से ससमय कराए गए, जिसके कारण किसी भी परिवार को कोई परेशानी नहीं उठानी पड़ी.
महामारी फैलने की हर आशंका को समय रहते किया नाकाम
उन्होंने बताया कि सभी जगहों पर राहत शिविरों के संचालन के साथ-साथ चिकित्सा शिविर भी लगाए गए. पशुधन की सुरक्षा के लिए पशु चिकित्सा शिविर लगाए गए एवं एम्बुलेंट्री वैन के माध्यम से भी पशुओं का इलाज किया गया. चिकित्सा टीमों ने गांवों में कैंप लगाकर महामारी फैलने की हर आशंका को समय रहते नाकाम कर दिया. जलजमाव वाले इलाकों में ब्लीचिंग पाउडर के छिड़काव का काम तेजी से चल रहा है. वाल्मीकि नगर बैराज से छोड़े गए अत्यधिक पानी की वजह से गंडक नदी के तटबंधों पर दबाव बढ़ गया, लेकिन पूर्वी चंपारण जिले के अंतर्गत चंपारण तटबंध सहित अन्य रिंग बांध पूरी तरह से सुरक्षित रहे.
जिले के चार अंचलों- संग्रामपुर, अरेराज, केसरिया और पहाड़पुर के कुल 17 पंचायतों के 27 गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं- संग्रामपुर में 11, अरेराज में 07, केसरिया में 06 और पहाड़पुर की एक पंचायत के 03 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं. लगभग 44,153 की आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई है. बाढ़ के दौरान एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय नागरिकों के सहयोग से 3,500 लोगों को सुरक्षित निकाला गया.
बच्चों और बुजुर्गों पर दिया जा रहा विशेष ध्यान
बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए शुद्ध भोजन और पेयजल की व्यवस्था के अंतर्गत 28 स्थानों को चिह्नित करते हुए सामुदायिक रसोई की व्यवस्था कराई गई, जहां आज दिनांक 1 अक्टूबर 2026 को मध्याह्न तक 48,339 लोगों ने गुणवत्तापूर्ण भोजन ग्रहण किया. पदाधिकारियों द्वारा भोजन की गुणवत्ता की नियमित रूप से जांच की जा रही है. लोगों को भोजन के अतिरिक्त सुबह में चना, गुड़ और केला नाश्ते के रूप में दिया जा रहा है. बच्चों और बुजुर्गों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि उन्हें कोई असुविधा न हो.
'कम से कम नुकसान के साथ बाहर निकलने में सफल रहे'
जिला प्रशासन द्वारा बाढ़ प्रभावितों के बीच अभी तक 9,674 पॉलीथिन शीट्स का वितरण किया गया है. बाढ़ प्रभावित लोगों के सहयोग के लिए 13 चिकित्सा शिविर लगाए गए हैं, जहां सभी आवश्यक दवाइयां उपलब्ध हैं. मेडिकल टीम द्वारा लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है एवं आवश्यकतानुसार दवाइयां भी दी जा रही हैं.
पूर्वी चम्पारण के जिलाधिकारी सुमन सौरभ यादव ने जिले के नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा- यह आपदा बेहद चुनौतीपूर्ण थी, लेकिन हमारे अधिकारियों की त्वरित कार्रवाई और पूर्वी चम्पारण की जनता के धैर्य व सहयोग के कारण हम कम से कम नुकसान के साथ इस संकट से बाहर आने में सफल रहे. यह जीत सामूहिक प्रयास और प्रशासनिक सजगता की एक बेहतरीन मिसाल है.'
रिपोर्ट: पंकज कुमार