बिहार अपनी अनोखी परंपरा, संस्कृति और धार्मिक आस्था के लिए पूरे देश में फेमस है. छठ पूजा की चर्चा तो वैश्विक स्तर पर की जाती है. वहीं, बात जब दुर्गा पूजा की हो, तो राज्य के कोने-कोने में मां दुर्गा की आराधना का एक अलग ही उत्साह दिखाई देता है, ठीक वैसे ही जैसे कोलकाता में. इस सांस्कृतिक प्रभाव का असर बिहार के कई गांवों के नामों पर भी साफ तौर पर भी देखने को मिलता है. क्या आप जानते हैं कि बिहार में 'दुर्गापुर' नाम के कितने गांव हैं? नहीं, तो आइए जानते हैं-
भारत के राजस्व विभाग और भूमि रिकॉर्ड्स के आंकड़ों के अनुसार, बिहार के कई जिलों में दुर्गापुर नाम के लगभग 20 गांव और छोटे-छोटे टोले दर्ज हैं. बता दें कि दुर्गा शब्द हिंदू आस्था और शक्ति की देवी का प्रतीक है, इसलिए ग्रामीण इलाकों में बस्तियों, टोलों और गांवों के नाम देवी-देवताओं के नाम पर रखने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. समय के साथ इनमें से कई बस्तियां स्वतंत्र राजस्व ग्राम के रूप में स्थापित हो चुकी हैं, तो कुछ आज भी टोलों के रूप में जानी जाती हैं.
यह नाम सिर्फ छोटे गांवों या टोलों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पंचायती राज विभाग के अंतर्गत राज्य में चार पूर्ण विकसित ग्राम पंचायतें हैं, जिनका नाम भी दुर्गापुर है. इन पंचायतों के अंतर्गत कई छोटे गांव और वार्ड आते हैं. दुर्गा पूजा और शक्ति उपासना का विशेष प्रभाव होने के कारण पूर्णिया प्रमंडल और कोसी क्षेत्र में दुर्गापुर नाम सबसे अधिक देखने को मिलता है.
पूर्णिया में भवानीपुर प्रखंड क्षेत्र के अंतर्गत दुर्गापुर नाम से बसा गांव भी मशहूर है. किशनगंज में कोचाधामन प्रखंड क्षेत्र में भी दुर्गापुर बसा हुआ है. वहीं, कटिहार, अररिया और मधेपुरा जिलों के कई ग्रामीण अंचलों में भी दुर्गापुर गांव और टोलों की अच्छी खासी संख्या देखने को मिलती है. बिहार के इन दुर्गापुर गांवों में हर साल नवरात्र के अवसर पर एक अलग ही रौनक देखने को मिलती है. मां दुर्गा के पंडाल सजते हैं और स्थानीय लोग श्रद्धा के साथ मां की आराधना करते हैं.