3 दिनों तक रखा डिजिटल अरेस्ट: पटना के रिटायर्ड इंजीनियर से साइबर ठगों ने ठगे 33 लाख, रात भर सोने तक नहीं दिया
पटना में एक रिटायर्ड एक रिटायर्ड असिस्टेंट इंजीनियर के साथ साइबर ठगी का मामला सामने आया है. साइबर ठगों ने रिटायर्ड असिस्टेंट इंजीनियर तो तीन दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा. इसके बाद 500 करोड़ रुपए के घोटाले में नाम जेल जाने की धमकी देकर 33 लाख रुपए ठग लिए.
बिहार के पथ निर्माण विभाग से रिटायर्ड एक असिस्टेंट इंजीनियर हाल ही में एक बड़े साइबर फ्रॉड का शिकार हो गए. पटना के पीरबहोर क्षेत्र में रहने वाले इस रिटायर्ड अधिकारी को शातिर साइबर अपराधियों ने डरा-धमकाकर 3 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखा. इतनी ही नहीं, उनसे 33.83 लाख रुपए ऐंठ लिए. मिली जानकारी के अनुसार, साइबर ठगों ने इस पूरी साजिश को रचने के लिए 500 करोड़ रुपए के घोटाले और जेट एयरवेज के पूर्व चेयरमैन नरेश गोयल के नाम का इस्तेमाल किया, जिससे पीड़ित बुरी तरह घबरा गए थे. चलिए इस आर्टिकल में पूरा मामला जानते हैं.
फर्जी सिम कार्ड से हुई शुरुआत
दरअसल, पूरी वारदात की शुरुआत 27 सितंबर, 2026 की सुबह करीब 11 बजकर 30 मिनट हुई, जब रिटायर्ड असिस्टेंट इंजीनियर के व्हाट्सएप पर एक अज्ञात नंबर (9282926698) से फोन आया. कॉल करने वाले ने बेहद सख्त लहजे में दावा किया कि मुंबई के तिलक नगर स्थित एयरटेल स्टोर से 17 अगस्त, 2026 को पीड़ित के नाम पर एक फर्जी सिम कार्ड जारी किया गया है. इस पर जब रिटायर्ड इंजीनियर ने कहा कि उन्होंने ऐसा कोई सिम नहीं खरीदा है, तो साइबर ठगों ने उन्हें कानूनी कार्रवाई और मुंबई पुलिस में एफआईआर का डर दिखाया. मामला सुलझाने का झांसा देकर रिटायर्ड असिस्टेंट इंजीनियर को एक दूसरे नंबर पर संपर्क करने को कहा गया.
पुलिस और सीबीआई का फर्जी नेटवर्क
रिटायर्ड असिस्टेंट इंजीनियर ने जब दिए गए नंबर पर कॉल किया, तो सामने वाले व्यक्ति ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का सिपाही प्रदीप सावंत बताया. थोड़ी ही देर में एक और फोन आया, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को सीबीआई का सीनियर ऑफिसर राकेश कुमार बताया। राकेश कुमार ने रिटायर्ड असिस्टेंट इंजीनियर पर मानसिक दबाव बनाते हुए कहा कि 500 करोड़ रुपए के बैंक घोटाले का आरोपी नरेश गोयल पुलिस की गिरफ्त में है. गोयल के पास से 247 एटीएम कार्ड बरामद हुए हैं, जिनमें से एक कार्ड आपके नाम पर है.
फर्जी कागजात भेजे गए
आरोपी के पास रिटायर्ड असिस्टेंट इंजीनियर का आधार कार्ड भी मिला है और उसने कबूल किया है कि घोटाले की रकम का 10 फीसदी यानी 20 लाख रुपए आपको दिया गया है. उनके नाम वाले खाते से करीब 40 बार संदिग्ध लेन-देन हुआ है. मिली जानकारी के अनुसार, रिटायर्ड असिस्टेंट इंजीनियर का विश्वास जीतने के लिए फर्जी कागजात भेजे गए.
ठगों की हर बात मानने को मजबूर हो गए
हालांकि, शुरुआत में रिटायर्ड असिस्टेंट इंजीनियर ने अपनी बैंकिंग जानकारी देने से मना कर दिया था। मगर, उनका भरोसा जीतने के लिए शातिरों ने व्हाट्सएप पर पुलिस वर्दी वाली तस्वीरें, फर्जी पुलिस पहचान पत्र और सुप्रीम कोर्ट के नाम का एक फर्जी पत्र भेज दिया. कागजात देखकर वह बुरी तरह डर गए और ठगों की हर बात मानने को मजबूर हो गए.
3 दिन का डिजिटल अरेस्ट
इसके बाद साइबर ठगों ने रिटायर्ड असिस्टेंट इंजीनियर को लगातार 3 दिनों तक फोन और वीडियो कॉल पर बनाए रखा गया. रात-रात भर सोने नहीं दिया गया और हर समय मोबाइल को चार्जर से जोड़कर रखने की हिदायत दी गई, ताकि संपर्क न टूटे. बैंक के खातों के सत्यापन और जांच के नाम पर बैंक बैलेंस ट्रांसफर करने को कहा गया. डर के माहौल में रिटायर्ड असिस्टेंट इंजीनियर ने दो अलग-अलग खातों से कुल 33,83,224.20 रुपये ट्रांसफर कर दिए.
33.83 लाख का ट्रांसफर
पहला ट्रांजेक्शन इंडियन बैंक खाते से आरटीजीएस के जरिए हाइलेक्सी फाउंडेशन के खाते में 22,86,477 रुपये भेजे गए. जबाकि, दूसरा ट्रांजेक्शन एसबीआई खाते से 10,96,747.20 रुपये दूसरे बताए गए खाते में ट्रांसफर किए गए.
रिटायर्ड असिस्टेंट इंजीनियर ने दर्ज कराई शिकायत
साइबर ठगों ने दावा किया था कि जांच पूरी होते ही तीन दिनों के भीतर पूरी रकम वापस खाते में भेज दी जाएगी, लेकिन तय समय बीत जाने के बाद जब न तो पैसे लौटे और ठगों के सभी नंबर बंद हो गए तब पीड़ित को अहसास हुआ कि वे किसी साइबर गैंग का शिकार बन चुके हैं. अब रिटायर्ड असिस्टेंट इंजीनियर ने इस मामले की लिखित शिकायत साइबर थाने के साथ-साथ राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज कराई है. फिलहाल, पुलिस दिए गए फोन नंबरों और बैंक खातों के आधार पर मामले की जांच कर रही है.