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Pappu Yadav: छपरा के तरैया और पानापुर के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करने पहुंचे पूर्णिया सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने बिहार सरकार और बाढ़ नियंत्रण व्यवस्था पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि बाढ़ ने केवल छपरा ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार को प्रभावित किया है. केंद्र सरकार को बिहार की बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करते हुए 5 हजार करोड़ रुपये का विशेष पैकेज देना चाहिए. पप्पू यादव ने कहा कि बाढ़ से गन्ना, मक्का और धान समेत किसानों की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है. किसानों का ऋण माफ किया जाना चाहिए. उन्होंने बाढ़ में हुए नुकसान का मुआवजा देने की भी मांग की. उन्होंने कहा कि कच्चे मकान के लिए दो लाख रुपये और पक्के मकान के लिए 10 लाख रुपये तक की सहायता राशी दी जानी चाहिए.
सिंचाई मंत्री के उस बयान पर भी उठाया सवाल
पूर्णिया सांसद ने सिंचाई मंत्री के उस बयान पर भी सवाल उठाया, जिसमें बाढ़ और बांध टूटने के कारणों को लेकर नासा के आंकड़ों का हवाला दिया गया था. पप्पू यादव ने कहा कि नासा के लोग यहां बांध बनाने नहीं आए थे. बांध का निर्माण स्थानीय अधिकारियों और एजेंसियों ने कराया है, इसलिए इसकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए. उन्होंने फ्लड फाइटिंग के कार्यों पर भी गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि कई जगहों पर बालू की जगह मिट्टी भरकर काम किया गया और इस पूरी व्यवस्था में अरबों रुपये का घोटाला हुआ है. उन्होंने यह भी कहा कि बांध निर्माण और फ्लड फाइटिंग से जुड़े ठेकेदारों और अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए.
टेंडर प्रक्रिया की जांच और कार्रवाई की मांग
पप्पू यादव ने श्रीराम और एसपी सिंघला जैसी एजेंसियों को लगातार टेंडर मिलने की प्रक्रिया की भी जांच की मांग की. पप्पू यादव ने कहा कि इन एजेंसियों और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए तथा जरूरत पड़ी तो वह इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे. संसद में बाढ़ का मुद्दा उठाने के सवाल पर पप्पू यादव ने कहा कि छपरा सुरक्षित नहीं है और यहां की स्थिति बेहद गंभीर है. उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे को संसद में मजबूती से उठाएंगे और किसी को बख्शा नहीं जाएगा.
लापरवाही और भ्रष्टाचार पर कार्रवाई की मांग
उन्होंने कहा कि वे किसी से डरने वाले नहीं हैं. सरकार में बैठे लोग हों या अधिकारी, अगर कहीं लापरवाही और भ्रष्टाचार हुआ है तो उसकी जांच और कार्रवाई होनी चाहिए. पप्पू यादव ने कहा कि बाढ़ से हुई तबाही की उच्चस्तरीय जांच कराकर जिम्मेदार अधिकारियों, ठेकेदारों और एजेंसियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा पैदा न हो.
रिपोर्ट: राकेश कुमार सिंह