बिहार में बेटियों की सुरक्षा पर घिरे CM सम्राट चौधरी: बांका-समस्तीपुर में दरिंदगी का तांडव, जमुई की पीड़िता की पहचान उजागर होने पर मचा बवाल
बिहार के बांका और समस्तीपुर में बीच सड़क पर बेटियों के सम्मान को रौंदने वाले दुःशासनों के पाप का साक्ष्य सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा जा सकता है. किस तरह से बीच सड़क पर भीड़ की शक्ल में बेटियों की मर्यादा तार-तार की जा रही है.
महिला सुरक्षा और बेटियों के सम्मान पर संवेदनहीन सोच को लेकर उठ रहे सवालों पर बिहार सरकार को कोई तर्कपूर्ण जवाब नहीं सूझ रहा है बिहार में पिछले चार दिनों के भीतर बेटी-विरोधी और घिनौनी सोच से जुड़ी ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं, जो राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर रही हैं बेटियों के सम्मान को कलंकित करने वाली इन घटनाओं से सरकार की नीयत और नीति दोनों पर सवाल उठ रहे हैं
बांका और समस्तीपुर में बीच सड़क पर बेटियों के सम्मान को रौंदने वाले दुःशासनों के पाप का साक्ष्य वायरल वीडियो में देखाई दिया. बीच सड़क पर भीड़ की शक्ल में बेटियों की मर्यादा तार-तार की जा रही है एक सभ्य समाज के रूप में शर्मसार करने वाली इन घटनाओं की पूरी जानकारी हम आपको आगे देंगे, लेकिन सबसे पहले बात शीर्ष पर बैठे उस व्यक्ति की, जिनकी जिम्मेदारी बेटियों की रक्षा और उनका संरक्षण करना है. मगर, धरातल पर जो असली तस्वीर दिख रही है, वह घोर संवेदनहीनता है.
महाभारत के शांति पर्व में महर्षि वेदव्यास ने लिखा है कि राजा की उत्पत्ति दुःखी, पीड़ित और असहाय लोगों की रक्षा करने के लिए हुई है, न कि उन्हें संताप और कष्ट देने के लिए. बिहार के प्रशासनिक प्रमुख के तौर पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर इसी मर्यादा के उल्लंघन और अनदेखी का गंभीर आरोप लगा है उन्होंने कुछ ऐसा किया है जिसने पीड़ित बेटी को सांत्वना और संबल देने के बजाय उसके संताप को और बढ़ा दिया
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जो तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की, उसमें पीड़िता और उसके परिवार की पहचान गोपनीय नहीं रखी गई बिना चेहरा ढके ही पूरे परिवार की तस्वीर पोस्ट कर दी गई, जिसके जमुई की घटना को लेकर मुख्यमंत्री पर संवेदनहीनता का आरोप लगा है
एक दिन पहले ही मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी यह विवादित बयान दे चुके हैं कि रील बनाओगे तो ऐसे ही पकड़े जाओगे इस गैर-जिम्मेदाराना बयान पर उठे सवालों का सिलसिला अभी थमा भी नहीं था कि पीड़िता की पहचान उजागर करने वाली तस्वीर सामने आ गई शायद अपने बयान से हुए नुकसान की भरपाई के लिए मुख्यमंत्री ने यह तस्वीर पोस्ट की होगी, लेकिन इसे भूल कहें, जल्दबाजी कहें या संवेदनहीनता कि पीड़िता की पहचान तक नहीं छिपाई गई वहीं, गलती का अहसास होने पर पोस्ट सोशल मीडिया से हटा दी गई, लेकिन तब तक नुकसान हो चुका था हजारों लोग मुख्यमंत्री की इस पोस्ट को देख चुके थे
सोचिए, महज 12 मिनट के भीतर इस पोस्ट को 821 लाइक, 101 कमेंट और 32 शेयर मिल चुके थे कई लोग पीड़ित परिवार की पहचान से अवगत हो गए इस असावधानी और संवेदनहीनता से पीड़ित परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा को जो आघात पहुंचा है, उसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता पहले सड़क पर दुःशासनों ने बेटी की मर्यादा भंग करने का प्रयास किया और फिर सोशल मीडिया पर पीड़ित परिवार की प्रतिष्ठा हरण का पाप हुआ
मुख्यमंत्री ने पोस्ट भले डिलीट कर दी हो, लेकिन विधिक चूक हो चुकी थी आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस मुद्दे पर कानून की याद दिलाई और बताया कि मुख्यमंत्री का यह कृत्य कानून की नजर में अपराध है विपक्ष इसे अपराध क्यों बता रहा है, इसे भी समझिए. जमुई की पीड़ित बच्ची नाबालिग है, इसलिए इस मामले में पॉक्सो अधिनियम (POCSO Act, 2012) लागू होता है
पॉक्सो एक्ट की धारा 23(2)
किसी भी मीडिया रिपोर्ट या सार्वजनिक मंच पर पीड़ित का नाम, तस्वीर, पता, परिवार, विद्यालय या ऐसी कोई भी जानकारी साझा करने पर रोक लगाती है जिससे उसकी पहचान उजागर हो
धारा 23(4)
इसका उल्लंघन करने पर 6 महीने से 1 साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है
किशोरावस्था न्याय अधिनियम की धारा 74
यह भी अपराध पीड़ित बच्चे की पहचान या तस्वीर प्रकाशित करने को प्रतिबंधित करती है इसके उल्लंघन पर 6 महीने तक की कैद, 2 लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं
बेटी से बदसलूकी: सीएम ने पहचान नहीं छिपाई
दरअसल, यह देश का कानून है और कानून में पद या प्रतिष्ठा के आधार पर कोई अपवाद नहीं होता किसी भी नेता, सामाजिक कार्यकर्ता या नागरिक को उसकी मंशा के आधार पर विधिक छूट नहीं मिल सकती यही कारण है कि विपक्ष इसे महज चूक नहीं, बल्कि कानूनी अपराध बता रहा है और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है आरजेडी नेता मीसा भारती मुख्यमंत्री के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कराने के लिए पटना के सचिवालय थाने पहुंचीं, हालांकि पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करने से इनकार कर दिया वहीं, पीड़ित परिवार की पहचान उजागर करने के मामले में पुलिस ने मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में कार्यरत आशुलिपिक सागर प्रसाद के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है पुलिस की प्राथमिक जांच के अनुसार, सागर प्रसाद ने ही पीड़ित परिवार की तस्वीर सोशल मीडिया पर अपलोड की थी
जमुई - समस्तीपुर - बांका
यह केवल किसी एक स्थान की घटना नहीं है जमुई के बाद पिछले 24 घंटों में बांका और समस्तीपुर से बेटियों की मर्यादा भंग करने वाली विकृत मानसिकता के नए साक्ष्य सामने आए हैं समस्तीपुर में 24 घंटे के भीतर दूसरी शर्मनाक घटना सामने आई है 52 सेकेंड के इस वायरल वीडियो में स्कूटी सवार छात्र-छात्रा को 8 से 10 युवकों की भीड़ घेर लेती है लड़की हाथ जोड़कर छोड़ देने की गुहार लगाती है, लेकिन उपद्रवियों का दिल नहीं पसीजता
छात्रा: 'मेरे अभिभावक से बात कर लीजिए ना, सबको जानकारी है... कुछ गलत करेंगे तब बोलिएगा ना...'
युवक: 'आप कैसे तय करेंगी कि हम गलत कर रहे हैं...'
तेज बारिश के बीच सड़क पर अभद्रता होती रही छात्रा रोती रही, हाथ जोड़ती रही, लेकिन मनचले बेखौफ रहे वे सीना ठोककर कहते रहे कि तुम्हारा वीडियो वायरल करेंगे, तुम दोनों की शादी करवाएंगे उपद्रवियों में न कानून का भय था, न किसी कार्रवाई का खौफ
बेटियों से बेरहमी की दूसरी घटना बांका से आई है बांका के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मंदार पर्वत पर 6 असामाजिक तत्वों ने एक युवती को घेर लिया उसके साथ अमर्यादित व्यवहार किया गया और चप्पल से पिटाई की गई आरोपी खुलेआम दबंगई दिखाते रहे जब इस अभद्रता का वीडियो वायरल हुआ, तब जाकर पुलिस प्रशासन की नींद खुली और मामला दर्ज किया गया
वहीं, रात के अंधेरे में खगड़िया के चित्रगुप्त नगर में पुलिस निरीक्षक बल-प्रयोग की चेतावनी देते हुए एक महिला को धमकाने पहुंचे थे यानी जिस पुलिस को अपराधी चुनौती दे रहे हैं, वही पुलिस आम नागरिकों और महिलाओं पर अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर रही है इसे व्यवस्था की लाचारगी कहें या दंभ, यह आप स्वयं तय कीजिए.