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बीजेपी को तय करना होगा कि राजपूत नेताओं की बात कितनी अहमियत रखती है, राजीव प्रताप रूढ़ी का छलका दर्द

भाजपा के सारण से सांसद राजीव प्रताप रूढ़ी का कहना है कि बिहार में राजपूत नेता किसी की बात पर भरोसा नहीं करते और अभी वैसा कोई माहौल भी नहीं है. NDA प्रत्याशी की हार पर जताया दुख.

Reported By Zee Bihar Network Edited By Sunil Mishra
Published: Nov 03, 2026, 03:22 PM IST | Updated: Nov 03, 2026, 03:35 PM IST
Image Credit: राजीव प्रताप रूड़ी, सारण के सांसद (Video Grab)
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बिहार की राजनीति में राजपूत समाज की हिस्सेदारी और राजनीतिक हैसियत को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं. एनडीए के भीतर राजपूत नेताओं की भूमिका और उनके प्रभाव को लेकर दिए गए सांसद राजीव प्रताप रूड़ी के एक बयान ने राजनीतिक बहस को नया मुद्दा दे दिया है. बयान में साफ तौर पर राजपूत समाज की कथित राजनीतिक उपेक्षा और नेताओं की घटती स्वीकार्यता का सवाल उठाया गया है. रूड़ी ने कहा कि हम सभी एनडीए का हिस्सा हैं और गठबंधन के प्रत्याशी को जिताने के लिए पूरी मेहनत की गई थी. दुख है कि जदयू प्रत्याशी चुनाव नहीं जीत सके. उन्होंने प्रत्याशी को एक सुलझा हुआ व्यक्ति बताते हुए कहा कि उनकी हार दुखद है.

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राजीव प्रताप रूड़ी ने कहा, 'आपका यह कहना कि मैं एक प्रत्याशी जो अभी जीत गया है और आपका आरोप लगाना कि आप ठाकुर हैं, राजपूत समाज के हैं और आपने उनको संरक्षण दिया. अगर रूड़ी जी चाहते तो वे बैठ जाते. साहब आज किसी भी राजपूत को बिहार में किसी भी नेता पर भरोसा नहीं है. आपको क्या लगता है कि बीजेपी किसी राजपूत को इतना महत्व दे रही है कि उसकी किसी बात को कहने पर कोई और बात मान ले. भारतीय जनता पार्टी को तय करना होगा कि सिग्रीवाल साहब के कहने पर या रूड़ी जी के कहने पर कोई राजपूत नेता मान जाएगा, ऐसी स्थिति तो अभी नहीं है.'

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'आज बिहार में किसी भी राजपूत को किसी नेता पर कोई भरोसा नहीं है. आपको क्या लगता है कि भाजपा किसी राजपूत को इतना महत्व दे रही है कि उसके कहने पर कोई दूसरा अपनी उम्मीदवारी छोड़ देगा?'

उन्होंने आगे कहा कि यह भारतीय जनता पार्टी को तय करना होगा कि किसी प्रत्याशी को बैठाने के मामले में किस नेता की बात को कितनी अहमियत दी जाती है. बिहार में किसी राजपूत नेता के कहने मात्र से दूसरा राजपूत प्रत्याशी अपना चुनावी दावा छोड़ देगा, ऐसी स्थिति अभी नहीं है.

राजीव प्रताप रूड़ी ने इस बयान के जरिए राजपूत समाज की राजनीतिक उपेक्षा, नेतृत्व के प्रभाव और गठबंधन के भीतर समाज की वास्तविक भागीदारी को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं. खास बात यह है कि यह सवाल विपक्ष की ओर से नहीं, बल्कि एनडीए के भीतर से उठाया गया है.

छपरा से राकेश की रिपोर्ट

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