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'PM की कुर्सी विरासत में नहीं मिलती, राहुल गांधी पहले अपने राजनीतिक अतीत का हिसाब दें': जयराम विप्लव

बीजेपी प्रवक्ता जयराम विप्लव ने राहुल गांधी पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार के ‘सुपर PM’ राहुल गांधी और उनकी पार्टी का रिकॉर्ड भरोसे लायक नहीं हैं, तभी वोट नहीं मिलता.

'PM की कुर्सी विरासत में नहीं मिलती, राहुल गांधी पहले अपने राजनीतिक अतीत का हिसाब दें': जयराम विप्लव
Image Credit: भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया पैनलिस्ट सह प्रदेश प्रवक्ता जयराम विप्लव (जी मीडिया)

भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया पैनलिस्ट सह प्रदेश प्रवक्ता जयराम विप्लव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वक्तव्य  'अगर आपको पीएम की कुर्सी पर बैठना है, तो पहले जनता के दिल जीतने पड़ेंगे' का उल्लेख करते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी से उनके राजनीतिक रिकॉर्ड पर सवाल पूछे. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में किसी पद का आधार परिवार या राजनीतिक विरासत नहीं, बल्कि जनता का समर्थन, कार्य और जवाबदेही होनी चाहिए. 2004 से 2014 तक केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार सत्ता में रही. राहुल गांधी उस अवधि में ‘सुपर पीएम’ का पावर एंजॉय करते थे. विदेशी राष्ट्राध्यक्षों से पीएम नहीं राहुल और सोनिया मिलते थे. राहुल गांधी के रिमोट पर चलने वाली सरकार के कामकाज और फैसलों के आधार पर ही जनता ने उनको लगातार रिजेक्ट किया है.

'DBT को जमीन पर लागू करने से किसने रोका था?'

जयराम ने कहा कि यूपीए सरकार के कार्यकाल में 2G स्पेक्ट्रम, कोयला आवंटन और कॉमनवेल्थ गेम्स से जुड़े घोटालों ने सरकार की साख खत्म की और इकोनॉमी को फ़्रेज़ाइल फाइव में ला दिया था . आज राहुल गांधी भ्रष्टाचार पर सवाल उठाते हैं, तो उन्हें यह भी बताना चाहिए कि वो घोटालों के मामलों में बेल ओर क्यों हैं ? जयराम ने कहा कि चार पीढ़ियों से गरीबी हटाने के नारे लगाए जा रहे, लेकिन सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के बजाय जेबों में जाती रही. राजीव गांधी के 85 पैसे वाले चर्चित बयान ने इसी समस्या को देश के सामने स्वीकार किया था. सवाल है कि लंबे समय तक सत्ता में रही कांग्रेस इस खामी को निर्णायक रूप से दूर क्यों नहीं कर सकी? DBT को जमीन पर लागू करने से किसने रोका था?

'अर्थशास्त्रियों की सरकार द्वारा सिर्फ नाकामी ही देखी'

जयराम ने कहा कि मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे, सोनिया गांधी यूपीए की अध्यक्ष थीं और राहुल गांधी कांग्रेस के प्रमुख राजनीतिक चेहरों में शामिल थे. उस दौर में सत्ता के केंद्रों को लेकर लगातार बहस होती रही. आज राहुल गांधी यूपीए सरकार की भ्रष्टाचार, आतंकवाद पर घुटने टेकना, मुस्लिम तुष्टिकरण, महंगाई और बेरोजगारी जैसे गम्भीर नाकामियों की राजनीतिक जिम्मेदारी से कैसे पीछा छुड़ा सकते हैं?  जयराम ने कहा कि यूपीए के दूसरे कार्यकाल में महंगाई और आर्थिक चुनौतियों को लेकर आम लोगों में अविश्वास बढ़ता जा रहा था. आज जनता के मुद्दों पर मुखर राहुल गांधी को पर कोई वोटर कैसे भरोसा करें, जबकि उसने उस समय अर्थशास्त्रियों की सरकार द्वारा सिर्फ नाकामी ही देखी है.

'क्यों UPI का मजाक उड़ाया, क्यों डिजिटल इंडिया पर हंसते थे?'

जयराम ने कहा कि युवाओं को भाषण नहीं, अवसर चाहिए! रोजगार और बेहतर भविष्य हर युवा की अपेक्षा है. राहुल गांधी को बताना चाहिए कि 2004 से 2014 के बीच युवाओं के लिए ऐसा कौन-सा परिवर्तनकारी मॉडल तैयार किया गया, जिसे आज वे देश के सामने अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि के रूप में रख सकें. राहुल गांधी कहते हैं मेरे पिताजी कंप्यूटर क्रांति लेकर आए थे, तो बताओ डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर लागू क्यों नहीं कर पाए ? क्यों UPI का मजाक उड़ाया था ? क्यों डिजिटल इंडिया पर हंसते थे ? जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनधन खातों, आधार और मोबाइल आधारित व्यवस्था के साथ इसके व्यापक विस्तार ने सरकारी सहायता सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने की प्रक्रिया को नई गति दी.  राजीव गांधी के 85 पैसे वाले बयान में सामने आई समस्या के समाधान की दिशा में DBT आज एक उल्लेखनीय उदाहरण है.

'जनता जानना चाहती है कि कांग्रेस ने क्या वादे किए'

जयराम विप्लव ने कहा कि राहुल गांधी के सामने असली चुनौती प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाने की नहीं, बल्कि अपनी पार्टी के लंबे शासनकाल का हिसाब देने की है. जनता जानना चाहती है कि कांग्रेस ने क्या वादे किए, उनमें से कितने पूरे किए और देश की समस्याओं के समाधान के लिए कौन-सा स्थायी मॉडल दिया. जयराम विप्लव कहा कि नाम से राजनीतिक पहचान मिल सकती है, लेकिन जनादेश काम और विश्वास से मिलता है. प्रधानमंत्री की कुर्सी विरासत में नहीं मिलती. राहुल गांधी को दोबारा जनता से समर्थन मांगने से पहले अपने राजनीतिक अतीत का हिसाब देना चाहिए.

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About the Author

Ranjana Kumari

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रंजना कुमारी Zee Bihar Jharkhand की डिजिटल टीम में बतौर Sub-Editor अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं. बिहार के सिवान जिले के जीरादेई से ताल्लुक रखने वाली रंजना स्थानीय और जमीनी मुद्दों पर गहरी पकड़ रखती हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में वे मुख्य रूप से राजनीति, क्राइम, यूटिलिटी और देश-दुनिया की अहम रूटीन खबरों को प्रमुखता से कवर करती हैं. Zee Media का हिस्सा बनने से पहले रंजना ने न्यूज इंडिया 24x7 में भी डेढ़ साल तक अपनी सेवाएं दी थीं. एकेडमिक की बात करें तो रंजना GJU से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर रही हैं.
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