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बगावत के खिलाफ बड़ी कार्रवाई: भाजपा ने प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य राहुल कुमार सिंह समेत 2 नेताओं को 6 साल के लिए निकाला

इसमें कोई दोराय नहीं कि भारतीय जनता पार्टी में अनुशासन को तवज्जो दी जाती रही है. वहां नेतृत्व को आंख दिखाने वालों को बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है. हालांकि, दरभंगा में आदित्य कुमार झा के खिलाफ कार्रवाई न करना चौंका रहा है. देखना है कि उनकी बगावत को पार्टी कैसे लेती है.

Reported By Zee Bihar Network Edited By Sunil Mishra
Published: Oct 13, 2026, 12:23 PM IST | Updated: Oct 13, 2026, 12:42 PM IST
Image Credit: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और प्रदेश अध्ययक्ष संजय सरावगी (File Photo)
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बिहार विधान परिषद चुनाव में एनडीए के दोनों बड़े दल भारतीय जनता पार्टी और जनता दल यूनाइटेड अपने बागी नेताओं से परेशान है. जनता दल यूनाइटेड में तो मान मनौव्वल का दौर चला, जो असफल रहा, लेकिन अब भारतीय जनता पार्टी ने अपने दो नेताओं को पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया. इन दो नेताओं में एक हैं प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य राहुल कुमार सिंह और सिवान के रामेंद्र राय. ये दोनों नेता सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से एनडीए के अधिकृत प्रत्याशी जेडीयू के आनंद पुष्कर के खिलाफ निर्दलीय चुनाव मैदान में थे. इससे पहले उपेंद्र कुशवाहा ने भी सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से बागी उम्मीदवार रामपुकार सिन्हा को पार्टी से निकाल दिया था.

भारतीय जनता पार्टी के बिहार प्रदेश मुख्यालय प्रभारी अक्षय कुमार ने दोनों नेताओं के निलंबन से संबंधित आदेश सोमवार देर शाम जारी किया. भाजपा ने दोनों नेताओं के निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरने को अनुशासनहीनता मानते हुए यह कार्रवाई की है. भाजपा ने इस कदम के जरिये यह संदेश देने की कोशिश की है कि एनडीए के फैसले को चुनौती देना और अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ चुनावी मैदान में कूदने को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

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दोनों नेताओं के निर्दलीय चुनावी मैदान में उतरने से संगठन के भीतर अनुशासन को लेकर सवाल उठ रहे थे. इसके साथ ही जनता दल यूनाइटेड के अधिकृत प्रत्याशी को चुनौती देने से गठबंधन की साख और विश्वसनीयता भी प्रभावित हो रही थी. इसी को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने यह कड़ा कदम उठाया है.

हालांकि, पार्टी के प्रदेश नेतृत्व ने दरभंगा में पार्टी लाइन के खिलाफ ताल ठोकने वाले आदित्य कुमार झा के खिलाफ कोई कार्रवाई अभी तक नहीं की है. देखना यह है कि पार्टी उनके खिलाफ क्या कार्रवाई करती है. भाजपा संगठन के भीतर अनुशासन को तवज्जो दी जाती रही है और पार्टी लगातार कार्यकर्ताओं को अधिकृत प्रत्याशी के पक्ष में काम करने के निर्देश जारी करती रही है.

ए​क दिन पहले ही एनडीए की सहयोगी राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रदेश सचिव और प्रवक्ता रामपुकार सिन्हा को 6 साल के लिए पार्टी से निकाल दिया गया है. उन्होंने सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से एनडीए के अधिकृत उम्मीदवार आनंद पुष्कर के खिलाफ ताल ठोकी है. राष्ट्रीय लोक मोर्चा के 3 विधायकों माधव आनंद, आलोक सिंह और रामेश्वर महतो ने उन्हें अपना समर्थन भी दिया है. अब सवाल उठता है कि क्या राष्ट्रीय लोक मोर्चा अपने इन 3 विधायकों के खिलाफ कार्रवाई करेगी?

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