बिहार MLC चुनाव: बैलेट पेपर से तय होगा नैरेटिव, पास होगा राहुल गांधी का दावा या मोदी मैजिक?
ईवीएम और बैलेट पेपर में वैसे तो मैन्यूअल और टेक्निकल का ही फर्क है, लेकिन राजनीति ने इनमें से एक को सत्तापक्ष का बना दिया और दूसरे को विपक्ष का. हालांकि इतिहास बताता है कि जब आज का सत्तापक्ष कल विपक्ष में था, तब वह भी इसे सरकारी मानता था. यही तो राजनीति है.
बिहार सहित कई राज्यों में आज शुक्रवार को विधान परिषद चुनाव हो रहे हैं. विधान परिषद चुनाव बैलेट पेपर से होते हैं, जिसमें मतदाताओं को प्रथम, द्वितीय और तृतीय वरीयता के वोट डालने होते हैं. पिछले कुछ समय से देश की राजनीति में ईवीएम को लेकर सवाल उठते रहे हैं. विपक्षी दलों का दावा है कि अगर बैलेट पेपर से चुनाव हो तो सरकार हार सकती है, क्योंकि सत्तापक्ष ईवीएम में गड़बड़ी करके चुनाव जीतता आ रहा है. विपक्ष ने इसे वोट चोरी नाम दिया है. दूसरी तरफ, सत्तापक्ष की ओर से कहा जाता है कि पीएम मोदी के नेतृत्व में हम हर चुनाव लड़ते हैं और वे जनता के दिलों में बसते हैं, इसलिए हम चुनाव जीत जाते हैं. दोनों तरफ का अपना नैरेटिव है. विपक्ष का नैरेटिव बैलेट पेपर पर आधारित होते हुए वोट चोरी का माहौल बनाता है तो सत्तापक्ष इसे विपक्ष की हताशा और निराशा बताते हुए दावा करता है कि ईवीएम हो या बैलेट पेपर, एनडीए की अधिकांश जगहों पर जीत होती है.
दशहरा से पहले विपक्ष ने बुलंद की थी आवाज
दिल्ली में दशहरा से पहले विपक्षी नेताओं की ओर से राहुल गांधी के नेतृत्व में जोरदार प्रदर्शन हुआ था. विपक्षी नेताओं ने इसमें चुनावी प्रक्रिया, चुनाव आयोग और एसआईआर पर निशाना साधा था. हालांकि, ईवीएम को लेकर विपक्षी नेताओं के सुर अब मंद पड़ते जा रहे हैं. सत्तापक्ष की ओर से अब कहा जाता है कि विपक्षी नेता बार-बार गोलपोस्ट चेंज करते रहते हैं. ईवीएम का विरोध करने के बाद वे एसआईआर पर शिफ्ट हो गए हैं और एसआईआर के बहाने अब वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निशाना बना रहे हैं.
सिलचर नगर निगम चुनाव में हारी कांग्रेस
हाल ही में असम में सिलचर नगर निगम चुनाव में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा. वहां बैलेट पेपर से ही चुनाव हुए थे. कांग्रेस की इस हार पर असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा था, ईवीएम की बात तो छोड़िए, कांग्रेस अब बैलेट पेपर से भी चुनाव नहीं जीत सती. सिलचर नगर निगम चुनाव में भाजपा को जहां 32 सीटें मिली थीं, वहीं कांग्रेस को 2 सीटों से संतोष करना पड़ा था. हिमंता बिस्वा सरमा ने चुटकी लेते हुए आगे कहा था, बैलेट पेपर पर कांग्रेस थाड़ा ज्यादा ही हार गई. उन्होंने कहा था, सिलचर नगर निगम इलाके में 10 सीटों पर कांग्रेस केवल अल्पसंख्यकों के वोट से जीत सकती थी, लेकिन अब वे लोग भी उसे वोट नहीं दे रहे हैं. जबकि निर्दलीयों को 5 सीटें मिल गईं.
झारखंड निकाय चुनाव में बीजेपी ने बढ़त बनाई
असम के अलावा इसी साल फरवरी महीने में झारखंड में निकाय चुनाव हुए थे. वहां भी बैलेट पेपर से मतदाताओं ने अपने वोट डाले थे. हालांकि, वह चुनाव दलीय नहीं था, लेकिन पार्टियों ने प्रत्याशियों को अपना समर्थन दिया था. जब रिजल्ट आया, तब भाजपा समर्थित 12, झामुमो समर्थित 6, कांग्रेस समर्थित 2 तो माले, बसपा और राजद समर्थित एक एक प्रत्याशी ने जीत हासिल की थी. खास बात यह रही कि बैलेट पेपर से हुए चुनाव में भी भाजपा समर्थित प्रत्याशियों ने बढ़त बनाई और विपक्ष के उस नैरेटिव को ध्वस्त कर दिया, जिसमें दावा किया जाता है कि सत्तापक्ष केवल ईवीएम के सहारे चुनाव जीत सकता है.
भोजपुर-बक्सर विधान परिषद सीट पर राजद ने गाड़ा था झंडा
बिहार में ही इसी साल 15 मई को भोजपुर बक्सर विधान परिषद सीट के लिए उपचुनाव का रिजल्ट आया था, जिसमें राष्ट्रीय जनता दल के प्रत्याशी सोनू कुमार राय ने शानदार जीत दर्ज की थी. सोनू कुमार राय ने जनता दल यूनाइटेड के कन्हैया प्रसाद को मात दी थी. इस चुनाव से हताश राष्ट्रीय जनता दल कार्यकर्ताओं में जोश भर गया था और पार्टी के नेता पटना से लेकर दिल्ली तक ईवीएम के बदले बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग बुलंद करने लगे थे. राष्ट्रीय जनता दल के कार्यकारी अध्यक्ष और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा था, हम शुरू से कह रहे हैं कि अगर आज देश और प्रदेश में मशीन यानी ईवीएम के बदले बैलेट पेपर से चुनाव हो तो भारतीय जनता पार्टी और एनडीए कही भी नहीं टिकेगी. उन्होंने विधानसभा चुनाव को लेकर कहा कि हमलोगों ने 150 से अधिक सीटें पोस्टल बैलेट से जीती थीं, लेकिन तंत्र और यंत्र की मदद से हरा दिया गया था.