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Bihar Flood: गंडक बराज से 5.43 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज होने से तबाही! मधुबनी में टापू बने गांव, गोपालगंज में भी स्थिति गंभीर

Bihar Flood: वाल्मीकिनगर गंडक बराज से 5.43 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया है. वहीं, मधुबनी में कई गांव टापू में बदल गए हैं. लोगों में प्रशासन के खिलाफ आक्रोश देखने को मिल रहा है.

Edited By Ranjana Kumari
Published: Sep 28, 2026, 11:03 AM IST | Updated: Sep 28, 2026, 11:50 AM IST
Image Credit: बिहार में जलप्रलय! (AI Generated Image)
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बिहार के कई जिलों में प्रकृति ने तबाही मचा दी है. नेपाल के तराई क्षेत्रों से लेकर गंडक बराज तक भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने से कई इलाके जलमग्न हो गए हैं, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त है. दूसरी ओर, जमुई में लगातार हो रही बारिश ने स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल दी है, जहां अस्पताल परिसरों में जलभराव के बीच मरीजों का इलाज भगवान भरोसे चल रहा है.

मधेपुर प्रखंड के दर्जनों गांव-मोहल्लों में घुसा बाढ़ का पानी
बता दें कि नेपाल के तराई क्षेत्रों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से मधुबनी की कोसी-कमला नदी के जलस्तर में भारी वृद्धि हुई है. मधेपुर प्रखंड के कोसी दियारा इलाके में बाढ़ का कहर जारी है. कई गांवों के सैकड़ों घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है. मधेपुर प्रखंड के दर्जनों गांव-मोहल्लों में बाढ़ का प्रवेश हो चुका है, जिससे लोगों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. घरों में पानी घुस जाने से खाने-पीने का सामान सहित अन्य सामग्री बर्बाद हो गई है. 

कोसी दियारा इलाके के गोबरगढ़ा, मेनाही, परियाही, भवानीपुर, बगेवा, लुचबनी, असुरगढ़, गढ़गांव, बसीपट्टी, टेंगराहा, महपतिया, बकुला और लिलजा सहित कई गांव बाढ़ के पानी से घिरकर टापू जैसे दिख रहे हैं. हजारों बाढ़ पीड़ितों के लिए किसी तरह का राहत और बचाव अभियान नहीं चलाया गया है, जिससे लोगों में प्रशासन के खिलाफ आक्रोश है. वहीं, डीएम आनंद शर्मा बाढ़ वाले इलाकों का जायजा ले रहे हैं, लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दे रहे हैं. उन्होंने प्रशासन और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को अलर्ट रहने का निर्देश दिया है.

बेतिया: चौमुखा पंचायत का आधा दर्जन गांव बाढ़ में डूबा
बेतिया में वाल्मीकिनगर गंडक बराज से देर रात्रि 5 लाख 43 हजार क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया है, जिससे गंडक नदी अब निचले इलाकों में कहर बरपा रही है. जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर है. योगापट्टी की चौमुखा पंचायत का आधा दर्जन गांव बाढ़ में डूब गया है और गांवों का सड़क संपर्क भंग हो गया है. दियारे इलाके में आम लोगों का हाल बेहाल है. चौमुखा के मदारपुर गांव में सैकड़ों घरों में दो दिन से चूल्हा नहीं जला है. ग्रामीण एक घर से दूसरे घर जाने के लिए कड़ाह का सहारा ले रहे हैं. गांवों में नाव ही मात्र एक सहारा बचा है. पीड़ित परिवार राहत सामग्री और सूखे राशन की मांग कर रहे हैं, जबकि महिलाएं गांव में सामुदायिक किचन चलाने की मांग कर रही हैं. बाढ़ पीड़ितों के इस हाल का जी मीडिया ने ग्राउंड जीरो से जायजा लिया है.

गोपालगंज में भी बढ़ा गंडक नदी का जलस्तर
वहीं, वाल्मीकिनगर गंडक बराज से पानी छोड़े जाने के कारण गोपालगंज में नदी का जलस्तर बढ़ने लगा है. बाढ़ का पानी सदर ब्लॉक के निचले इलाकों, खासकर जागीरी टोला, मलाही टोला और खाप मकसूदपुर में फैलने लगा है. ग्रामीण अपने मवेशियों के साथ घर छोड़कर तटबंधों और ऊंचे इलाकों में शरण लेने जा रहे हैं, जबकि जिला प्रशासन निवासियों से इन निचले इलाकों को खाली करने की अपील कर रहा है. आज सुबह रामनगर में सड़क पर बाढ़ का पानी आ गया. नतीजतन, ग्रामीणों को अपने मवेशियों के साथ पानी में चलकर गांव से बाहर निकलना पड़ रहा है, क्योंकि नाव का कोई इंतजाम नहीं किया गया है. गांव की एक महिला ने बताया कि बाढ़ का पानी पूरे गांव में फैल रहा है और सरकार की ओर से कोई मदद नहीं मिली है. उन्होंने बताया कि वे अपने मवेशियों के साथ तटबंध की ओर जा रहे हैं. अभी नाव की व्यवस्था नहीं की गई है, इसलिए पानी पार कर अनाज और समान के साथ जा रहे हैं.

जमुई में स्वास्थ्य व्यवस्था की खुली पोल, छत से टपक रहा पानी
वहीं, जमुई जिला के मलयपुर में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर किए जा रहे तमाम दावों के बीच, तीन दिनों से हो रही रुक-रुककर बारिश ने मलयपुर स्थित अतिरिक्त उप स्वास्थ्य केंद्र की बदहाली की तस्वीर सामने ला दी है. जर्जर भवन की छत और दीवारों से बारिश का पानी लगातार रिसने के कारण अस्पताल के जनरल वार्ड में जलभराव हो गया. बेड तक पानी पहुंचने के बाद मरीजों को आनन-फानन में प्रसव कक्ष में शिफ्ट करना पड़ा, जिससे सामान्य मरीजों के साथ-साथ प्रसूताओं और नवजातों को एक ही जगह रखने की मजबूरी बन गई है.

लगातार पानी गिर रहा, चारों तरफ फैली बदबू
देर रात पेंघी गांव निवासी हलीमा खातून अपनी बेटी सेरोन खातून के प्रसव के लिए अस्पताल पहुंचीं. प्रसव में समय लगने के कारण उन्हें जनरल वार्ड में रुकने को कहा गया, लेकिन वार्ड में बारिश का पानी जमा था और बेड भी भीग चुके थे. इसके बाद गर्भवती महिला को प्रसव कक्ष में ही इंतजार करना पड़ा, जबकि उनकी मां पानी से बचने के लिए अस्पताल के बाहर बरामदे में कुर्सी पर बैठी नजर आईं. इस दौरान हलीमा खातून ने बताया कि वे इलाज कराने आई थीं, लेकिन यहां अपनी और मरीज की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है. छत से लगातार पानी गिर रहा है और चारों तरफ बदबू फैली हुई है.

एक भी कमरा ऐसा नहीं, जहां पानी न टपक रहा हो
अस्पताल भवन की स्थिति इतनी खराब है कि कई कमरों और कक्षों की छत से पानी टपक रहा है. बारिश के दौरान मरीजों और उनके परिजनों को सुरक्षित जगह तलाशनी पड़ रही है. परिजनों का आरोप है कि सामान्य मरीजों, प्रसूताओं और नवजातों को एक ही स्थान पर रखने से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है. एएनएम सविता कुमारी ने बताया कि बारिश के पानी से बचाने के लिए प्रसूता को प्रसव कक्ष में रखा गया है. भवन की दीवार और छत जर्जर है और उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से फिलहाल व्यवस्था संभालने का प्रयास किया जा रहा है.

- बेतिया से धनंजय द्विवेदी, मधुबनी से बिंदु भूषण, जमुई से अभिषेक निरला और गोपालगंज से मदेष तिवारी की रिपोर्ट

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About the Author

रंजना कुमारी Zee Bihar Jharkhand की डिजिटल टीम में बतौर Sub-Editor अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं. बिहार के सिवान जिले के जीरादेई से ताल्लुक रखने वाली रंजना स्थानीय और जमीनी मुद्दों पर गहरी पकड़ रखती हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में वे मुख्य रूप से राजनीति, क्राइम, यूटिलिटी और देश-दुनिया की अहम रूटीन खबरों को प्रमुखता से कवर करती हैं. Zee Media का हिस्सा बनने से पहले रंजना ने न्यूज इंडिया 24x7 में भी डेढ़ साल तक अपनी सेवाएं दी थीं. एकेडमिक की बात करें तो रंजना GJU से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर रही हैं.
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