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बिहार में दाल मिल लगाने का सुनहरा मौका: सरकार देगी 25 लाख तक की सब्सिडी, 15 सितंबर तक करें आवेदन

बिहार सरकार दलहन की प्रोसेसिंग, भंडारण और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए दाल प्रसंस्करण इकाई स्थापना योजना चला रही है. योजना के तहत परियोजना लागत का 33% या अधिकतम 25 लाख रुपये तक अनुदान मिलेगा.

Written By Rupak Kumar
Published: Sep 11, 2026, 09:40 AM IST | Updated: Sep 11, 2026, 09:47 AM IST
Image Credit: प्रतीकात्मक फोटो (AI Photo)
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बिहार सरकार ने राज्य में पैदा होने वाली फसलों की अच्छी कीमत और किसानों की आय बढ़ाने के लिए खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा दे रही है. इसी के तहत कृषि विभाग ने दलहन की प्रोसेसिंग, भंडारण दाल के अच्छे मुल्य के लिए खाद्य प्रसंस्करण इकाई स्थापना योजना शुरू की है. इस परियोजना के तहत यदि कोई नई दाल मिल लगाने के लिए इच्छुक है तो उसे सरकार की तरफ से आर्थिक मदद दी जाएगी. इच्छुक लोग 15 सितंबर 2026  तकऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. एफपीओ, सीएलएफ, पैक्स, उद्यमी, व्यक्तिगत आवेदक और अन्य पंजीकृत संस्थाएं इसके लिए आवेदन कर सकती हैं.

किसानों को बेहतर दाम और गांवों में रोजगार का मौका
बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि जो भी दलहन में आत्मनिर्भर बनना चाहते है तो उसके लिए बिहार सरकार ने आत्मनिर्भरता के मिशन के तहत किसानों की आय बढ़ाने और उनकी फसल को ज्यादा से ज्यादा दाम दिलाने पर काम कर रही है. दाल प्रसंस्करण इकाई लगने से किसानों को उनकी फसल का उचित दाम मिलेगा और साथ ही गांवों में लोगों को रोजगार का एक नया अवसर भी प्राप्त होगा. उन्होंने पात्र FPO, पैक्स और युवा उद्यमियों से इस योजना का लाभ उठाने की अपील की है.

33% तक मिलेगा सब्सिडी
इस परियोजना तहत जो भी लोग दाल मिल लगाने का सोच रहे है तो सरकार इसके लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया  है. इस योजना के तहत मिल लगाने में जो भी लागत आएगी
उसका 33 प्रतिशत या अधिकतम 25 लाख रुपये तक का सब्सिडी दिया जाएगा. यह राशि प्लांट और मशीनरी, भवन, वेयरहाउस और भंडारण की सुविधा तैयार करने में इस्तेमाल की जा सकती है. इस परियोजना में भवन और गोदाम बनाने के लिए अधिकतम 30 प्रतिशत तक सब्सिडी होगा. वहीं जमीन बिजली कनेक्शन, कर्मचारियों के खर्च और अन्य संचालन खर्च के लिए सब्सिडी नहीं मिलेगा.

10 जिलों में लागू योजना
नई दाल प्रसंस्करण इकाई की क्षमता कम से कम 300 किलोग्राम प्रति घंटा होनी चाहिए. इस इकाई में बीआईएस मानक की मशीनरी और FSSI लाइसेंस जरूरी होगा. लाभार्थी को इकाई कम से कम तीन साल तक चलानी है. जो भी सब्सिडी की राशी होगी वह डीबीटी के जरिए लाभार्थी के खाते में भेजी जाएगी. इस योजना की लाभ बिहार के 10 जिले पटना, नालंदा, औरंगाबाद, मुजफ्फरपुर, लखीसराय, सुपौल, भागलपुर, सीतामढ़ी, जहानाबाद और गया में लागू है.

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About the Author

रुपक कुमार मिश्रा zee bihar Jharkhand की डिजिटल टीम में बतौर Sub-editor के तौर पर कार्यरत है. वे राजनीति, क्राइम, यूटिलिटी और रुटीन खबरों पर काम करते हैं. इसके अलावा, टेक्नोसिस मीडिया में इन्हें एक साल काम करने का अनुभव है. शिक्षा की बात करें तो राजर्षि टंडन ओपन यूनिवर्सिटी से इन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की है.
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