सिकंदराबाद से ट्रेन की पूरी बोगी बुक कर पटना लाए बप्पा, इस बार दगडूशेठ गणपति जैसा है 'गर्दनीबाग के राजा' का रूप
गणेश चतुर्थी के दौरान मुंबई के 'लालबाग के राजा' की चर्चा खूब होती है. इसी तर्ज पर पटना में भी 'गर्दनीबाग के राजा' की पहचान बनी है. आज गणेश चतुर्थी के पहले दिन गर्दनीबाग के राजा की पूजा शुरू हो गई है.
गणेश चतुर्थी के पहले दिन 14 सितंबर, 2026 दिन सोमवार को पटना में जगह-जगह गणपति बप्पा की पूजा-अर्चना शुरू हो गई है. इसी बीच गर्दनीबाग के राजा इस बार अपने खास स्वरूप को लेकर चर्चा में हैं. यहां स्थापित गणपति की प्रतिमा का रूप श्रीमंत दगडूशेठ गणपति से मिलता-जुलता रखा गया है. खास बात यह है कि करीब 6 फीट ऊंची यह प्रतिमा पटना में तैयार नहीं हुई, बल्कि सिकंदराबाद से बनकर यहां पहुंची है. बप्पा को पटना लाने के लिए ट्रेन की एक बोगी बुक की गई थी.
गर्दनीबाग के राजा की पूजा यहां साल 2013 से लगातार हो रही है. बाल विकास संघ, चितकोहरा, पीपल स्थान की ओर से यह आयोजन कराया जाता है. कमेटी के अध्यक्ष सूरज के मुताबिक, हर साल यहां 10 दिनों तक गणपति की पूजा होती रही है. पूजा के दौरान हर दिन शाम की आरती के बाद भंडारे का आयोजन किया जाता है. इसके लिए भक्तों की ओर से सहयोग किया जाता है और उसी सहयोग से भंडारा बांटा जाता है. इस बार 11 दिनों तक गणेश उत्सव मनाया जाएगा.
दगडूशेठ गणपति से मिलता-जुलता है स्वरूप
इस बार गर्दनीबाग के राजा का स्वरूप खास तौर पर श्रीमंत दगडूशेठ गणपति से मिलता-जुलता बनाया गया है. सूरज बताते हैं कि इसी रूप में इस बार गणपति बप्पा को विराजमान कराया गया है. प्रतिमा की ऊंचाई करीब 6 फीट है. यह प्रतिमा पीओपी से बनी है और इसमें सोने की धातु से जुड़ा काम भी किया गया है. सूरज के मुताबिक, प्रतिमा में करीब 1 ग्राम सोने की धातु का इस्तेमाल हुआ है.
छह महीने में तैयार हुई प्रतिमा
गर्दनीबाग के राजा की इस प्रतिमा को सिकंदराबाद में तैयार किया गया है. इसे बनाने में करीब छह महीने का समय लगा. प्रतिमा तैयार होने के बाद इसे पटना लाने की भी खास व्यवस्था की गई. सूरज के मुताबिक, प्रतिमा को सिकंदराबाद से पटना लाने के लिए रेलवे की एक पूरी बोगी बुक की गई थी. उनका कहना है कि सिकंदराबाद रेलवे स्टेशन के कर्मचारियों ने इस दौरान काफी सहयोग किया.
बप्पा के लिए बुक कराई पूरी बोगी
सूरज बताते हैं कि सिकंदराबाद रेलवे स्टेशन पर जिस समय प्रतिमा लाई गई थी, वहां अन्य सामान की लोडिंग भी हो रही थी. ऐसे में भक्तिभाव को ध्यान में रखते हुए प्रतिमा को अलग तरीके से लाने का फैसला किया गया. इसके बाद ट्रेन की पूरी बोगी बुक कर प्रतिमा को सिकंदराबाद से दानापुर तक लाया गया. दानापुर पहुंचने के बाद प्रतिमा को वाहन से गर्दनीबाग लाया गया. इस बार यहां 11 दिनों तक गणपति उत्सव मनाया जाएगा. हर दिन शाम की आरती के बाद भंडारे का आयोजन भी होगा.
रिपोर्ट: प्रिंस कुमार कुशवाहा