SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

बिहार में करीब 7.25 करोड़ लोगों के पास है मोबाइल फोन, टेलीकॉम कंपनियों के लिए अभी भी है बहुत स्कोप

बिहार में मोबाइल फोन यूजर बड़ी तेजी से बढ़ रहे हैं और इंटरनेट भी खूब इस्तेमाल कर रहे हैं. भारत सरकार के संचार मंत्रालय की ओर से जून 2026 में जारी रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में प्रति व्यक्ति महीने में 24.2GB डेटा खर्च करता है. इस मामले में बिहार से सिर्फ गुजरात आगे है.

Written By K. Raj Mishra
Published: Sep 08, 2026, 12:51 PM IST | Updated: Sep 08, 2026, 01:01 PM IST
Image Credit: बिहार में करीब 7.25 करोड़ लोगों के पास है मोबाइल फोन (प्रतीकात्मक तस्वीर)
Join

बिहार में टेलीडेंसिटी (दूरसंचार सेवा से सीधे जुड़े उपभोक्ता) का ग्राफ बड़ी तेजी से बढ़ रहा है. भारतीय टेलीकॉम नियामक प्राधिकरण (TRAI) के आंकड़ों के अनुसार, बिहार में कुल मोबाइल कनेक्शन धारकों की संख्या लगभग 7.25 करोड़ है. इसी विषय से संबंधित बिहार सरकार ने 2024 में एक रिपोर्ट पेश की थी. प्रदेश सरकार ने बताया था कि साल 2019 में जहां राज्य में लगभग 6 करोड़ मोबाइल यूजर्स थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 7.25 करोड़ हो चुकी है. सरकार ने बताया था कि पिछले कुछ वर्षों में राज्य में डेटा खपत में करीब 15 गुना की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इस रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में औसत मासिक डेटा खपत बढ़कर 27 जीबी प्रति यूजर तक पहुंच चुकी है. इससे साफ है कि पारंपरिक फीचर फोन की तुलना में 4G/5G स्मार्टफोन यूजर्स की संख्या तेजी से बढ़ी है.

नेट बैंकिंग उपभोक्ताओं की संख्या तेजी से बढ़ी

बिहार बिजनेस कनेक्ट 2024 के मंच पर उद्योग विभाग की तरफ से पेश किए आंकड़ों के अनुसार, राज्य में कुल मोबाइल यूजर्स का बेस 7.25 करोड़ से अधिक है. इसके साथ ही प्रदेश में मोबाइल टावरों की संख्या 45 हजार से ज्यादा है. इतना ही नहीं ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क में भी काफी विस्तार हुआ है. इसकी वजह से गांवों तक इंटरनेट पहुंचा है. राज्य में अकेले मोबाइल और नेट बैंकिंग का इस्तेमाल करने वाले एक्टिव यूजर्स की संख्या ही डेढ़ से पौने दो करोड़ के पार है. जाहिर सी बात है कि ये लोग स्मार्टफोन का इस्तेमाल कर रहे हैं. राज्य सरकार ने बताया था कि प्रदेश में डेटा यूसेज में 15 गुना उछाल आया है. प्रदेश में औसत मासिक डेटा खपत बढ़कर 27 जीबी प्रति यूजर तक पहुंच चुकी है. ट्राई ने भी इंटरनेट यूजर्स की ग्रोथ रेट में अभूतपूर्व उछाल आने की बात कही है. ट्राई ने बताया कि मार्च 2023 में जहां बिहार में 6.34 करोड़ इंटरनेट सब्सक्राइबर थे, वहीं यह संख्या बढ़कर 7.17 करोड़ से अधिक हो गई है.

'फोन पर गांव वाले करते हैं ज्यादा बातें'

उधर, भारत सरकार के व्यापक मॉड्यूलर सर्वेक्षण दूरसंचार 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में शहर की तुलना में अधिक लोग मोबाइल पर बतियातें हैं. ग्रामीण क्षेत्र के लिए में यह आंकड़ा 97.8% है, जबकि शहरी क्षेत्र में 96.6% है. इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में 15-29 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 92.7% लोगों ने पिछले तीन महीनों के दौरान कम से कम एक बार इंटरनेट का उपयोग किया, जबकि शहरी क्षेत्रों में इसी आयु वर्ग के लगभग 95.7% लोगों ने इंटरनेट का उपयोग किया. सर्वे में यह भी खुलासा हुआ है कि साइबर क्राइम की शिकायत करने में बिहार के लोग पीछे हैं. राष्ट्रीय स्तर पर साइबर क्राइम के मामले में 26.5% लोग शिकायत करते हैं, जबकि बिहार में यह औसत 18.3% ही है.

प्रदेश में 5 लाख 47 हजार सिम बंद हुए

दूर संचार विभाग ने दिसंबर 2024 में नियम बनाया था कि किसी एक व्यक्ति के नाम से 9 से ज्यादा सिम नहीं रख सकता है. इसी नियम के तहत अब 9 से ज्यादा सिम रखने वालों का सिम बंद किया जा रहा है. बिहार के 10 लाख लोगों के पास 9 से ज्यादा सिम थे. इसमें 5 लाख 47 हजार का बंद कर दिया गया है. अभी भी 3 लाख लोगों का सिम बंद किया जाना है. दूर संचार विभाग बिहार सर्किल के अपर महाप्रबंधक अनिल कुमार ने इस बात का भी खुलासा हुआ कि प्रदेश में 11 लाख लोग ऐसे हैं, जिनके नाम से कोई दूसरा व्यक्ति सिम चला रहा था. उनका कहना है कि ठग अक्सर दूसरों के नाम या जाली दस्तावेजों पर सिम लेते हैं, ताकि पकड़े जाने पर उनकी असली पहचान उजागर न हो सके.

मोबाइल कंपनियों के लिए काफी गुंजाइश बाकी

भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) के अप्रैल 2024 के आंकड़ों के अनुसार, देश में मोबाइल यूजर्स की संख्या 100 करोड़ के आंकड़े को पार कर गई है. मोबाइल यूजर्स के मामले में यूपी पहले स्थान पर है. उत्तर प्रदेश के बाद बिहार दूसरे नंबर पर है. बिहार में मोबाइल यूजर्स की संख्या 9 करोड़ 59 लाख 47 हजार 474 दर्ज की गई है. बिहार LSA (लाइसेंस्ड सर्विस एरिया) की टेली-डेंसिटी 63.8% से 64.2% के आसपास है, जो देश के अन्य राज्यों के मुकाबले सबसे कम है, यानी यहां अभी भी मोबाइल और स्मार्टफोन पेनेट्रेशन की काफी गुंजाइश बाकी है. इसका मतलब है कि एक बड़ी आबादी के पास अभी भी अपना पहला स्मार्टफोन होना बाकी है.

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

कर्मराज मिश्रा ज़ी न्यूज (डिजिटल) टीम में बतौर चीफ सब एडिटर कार्यरत हैं. वे यहां देश-विदेश की राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लिखते हैं. कानपुर यूनीवर्सिटी से पत्रकारिता में मास्टर की डिग्री हासिल करके IBN-7 न्यूज चैनल से इंटर्नशिप की. इसके बाद खबर फास्ट, नेशन लाइव और साधना न्यूज न्यूज चैनलों में काम करने के बाद डिजिटल का रुख किया और 2017 से 2020 तक हिंदुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में बतौर सीनियर सब एडिटर काम किया. इसके बाद News Nation, India Ahead के बाद वर्तमान में Z Media का हिस्सा हैं. मीडिया में 10 साल के कार्यकाल के दौरान यूपी, बिहार, छत्तीसगढ़ और दिल्ली विधानसभा चुनावों के अलावा 2019 और 2024 का लोकसभा चुनाव कवर किया है.
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES